Thursday, October 21, 2021
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Meenakshi Dikshit

बस यूँ ही- परदेस में भारत माता की जय और अच्छे दिन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वागत में अमेरिका का भारतीय समुदाय उत्साह में है। भारत माता की जय और वन्दे मातरम के नारों से मन झूम उठता है। गर्व की अनुभूति होती है जब विश्व के इतने शक्तिशाली राष्ट्र की धरा पर वन्दे मातरम बोला जाए। अच्छे दिन यही तो हैं।

सुनो तेजस्विनी, तुम्हारे वाले की भी परख आवश्यक है

एक बार धर्मान्तरण कर लिया तो हिन्दू लड़की को विवाह से मिलने वाले सारे अधिकार खो दिए, शरई अदालत के सामने तो उनकी अपनी औरतें ही लाचार हैं, धर्मान्तरित को क्या अधिकार मिलेगा?

“बिशुन बिशुन बार बार”– खो गया परम्परा का प्रवाह

हम उस पीढ़ी से हैं जिसने बचपन में लोकपर्व बहुत आनन्द लिया है और अब धीरे धीरे इसका विलोपन सा होते देख रही है। तब ये छोटे छोटे लोकपर्व भी महापर्व हुआ करते थे।

क्या नए भारत को नई और स्पष्ट जनसँख्या नीति की आवश्यकता है?

मानव जाति और संस्कृति की कतिपय समस्याएं विश्व में मानवों की जनसंख्या से ही सम्बंधित हैं। यदि जनसँख्या अनियंत्रित होकर बढ़ती रही तो संसाधनों का अभाव होगा और जीवन कठिन होता जायेगा।

बनते रहो चारा, निभाते रहो भाई चारा

राजनैतिक दलों ने सत्ता प्राप्ति के लिए सार्थक काम करने के स्थान पर मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया क्योंकि वो चुनाव जीतने का आसान रास्ता था।

क्या “मानवता” ही हमारे समय की सबसे बड़ी अतिशयोक्ति है?

परिस्थितियों को देखने पर लगता है, “मानवता” ये शब्द अथवा तत्व ही हमारे समय की सबसे बड़ी अतिशयोक्ति है।

यन्नेहास्ति न कुत्रचित्- अथ श्री महाभारत कथा

एक ऐसा ग्रन्थ जिसके विषय में स्वयं श्री वेदव्यास कहते हैं, “यन्नेहास्ति न कुत्रचित्” अर्थात जो महाभारत में नहीं है वो कहीं नहीं है। जिस ग्रन्थ का उपक्रम मनुष्यों को उनके अंतःकरण पर विजय प्राप्त कराने के लिए किया गया है, हम उसी को नहीं पढ़ते, न घर में रखते हैं।

शेषप्रश्नों के साथ उनका जाना

समझ में नहीं आता उन्होंने, लखनऊ का इतिहास लिखा, सहेजा या फिर लखनऊ को सिर्फ नवाबों और तवायफों में समेट दिया? चैती, सोहर, बन्ना जैसे लोकसाहित्य को लखनऊ का या अवध और अवधी का इतिहास नहीं कह सकते।

सुनो तेजस्विनी, सारे दिन तुम्हारे हैं

आश्चर्य है, स्त्रियों के जीवन में इतना व्यापक परिवर्तन होने के बाद भी, वामपंथ प्रायोजित नारी विषयक मुद्दे नहीं बदले, कविताएँ नहीं बदलीं और उनकी मांगें भी उसी कूप के मंडूक की तरह वहीँ कूदती रहती हैं।

आओ तेजस्विनी, प्रेम की बात करें

इसे लव जिहाद कहा जाये या कुछ और किन्तु सच यही है कि लड़कियों के धर्म परिवर्तन के लिए प्रेम का ढोंग किया जा रहा है और उसमें असफलता मिलने पर उनकी हत्या।

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