काश, इस कुम्भ के बहाने ही इंडियन स्टेट को विविधता की समझ आ जाती

यदि इंडियन स्टेट के कर्ताधर्ताओं (चाहे नेता हों या प्रशासन या न्यायालय) को हिंदुत्व की इन विविध सुंदरताओं की रत्ती भर भी समझ होती तो सबरीमाला जैसे मूर्खतापूर्ण निर्णय न आते।

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क्या झूठ बोलकर राहुल गाँधी मोदी को हरा पाएंगे?

अगर राहुल गाँधी या कोई और नेता ऐसा समझता है कि बेबुनियाद आरोपों को पूरी बेशर्मी के साथ बार-बार दोहराने से उसे सत्ता मिल सकती है, तो अभी भी ३-४ महीने का समय बाकी है-राहुल गाँधी ऐसे झूठे आरोप लगाने के लिए पूरी तरह आज़ाद हैं.