Home Hindi आख़िर कहाँ और कितना बाकी है हिंदू?

आख़िर कहाँ और कितना बाकी है हिंदू?

आख़िर कहाँ और कितना बाकी है हिंदू?

जड़ बनाकर अनंत चेतन को पूजता हिन्दू ,

खुद की दुर्दशा पर सिर्फ वैचारिक चिंतन करता हिन्दू ,

इतिहास को दोहराकर स्वयं पीड़ित बनता हिन्दू ,

जाति, राज्य, भाषा मे खुद को बांधता हिन्दू ,

कौन बचा कैसे है चचा,

निर्पेक्षता का एकतरफा दिखावा करता हिन्दू ,

ब्रिटिश चाल-चलन में आज भी जीता हिन्दू ,

सच कह दो तो कट्टर कहता हिन्दू ,

आपसी भाई चारे की शान में ,

यमुना को मुगलिया बताकर गंगा -जमुना तहज़ीब समझाता हिन्दू ,

मुस्लिम ईसाई सबसे तुमने है मरवाई-ना मानकर ,

21 सदी का सौदागर बनना चाहता हिन्दू ,

सरकारों की नीतियों में चाणक्य को ढूढ़ता हिन्दू ,

हिन्दू राष्ट्र की कल्पना में , वर्तमान में स्वाभिमान बेचता जाता हिन्दू ,

कैरियर , परिवार जीवन मे ,कर्तव्य-कर्म से भागता हिन्दू ,

आख़िर कहाँ और कितना बाकी है , हिन्दू ।

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