Saturday, May 8, 2021

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इस ऑटो वाले के हौंसले और जज्बे को सैल्यूट, कोरोना मरीजों के लिए बनें देवदूत, शुरू कर दी फ्री सर्विस

रवि अग्रवाल पेशे से ऑटो चलाने का काम करते हैं। मगर उनके दिल में पीडि़त लोगों की मदद का जो जज्बा है, वह बेमिसाल है।

क्या “मानवता” ही हमारे समय की सबसे बड़ी अतिशयोक्ति है?

परिस्थितियों को देखने पर लगता है, “मानवता” ये शब्द अथवा तत्व ही हमारे समय की सबसे बड़ी अतिशयोक्ति है।

हनुमान जयंती की पूजन विधि क्या है? और शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार हनुमान जयंती प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष पुरनी माँ के दीन को मनाई जाती है साल 27 अप्रैल को मनाई जाएगी चैत्रमा की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है आज हम बात करेंगे की हनुमान जयंती की पूजा विधि क्या है?

पुस्तक- ईमानदार मार्गदर्शक

हमारे वेद पुराणों के समय से, जब से उन्हें पुस्तकों के रूप में लिखा गया है, तब से लेकर आज तक एवं आगे आने वाले समय मे भी पुस्तक के महत्व एवं उपयोगिता को नकारा नही जा सकता।

यन्नेहास्ति न कुत्रचित्- अथ श्री महाभारत कथा

एक ऐसा ग्रन्थ जिसके विषय में स्वयं श्री वेदव्यास कहते हैं, “यन्नेहास्ति न कुत्रचित्” अर्थात जो महाभारत में नहीं है वो कहीं नहीं है। जिस ग्रन्थ का उपक्रम मनुष्यों को उनके अंतःकरण पर विजय प्राप्त कराने के लिए किया गया है, हम उसी को नहीं पढ़ते, न घर में रखते हैं।

शेषप्रश्नों के साथ उनका जाना

समझ में नहीं आता उन्होंने, लखनऊ का इतिहास लिखा, सहेजा या फिर लखनऊ को सिर्फ नवाबों और तवायफों में समेट दिया? चैती, सोहर, बन्ना जैसे लोकसाहित्य को लखनऊ का या अवध और अवधी का इतिहास नहीं कह सकते।

हिंदी बेल्ट के लेखकों, इस महान प्रतिभा को जानो

"तना देहमु, तना गेहमु,तना कालमु तना धनम्‌भु तना विद्‍याजगज्जनुलके विनियोगिंचिनाघनुडी वीरेशलिंगकवि जनुलारा!" अर्थात् "अपना तन, मन, धन, निवास, समय और विद्या सब कुछ जनता के...

निजी नौकरियों में आरक्षण से निवेश में कमी आएगी

आज देश कोरोना महामारी के कारण बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है, और ऐसे नाजुक समय में झारखंड सरकार द्वारा स्थानीय संरक्षण का हवाला देकर निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण लागू किया जा रहा है।

हैप्पी बर्थडे भारतीय रेल

16 अप्रैल को ही भारत में इस प्रकल्प की शुरुआत हुई थी। रेल तबसे आज तक देश की धड़कन बन चुकी है। जो जिम्मेदारी मानव शरीर में खून की है, वही जिम्मेदारी देश के विकास में रेल निभाती है।

एक देश, एक विधान और एक संविधान क्यूँ भारत में मजाक बन कर रह गया है?

डोकलाम विवाद के समय, देश का एक प्रमुख राजनेता चीनी राजदूत से मिलने जाता है, रात के स्याह अंधेरों में मुलाकात होती है, और गौर कीजिये उसके बाद से ही वो राफेल डील के बेसुरे नगमे चिंघाड़ने लगता है। यहाँ सवाल ये है, कि क्यूँ इसमें आपको देशद्रोह नहीं दिखता? क्यूँ उसका हर दौरा विशेष रुप से गुप्त रखा जाता है?

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