Thursday, December 3, 2020

Satire

Teachers assign essays with a 280 character limit

This a satire news article, which 'reports' that the government has added 280 character essays to the educational curriculum in an attempt to train students to use Twitter in the future. Note: I have chosen an image of a school from your media library and added the twitter logo on top of it.

दाऊद लौटेगा भारत – कहा पैंसठ साल का और सीनियर सिटीजन होने के कारण पुलिस उसे नहीं पकड़ सकती

दाऊद को लगता है कि पैंसठ की उम्र और वरिष्ठ नागिरक बनने के बाद भारत के GO और लिबरल्स उसके लिए सरकार से लड़ेंगे और उसे जेल में एक दिन भी नहीं रहना पड़ेगा।

Review of Indian democracy by departed leaders

As per the determined demand of highly annoyed departed souls of freedom fighters, who had dreamed that their mother land to be a vibrant global democratic power but as they lately noticed the progress was not to their expectation, the FoN convened a meeting of Working Committee of freedom fighters for review of the progress: A satirical take

लक्ष्मी बॉम्ब: हम पे ये किसने हरा रंग डाला?

जैसा कि सर्वविदित है, इस दुनिया में एक ही धर्म है, और वह धर्म ही दुनिया की सभी बुराइयों की जड़ है। वह धर्म पटाखों से प्रदूषण फैलाता है, गरीब के हिस्से का दूध और अन्न मूर्तियों पर चढ़ाता है अथवा यज्ञ में जलाता है। इस दुनिया में एक ही ऐसा धर्म है जो कट्टर है, अंधविश्वासी है और पता नहीं क्या क्या?

To avoid poaching, Joe Biden takes his electors by bus to Hilton hotel

A parade of buses was seen waiting outside the Hilton hotel in the capital, as the final counting for the 2020 US Presidential election is in progress.

सहिष्णुजन पर व्यंग

क्या हुआ… बड़े डरे डरे से नज़र आ रहे हो कही मज़हबी नारे सुन कर आ रहे हो??

सूमो, नमो और नीमो

सूमो बाबू, को जब CM का संदेसा मिला, तब दोपहर ढल रही थी। वह Secretary के साथ GST Council की दो दिनों...

When Rahul Ji, Modi Ji and Lalu Ji met at a roadside dhaba!

Just prior to Bihar election, these three indulge into discussion. Read where it leads to and ends to.

“माल है क्या?” देश में माल की कमी से जूझता ड्रगवुड, प्रधानमंत्री क्यों है खामोश

2014 से पहले मुझे बराबर मेरा माल मिलता था लेकिन जब से आपकी सरकार आई है तब से धीमे धीमे माल की कमी से मुझे जूझना पड़ रहा है। साल 2017 तो मेरे लिए इतना खराब रहा कि नशा पाने के लिए मात्र फोन से ही काम चलाना पड़ता है।

जांबाज पुलिस

"बीजेपी और आरएसएस के एजेंट पाए जाने पर सख्त कार्यवाही होगी। बुकिंग था कि नहीं यह जांच का विषय नहीं है! धार्मिक आधार पर भेदभाव बर्दास्त नही होगी। "नो बॉडी विल ट्राय टू डिस्टर्ब कम्युनल हार्मोनी इन बंगाल! मा माटीर मानुस! जय बंगला! अमार बंगला! सोनार बंगला! विश्व बंगला! जय कोलकाता पुलिस।"

Latest News

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

2020: An unprecedented, unpredictable, and uncertain year

Who could have imagined that the “unique 2020” would ironically turn into the most "unprecedented, unpredictable, and uncertain 2020" of historic proportions, perhaps not even worth remembering and writing about?

Mr. Ahmad Patel, they missed you!

Through the obituaries and condolences written by MSM journalists, one can easily see as to why these power brokers who used to enjoy the access to power corridors are so unnerved as they miss the absence of jugglers and conjurers in current regime.

गुपकार गैंग द्वारा रोशनी एक्ट की आड़ में किया गया 25000 करोड़ रुपए का घोटाला!

व्यवस्था का लाभ उठाकर 2001 से 2007 के बीच गुपकार गैंग वालों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर को जहाँ से मौका मिला वहाँ से लूटा, खसोटा, बेचा व नीलाम किया और बेचारी जनता मायूसी के अंधकार में मूकदर्शक बनी देखती रही।

Death of the farmer vote bank

While in the case of a farmer the reform delivered double benefit but the political class faces double whammy, that of losing its captive vote bank that was dependent on its sops and secondly losing the massive income they earned as middlemen between the farmer and the consumer. Either the farmer is misinformed or wrongly instigated, otherwise it is impossible to conceive that any farmer should be actually unhappy or opposed for being given more choices, as to whom to sell their produce.

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एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था के मध्य अंतर और हमारे इतिहास के साथ किया गया खिलवाड़

वास्तव में सनातन में जिस वर्ण व्यवस्था की परिकल्पना की गई उसी वर्ण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके समाज में जाति व्यवस्था को स्थापित कर दिया गया। समस्या यह है कि आज वर्ण और जाति को एक समान माना जाता है जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

Pt Deen Dayal Upadhyaya and Integral Humanism

According to Upadhyaya, the primary concern in India must be to develop an indigenous economic model that puts the human being at centre stage.

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.