Friday, February 26, 2021

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दूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के साँपों को!

यदि सरकार ने अब भी इन गुंडों-दंगाइयों-आतंकियों के साथ नरमी बरती तो अगले चुनाव में उसे भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। इन गुंडों-दंगाइयों-आतंकियों से निपटने के लिए अब देशभक्त नागरिकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

लोकतंत्र में हिंसा एवं अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं

लोकतंत्र में हिंसा एवं अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं- लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहन आस्था, विकास एवं सुधार को राजनीति की केंद्रीय धुरी...

कब तक विरोध प्रदर्शन के नाम वतन के साथ गद्दारी को बर्दाश्त करते रहेंगे हम

लोकतंत्र और असंतोष साथ साथ चलते है, लेकिन असंतोष व्यक्त करने वाले प्रदर्शनों को अकेले निर्दिष्ट स्थानों पर होना चाहिए।

बिखरी हुई सामाजिक संरचना और तिनके सिलता वात्सल्यग्राम: आज की जरुरत

समाज की इस एक अनदेखी पहेली की ओर सरकारों ने ध्यान देते हुए एक राष्ट्रीय वृद्धजन नीति का गठन किया है जिसमें वृद्धजनों को तमाम तरह की सुविधाओं के साथ साथ उनकी उचित देखभाल और सामाजिक सम्मान का ध्यान रखे जाने योग्य प्रावधान किये गए हैं किन्तु ये सभी जानते हैं कि सरकारी नीतियों से किसका कितना ही ध्येय पूर्ण होता है।

११वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस आज, अब ई-मतदाता पहचान पत्र कर सकेंगे डाऊनलोड

आज राष्ट्र ग्यारहवाँ राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है, यह दिवस वर्ष १९५० में आज ही के दिन, चुनाव आयोग की स्थापना के उपलक्ष्य में वर्ष २०११ से मनाया जा रहा है।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष: हर भारतीयों के लिए पराक्रम के प्रतीक

भारत माता के सपूत के स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को केंद्र सरकार ने हर साल पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।

पराक्रम दिवस, कुछ ऐतिहासिक तथ्य और नेताजी से प्रेरणा पाता आत्मनिर्भर भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर अग्रसर हो रहा देश बार बार नेताजी से प्रेरणा पाता है। उन्होंने कहा कि आज हम स्त्रियों के सशक्तिकरण की बात करते हैं नेताजी ने उस समय ही आज़ाद हिन्द फौज में ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ बनाकर देश की बेटियों को भी सेना में शामिल होकर देश के लिए बलिदान देने के लिए प्रेरित किया।

महापुरुषों के जीवन-निकष पर हम कितना खरा उतर पाए हैं?

संपूर्ण विश्व में न्याय, समानता एवं स्वतंत्रता के पैरोकार एवं प्रशंसक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरणा ग्रहण करते हैं और करते रहेंगें। उनकी प्रतिभा एवं देशभक्ति, जीवटता एवं संघर्षशीलता, साहस एवं स्वाभिमान, स्वानुशासन एवं आत्मविश्वास, संगठन एवं नेतृत्व-कौशल, ध्येय एवं समर्पण सहसा विस्मित करने वाला है।

खालसा पंथ की सिरजना के पीछे का ध्येय और गुरु गोबिंद सिंह जी

गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा पंथ और उनकी बलिदानी परंपरा के महात्म्य को समझने के लिए हमें तत्कालीन धार्मिक-सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों पर विचार करना होगा।

कश्मीरी हिन्दूओ का नरसंहार और 31 साल का इंतजार

19 जनवरी 1990 का वो दिन कोई भी कश्मीरी हिन्दू कभी नहीं भूल सकता। 19 जनवरी 1990 का वो दिन न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक काला दिन है।

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