Sunday, September 25, 2022
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विधानसभा में CM एकनाथ शिंदे ने खुल कर कहा है कि हमारे लिए मुद्दा अस्तित्व का था, 2024 में दुबारा चुनकर आने का था

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Sampat Saraswat
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महाराष्ट्र के नये CM एकनाथ शिंदे के मुंह से सुनिए कि उद्धव ठाकरे के सत्ता और पुत्र मोह के कारण COVID के दौरान NCP (शरद पवार) और CONGRESS द्वारा कैसे महाराष्ट्र और मुंबई के इस्लामीकरण की शुरुआत हुई।

विधानसभा में CM एकनाथ शिंदे ने खुल कर कहा है कि …..
हमारे लिए मुद्दा अस्तित्व का था, 2024 में दुबारा चुनकर आने का था।

CM एकनाथ शिंदे ने कहा, हमारे महाराष्ट्र के गौरव वीर सावरकर का बार-बार अपमान किया जा रहा था। एक से एक अभद्र शब्द उन पर बोले जा रहे थे। जब कि वह इस दुनिया में नहीं हैं, और ना ही उनके परिवार का कोई सदस्य राजनेता है, कि कोई वीर सावरकर से दुर्भावना रखे। उन पर निजी हमले करे। लेकिन उद्धव ठाकरे एकदम चुप रहे और तो और 11:00 बजे राहुल गांधी ने सावरकर जी पर बेहद अपमान जनक बातें की और ठीक 11:05 पर संजय राऊत राहुल गांधी के चरणों में झुके नजर आए।

दाऊद का करीबी महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बना हुआ है। दाऊद गैंग पूरे मुंबई में फिर से अपना पैर पसार रहा है। लेकिन हम कुछ बोलते थे तो हमें चुप करा दिया जाता था।

पूरे महाराष्ट्र में सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने में सिर्फ हिंदुओं को गिरफ्तार किया गया। आखिर हम कब तक घुटते, हमारे अंदर जमीर है। हमें 5 साल के बाद तो जनता की अदालत में जाना है, तो हम किस मुंह से जनता की अदालत में जाते?

जो नहीं कहा वो बात है कि यह डर कैसे पैदा हुआ था। बात यह थी कि महाराष्ट्र में एक डेमोग्राफिक बदलाव लाया जा रहा था और शिवसेना के कार्यकर्ताओं को अपने अपने चुनाव क्षेत्र में अप्रासंगिक बनाया जा रहा था.. दाऊद पार्टी (NCP) द्वारा।

लोग शिवसेना के लोगों को देखकर नमस्ते करने के बजाय दरवाजे बंद कर रहे थे… धड़ाम से। और शिवसेना के लोग परेशान थे इस बात से। सदियों में आदिलशाही और मुगल भी हिंदुओं का जितना नुकसान नहीं कर पाये महाराष्ट्र में, उतना गत ढाई साल में हुआ है।

कैसे? तो उस डेमोग्राफीक बदलाव को समझना होगा हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे की मुम्बई का इस्लामीकरण

आज आप मुंबई का सर्वे करें तो आपको मुंबई शहर के सभी तटों और सड़कों पर चाय, नाश्ता, आमलेट, पानी आदि देने वाले दूसरे राज्यों के हैं या बांग्लादेश या रोहिंग्या। यहां तक ​​कि सड़क के किनारे बिकने वाली नारियल की गाड़ियां या सब्जी की गाड़ियां भी धीरे-धीरे इस पर मुस्लिम समुदाय का कब्जा हो गया है। मनीष मार्केट, क्रॉफर्ड मार्केट, ग्रैंड रोड के अधिकांश व्यवसायों पर कभी मराठियों और मारवाड़ियों का कब्जा था। आज आपको इस पूरे क्षेत्र में शायद ही कोई हिंदू व्यापारी मिलेगा। जनसांख्यिकी का यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ।

इस्लामिक संगठनों के साथ अबू आज़मी और नवाब मलिक जैसे नेताओं ने ऐसा होने के लिए बहुत मेहनत की है। एनसीपी और ऊधव ठाकरे की शिवसेना ने उन्हें पूरा समर्थन दिया।

