Friday, June 25, 2021

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2024 में मोदी का चुनावी मुकाबला किसके साथ होगा?

विपक्ष फेक न्यूज़ का अजेंडा चलाकर देश के खिलाफ लगातार साज़िश को अंजाम दे रहा है और अदालतें विपक्षी दलों के इस अजेंडा के साथ साफ़ खड़ी नज़र आ रही हैं.

राष्ट्रीय-जीवन में छत्रपति शिवाजी का ऐतिहासिक अवदान

23 जून, हिंदू साम्राज्य-दिनोत्सव (शिवाजी का राज्याभिषेक) पर

ऊर्जा क्षेत्र में भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण कर रहे है, सौर उर्जा की ओर बढते हमारे कदम

भारत आज सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत प्रगति कर रहा है एवं इसके अनेक ऊर्जा संवर्धन व सुरक्षा के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन व साथ प्राप्त है।

17 वीं लोकसभा के दो साल में इतना काम, मनमोहन सरकार सोच भी नहीं पाई

17वीं लोकसभा के दो वर्ष पूरे होने पर जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने अपने प्रगति रिपोर्ट जारी की, तो आंकड़े सामने आए, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत की संसद को दुनिया के संसदीय विश्व में एक अलग स्थान दिलाते हैं।

राम द्रोही राम के किस काम के

राममंदिर के लिए पिछले सदियों से चल रहा संघर्ष भव्य राम मंदिर के रूप में भारत के सामने प्रकट होगा। चाहे कितने ही असुर, राक्षस और दुष्ट प्रवृति के लोग राम काज में अड़ंगा लगाएं, भारत के इतिहास पुरुष मर्यादा पुरुषोत्तम का स्थान अयोध्या में पूरी भव्यता के साथ बनेगा।

इक्कीसवीं सदी योग-आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान-विचार-परंपरा की सदी

इक्कीसवीं सदी भारतीय ज्ञान-विज्ञान-विचार-परंपरा की सदी है। कम-से कम 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग-दिवस और उसे मिलने वाला विश्व-बिरादरी का व्यापक जन-समर्थन यही संकेत और संदेश देता है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा: कारण और निवारण

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के बाद हुई हिंसा राजनीतिक नहीं है, उसके पीछे वहाँ की जनसांख्यिकीय स्थिति मुख्य कारक है।

मजबूत “इम्युनिटी” हर बिमारी से लड़ने में सहायक

कृपया कर यह भी समझ लें कि कोई उपचार या कोई दवा तभी असर करती है जब शरीर की इम्यूनिटी अच्छी होती है और रिकवरी कर सकती है, इसलिए इम्यूनिटी को बेहतर रखना हमारे स्वयं के हित में है।

राजनीति के चमन चकोर

बड़ी मुश्किल से और कोरोना की कृपा से उत्तर प्रदेश के लोग भाजपा सरकार से दूसरे मुद्दों पे सवाल कर रहे थे, जिससे चकोरों को फयदा हो सकता था, मंदिर को बीच में ला के इन्होने फिर से वही मोह पैदा कर दिया, जो डैमेज कंट्रोल बीजेपी २ महीने में नहीं कर पाती या शायद चुनाव तक, उसको इन्होने रामलला को बीच में ला के कर दिया।

राजनीतिक विमर्श की भाषा सुधरे

कुछ दिनों पहले ही एक टीवी डिबेट के दौरान एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रवक्ता द्वारा केंद्र में सत्ताधारी दल के प्रवक्ता को ‘नाली के कीड़े’ जैसे अमर्यादित एवं अशोभनीय भाषा के साथ संबोधित किया गया।

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