Thursday, June 4, 2020

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BJP

Alternate reality of those who castigate ‘Bhakts’

They are some of those who live in the 'alternate reality' where they 'believe' Nehru and Mughals are responsible for anything good that happened in India. Simple because Nehru was supposed to be some 'secular' leader and the Mughals, of course god sent rulers.

3 befitting replies of Narendra Modi

What strength, is PM Modi made up of, we will never be able to know. But we know one thing for sure. The man is class, India's pride. Even his detractors and critics wish for a Modi at their side!

Going local; staying global

After a tsunami of "Aatamnirbhar" memes I think it's really important to take a deeper look into the subject and see how it is going to play out in the current Global crisis.

तीन ऐसे लोग जिन्होंने बताया कि पराजय अंत नहीं अपितु आरम्भ है: पढ़िए इन तीन राजनैतिक योद्धाओं की कहानी

ये तीन लोग हैं केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, दिल्ली भाजपा के युवा एवं ऊर्जावान नेता एवं समाजसेवी कपिल मिश्रा एवं तजिंदर पाल सिंह बग्गा। इन तीनों की कहानी बड़ी ही रोचक एवं प्रेरणादायी है।

राष्ट्रवाद ही भारत को एक सूत्र में बांध सकता है

हिन्दू संस्कृति के अलावा इस देश को कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से इटानगर तक कोई एक नहीं रख सकता है, कारण हर जाति, जन - जाति और धर्म के मूल में हिन्दू संस्कृति की झलक दिखती है।

Truth through a reverse image search – Satire

Satirical way to show an information propaganda which works very powerfully, even today.

Ranchod’s “Ranneeti”: Strategy in times of Covid-19

This article takes an eagle-eye view of the lockdown’s strategy from the "Leela’s" of Lord Krishna.

‘Dharmokriti’: Transcending nationalism in the 21st century

‘Dharma’ and ‘Samskriti’ together are the cornerstone of India’s narrative; repackaging Pt. Deendayal Upadhyay’s philosophy to redefine Indian Nationalism.

Shivsena: A tale of political journey

Contrary to what people think today about Shiv Sena as the flag bearer of Hindutva, the party never took a great leap towards uniting the Hindus from all parts of the country.

पाकिस्तान POK भारत को ख़ुद देने वाला था, की २०१४ में मोदी जी आ गए

हमारे राहुल गांधी अगर प्रधान मंत्री होते तो बिना लॉकडाउन किए अर्थव्यवस्था पूरी द्रुत गति से दौड़ती और उसके साथ कोरोना से भी हम सब को बचा लेते और तो और कोरोना के भारत मे आने से पहले वैक्सीन बन जाता नेहरू जी के AIIMS में।

Latest News

What to believe?

Our forefathers never had the EXISTENTIAL CRISIS moment this generation is having. They were too busy getting themselves out of subpar life they were in that they never had time to ask these questions or time for that matters.

आजादी मिली सिर्फ भारत के लेफ्ट में

हमें तो आप के इतिहासकारों ने इस बात की भी आजादी नहीं दी की हम महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी के बारे में किताबों में पढ़ सके उसमें भी तो आपने भारत पर अत्याचार और चढ़ाई करने वालों की जिंदगी के बारे में लिख दी कि वो ही इस महान देश के कर्ता धर्ता थे।

एक मुख्यमंत्री जो भली भांति जानता है कि संकट को अवसर में किस प्रकार परिवर्तित करना है: भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री के प्रयासों...

भारत के इन सेक्युलर, लिबरल और वामपंथियों को यह रास नहीं आया कि भगवा धारण करने वाला एक हिन्दू सन्यासी कैसे भारत के सबसे बड़े राज्य का प्रशासक हो सकता है। लेकिन यह हुआ।

2020 अमेरिका का सब से खराब साल बनने जा रहा है? पहले COVID-19 और फिर दंगे

America फिर से जल रहा है: आंशिक रूप से, जैसा कि हिंसा भड़कती है, पुलिस और उनके वाहनों पर हमला किया जाता...

Corona and a new breed of social media intellectuals

Opposing an individual turned into opposing betterment of your own country and countrymen.

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रचनाधर्मियों को गर्भस्थ बेटी का उत्तर

जो तुम्हें अग्नि परीक्षा देती असहाय सीता दिखती है, वो मुझे प्रबल आत्मविश्वास की धनी वो योद्धा दिखाई देती है जिसने रावण के आत्मविश्वास को छलनी कर इस धरा को रावण से मुक्त कराया.

The one difference between the Congress of today and that of before 2014

For the sake of the future generations, for the sake of our children, please read more books about how Congress had been ruling the country and be aware of the dangers.

Justice Sanjay Kishan Kaul was right to call out rising intolerance

The libertarians need to know free speech is not licence for hate speech. Our fundamental rights are not akin to First Amendment Rights, as in the US. There are reasonable restrictions and they have a purpose.

श्रमिकों का पलायन: अवधारणा

अंत में जब कोविड 19 के दौर में श्रमिक संकट ने कुछ दबी वास्तविकताओं से दो चार किया है. तो क्यों ना इस संकट को अवसर में बदल दिया जाए.

Easing lockdown a gamble?

If we want to compare economic condition and job loss due to lockdown and blame the govt., we ought to compare the mortality rate too, which one of the lowest in the world at around 2.83%!