Monday, March 1, 2021

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Hindus ashamed of Hindu rituals

भगवद गीता: कठिन समय की आवश्यकता

हम भारतीय सामान्य रूप में, आमतौर पर हमारे प्राचीन ज्ञान को अधिक महत्व नहीं देते हैं, जो पश्चिमी देशों और कई अन्य देशों में गहराई से अंतर्दृष्टि प्राप्त करने और इस महान ज्ञान को ग्रहण करने के लिए प्रयास करते हैं, जो हमें हमारे प्राचीन ऋषियों ने आसानी से विरासत में दिया है।

Why Hindu youth hate their own practice, culture and civilization

The youth should know the difference between modernization and westernization, changes with requirement of time differs from unknowingly influenced by other's way of life.

Religious secularism

With the hypocritical standards which are followed in this country, a person is looked down upon to celebrate an historical moment in his religion.

Healing the bruised psyche of Hindus

Time has come for sacred Hindu symbols of worship and temples to be accorded the glory and reverence they deserve. The epic Ram Mandir that will rise up at Ayodhya will go a long way in healing the bruised psyche of Hindus worldwide.

संस्कृति के अस्तित्व का संघर्ष और सनातन की तैयारी

दीपावली से रक्षा बंधन तक सनातन संस्कृति के समस्त पर्व निशाने पर हैं।सनातन संकृति आज अपनी उद्भव भूमि पर ही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है।

Who is responsible for the current challenges India is facing as a nation?

We are losing our identity. We are allowing people to question the existence of Bhagwan Shree Ram. Some goons destroy a temple of Mata Durga, and we do nothing about it.

पितृसत्तात्मक समाज से वामपंथी नारीवादियों का महायुद्ध

यदि समाज इतना ही पितृ सत्तात्मक था तो ब्रह्म वादिनी स्त्रियाँ कहाँ से आयीं? यदि समाज इतना ही पितृ सत्तात्मक था तो शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का निर्णायक भारती को क्यों बनाया गया?

कब तक चुप रहूँ

आर्यभाषा को कहके दूषित और कर्कश आर्यभाषी को कहके असभ्य "तहजीब" की बाजारू खिचड़ी की पूजा करने वाले; बाल्यकाल से आर्यभाषी हूं! कब तक चुप रहूं?

वटवृक्ष कथा और प्राइम का वेबसिरीज ‘पाताल लोक’

आमेजन प्राइम पर हाल में ही एक वेब सिरीज रिलीज़ हुआ है ‘पाताल लोक’। इस वेब सिरीज़ में एक कुतिया का नाम ‘सावित्री’ रखा गया है।

वट (सती) सावित्री के बहाने नारीवादी चर्चा

एक स्त्री जो अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, लिए गए निर्णय पर अडिग रहना जानती है, निर्णय का कुछ भी परिणाम हो उसे स्वीकार करने के लिए प्रस्तुत है, अपने प्रेम के लिए राजमहल को त्याग वन को जा सकती है, अपने प्रिय की प्राणरक्षा के लिए सीधे यमराज से टकराने का साहस और विजयी होने का सामर्थ्य रखती है क्या वो स्त्री निरीह या अबला हो सकती है?

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