इन लोगों ने एक संगठन बना लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, बांग्लादेश या किसी रोहिंग्या से कोई मुसलमान जब मुंबई आता है तो वह सबसे नजदीकी मस्जिद में जाता है। वहां से उसे एनजीओ के नवाब मलिक और अबू आजमी के दफ्तर ले जाया जाता है। उनके लोग मुंबई के सभी इलाकों और उपनगरों का पूरा सर्वे करते हैं कि किस इलाके में किसका कारोबार चलेगा। फिर उस व्यक्ति को ठेला और पूरा उपकरण देकर एक स्थान पर व्यापार करने के लिए भेजा जाता है। वह व्यक्ति अपने बिजनेस से एनजीओ को पैसे देता रहता है।

इस तरह लाखों मुसलमानों को मुंबई में शिफ्ट किया जा रहा है।

मुंबई का जनसांख्यिकी परिवर्तन जोरों पर है। मीरा रोड, नालासोपारा, भिवंडी, मुंब्रा, बांद्रा पूर्व, खार, ग्रांट रोड, भायखला, अब्दुल रहमान स्ट्रीट, मोहम्मद अली रोड, बॉम्बे सेंट्रल, क्रॉफर्ड मार्केट, सांताक्रूज, अंधेरी वेस्ट, जोगेश्वरी, ओशिवारा, राम मंदिर स्टेशन, गोरेगांव पश्चिम, मलाड पश्चिम, मालवानी, चारकोप और कई अन्य क्षेत्र धीरे-धीरे मुस्लिम समुदाय का गढ़ बन गए हैं।

लोकल बोडी चुनावो में बढ़ती MIM, और दाऊद पार्टी की ताकत …..ध्यान करो औरंगाबाद मुन्सी पार्टी पर MIM के कब्जे के प्रयास यदि आपको लग रहा है की ये गटर-नाली, साफ सफाई, पेयजल का मामूली चुनाव होता है, इससे देश में कोई फर्क नहीं पड़ता तो आप बहुत बड़े भ्रम में हैं। आपको याद है जब CAA के विरोध में पूरे देश में छोटे छोटे शाहीन बाग बने थे, उस समय महाराष्ट्र में जगह जगह उन आंदोलनकारियों के लिए सारी व्यवस्थाएं, भोजन, प्रदर्शन की भीड़ जुटाना, वाहन सहित सब काम MIM, दाऊद पार्टी और कांग्रेस के पार्षदो ने किए थे। जबकि मुद्दा नागरिकता का था, गटर नाली, सफाई, पेयजल का नहीं..

किस तरह घुसपैठियों, रोहिंग्या को जगह जगह बसाया जा रहा है। एक बहुत बड़ा सिस्टम काम करता है, इनको बसाने, इनके कागज़ बनाकर देने में। पूरी मुंबई में डेमोग्राफिक चेंज किया जा रहा है.. योजनाबद्ध तरीके से। आपको शायद पता होगा कि आधार कार्ड बनवाने के लिए यदि आपके पास कागज़ नहीं हो तो पार्षद के पत्र पर लिखवा कर आप आधार कार्ड बनवा सकते हो? और फिर आधार कार्ड से अन्य राशन इत्यादि के कार्ड, मुफ्त इलाज सहित अन्य सरकारी सुविधाएं।

आज मुंबई में कई ऐसे इलाके हैं जहां कोई भी हिंदू व्यक्ति चुनाव जीतने की उम्मीद नहीं कर सकता।

कोरोना महामारी के समय योजनाबद्ध ढंग से, मिलों से, फैक्ट्रियों से, मुंबई आर्थिक राजधानी में काम करने वाले जो हिंदू मजदूर थे… षड्यंत्र करके सड़कों पर उतार कर उनको भगाया गया। वहां से पलायन के लिए मजबूर किया गया और बाद में पूरी योजना के तहत रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को वहां सेट किया गया!

इन्हीं ढाई वर्षों की MVA की सरकार के दौरान। मुंबई पुलिस में मुसलमानों की भर्ती के लिए नवाब मलिक और अबू आजमी ने राकांपा के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया है।सतारा, कोल्हापुर, सांगली, रायगढ़, अहमदनगर, पुणे, नागपुर, मुंबई केंद्रों में लोकेशन कोचिंग खोली गई है ताकि उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल आदि के लोग शामिल हो सके।बहुत सारी परिस्थितिजन्य समस्याएँ थीं जिससे अधिकांश का दम घुट रहा था उद्धव ठाकरे की शिवसेना में और सर जब पानी उपर बहने लगा तब अंतत: यह कदम उठाने पर हमलोग मजबूर हुए। बर्दाश्त की भी एक सीमा होती है हमे बागी बनना पड़ा और हक के लिए लड़ना बागी नहीं कहलाता है।

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