Saturday, June 25, 2022
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keshavnandan

धार्मिक कट्टरता और सनातन परंपरा

हिंदू धर्म में कट्टरता और धर्म के नाम पर हिंसा का कोई स्थान नहीं है। किन्तु वर्तमान की घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि धर्म रक्षार्थ खडे़ होना हिन्दुओं की मजबूरी बन गई है।

‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ पर तथाकथित सेकुलरों की दुविधा और दोगलापन

आप क्या सोचते हैं कि, 19 जनवरी 1990 को शुरू हुआ जघन्य नरसंहार सिर्फ एक दिन में घटित हुआ होगा? सिर्फ एक दिन में सारी तैयारियां हो गई थी? नहीं यह वर्षों का षड्यंत्र था जिसे तथाकथित सेकुलर सरकारों ने नजरअंदाज किया। बाद में तो षड्यंत्र को सिर्फ अंजाम दिया गया।

हिजाब, विवाद और क्रिकेट

कुछ वर्षों पहले क्रिकेट जगत में ऑस्ट्रेलिया ने एक रणनीति खूब अपनाई, जिसे अंग्रेजी में 'स्लेजिंग' कहते हैं। ठीक उसी रणनीति पर कुछ ताकतें चल रही हैैं। भारतीय धर्म और संस्कृति पर निरंतर प्रहार हो रहे हैं।

ठहरा हुआ अतीत या अपने आप को दोहराता हुआ अफगानिस्तान का 1000 साल पहले का इतिहास?

भारत में सभी धर्म सुरक्षित हैं लेकिन तब तक जब तक कि हम वो गलतियां नहीं दोहराते जो अफगानिस्तान के मूल निवासियों ने दोहराईं। इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है और गलतियां सुधारने का अवसर दे रहा।

हम अस्पताल के लिए लड़े ही कब थे?

यदि मंदिर नहीं बनता अस्पताल बनता तब यह लोग ताली बजाते और कहते कि देखा तुम हार गए फिजूल में समय बर्बाद किया और बलिदान दिए लेकिन मंदिर नहीं बना पाए। पहचानिए इनको और याद कीजिए यह वही लोग हैं जो अतीत में मंदिर निर्माण की तारीख भी पूछा करते थे।

कोरोना की दूसरी लहर की अधिक भयावहता का असली जिम्मेदार कौन?

यह देश तो हर संकट से जीत ही जाएगा। हो सकता है अभिमन्यु को अपना बलिदान करना पड़े। किंतु अर्जुन का मनोबल बनाए रखना आवश्यक है।

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