Thursday, June 4, 2020

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politics

Action with speed and precision: PM Modi Part II

in second term PM Modi is working speedily with precision and for the aspirations of 130 crore Indians.

One nation one language: An accident waiting to happen

Language can unite the culture in those countries which don’t have a long history to recite. India that is known as Bharat is a cluster of cultural variables.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिला 5 फुट का शिवलिंग

श्री राम जन्मभूमि व प्रभु श्री राम जी की मंदिर के लिए हिन्दू समाज 450 वर्षों से भी अधिक समय से संघर्ष कर ही रहा था।

Going global; staying local- A thought experiment, protecting success

We might need a new parameter, like metric system to define economic development and all the terms associated with it, which can be understood by anyone.

तीन ऐसे लोग जिन्होंने बताया कि पराजय अंत नहीं अपितु आरम्भ है: पढ़िए इन तीन राजनैतिक योद्धाओं की कहानी

ये तीन लोग हैं केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, दिल्ली भाजपा के युवा एवं ऊर्जावान नेता एवं समाजसेवी कपिल मिश्रा एवं तजिंदर पाल सिंह बग्गा। इन तीनों की कहानी बड़ी ही रोचक एवं प्रेरणादायी है।

20 lakh crores package: Freebies or growth oriented?

About 20 lakh crores package, the stimulus declared is 10% of our GDP, highest in the history. It is going to touch every individual directly or indirectly.

Truth through a reverse image search – Satire

Satirical way to show an information propaganda which works very powerfully, even today.

Shivsena: A tale of political journey

Contrary to what people think today about Shiv Sena as the flag bearer of Hindutva, the party never took a great leap towards uniting the Hindus from all parts of the country.

माता सीता के साथ कांग्रेसी माता सोनिया की तुलना: जायज या नाजायज?

सोनिया माँ इटली की थी। कलियुग में राक्षस इनके चरित्र पर सवाल कर रहे हैं। अपशब्द कह रहे हैं। और क्याप्सन में लिखा गया है "अभी भी देश में राक्षस जैसी सोच ज़िंदा है, सीता माँ हम शर्मिंदा है"।

The rise of a hoax: Secularism

Dharmic pluralism rather than secularism is India’s way forward. It is only possible when we as a country come together and accept the fact that we indeed are a Hindu Nation.

Latest News

What to believe?

Our forefathers never had the EXISTENTIAL CRISIS moment this generation is having. They were too busy getting themselves out of subpar life they were in that they never had time to ask these questions or time for that matters.

आजादी मिली सिर्फ भारत के लेफ्ट में

हमें तो आप के इतिहासकारों ने इस बात की भी आजादी नहीं दी की हम महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी के बारे में किताबों में पढ़ सके उसमें भी तो आपने भारत पर अत्याचार और चढ़ाई करने वालों की जिंदगी के बारे में लिख दी कि वो ही इस महान देश के कर्ता धर्ता थे।

एक मुख्यमंत्री जो भली भांति जानता है कि संकट को अवसर में किस प्रकार परिवर्तित करना है: भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री के प्रयासों...

भारत के इन सेक्युलर, लिबरल और वामपंथियों को यह रास नहीं आया कि भगवा धारण करने वाला एक हिन्दू सन्यासी कैसे भारत के सबसे बड़े राज्य का प्रशासक हो सकता है। लेकिन यह हुआ।

2020 अमेरिका का सब से खराब साल बनने जा रहा है? पहले COVID-19 और फिर दंगे

America फिर से जल रहा है: आंशिक रूप से, जैसा कि हिंसा भड़कती है, पुलिस और उनके वाहनों पर हमला किया जाता...

Corona and a new breed of social media intellectuals

Opposing an individual turned into opposing betterment of your own country and countrymen.

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रचनाधर्मियों को गर्भस्थ बेटी का उत्तर

जो तुम्हें अग्नि परीक्षा देती असहाय सीता दिखती है, वो मुझे प्रबल आत्मविश्वास की धनी वो योद्धा दिखाई देती है जिसने रावण के आत्मविश्वास को छलनी कर इस धरा को रावण से मुक्त कराया.

The one difference between the Congress of today and that of before 2014

For the sake of the future generations, for the sake of our children, please read more books about how Congress had been ruling the country and be aware of the dangers.

Justice Sanjay Kishan Kaul was right to call out rising intolerance

The libertarians need to know free speech is not licence for hate speech. Our fundamental rights are not akin to First Amendment Rights, as in the US. There are reasonable restrictions and they have a purpose.

श्रमिकों का पलायन: अवधारणा

अंत में जब कोविड 19 के दौर में श्रमिक संकट ने कुछ दबी वास्तविकताओं से दो चार किया है. तो क्यों ना इस संकट को अवसर में बदल दिया जाए.

Easing lockdown a gamble?

If we want to compare economic condition and job loss due to lockdown and blame the govt., we ought to compare the mortality rate too, which one of the lowest in the world at around 2.83%!