Thursday, July 9, 2020
Home Hindi मोदी से बड़ा मोदी का नाम

मोदी से बड़ा मोदी का नाम

Also Read

Shuvranshu Jha
B.tech in civil engineering from NIT PATNA. Former Senior Engineer at L&T construction. Interested in Journalism, Politics, Constitution and History. Debator.
 

इतिहास में ऐसे पल दुर्लभ ही होते हैं जब व्यक्ति से बड़ा उसका नाम हो जाता है। अगर भारतीय इतिहास के दुर्लभतम व्यक्तित्वों को देखे तो भी यह सबों को नसीब नहीं होता। तुलसीदासजी नें “राम” का नाम श्री राम से बड़ा कहा। बुद्ध एवं महावीर भी इसी श्रेणी में आयेंगे। आधुनिक भारत पर दृष्टि डाले तो गाँधी का नाम स्वयं महात्मा गाँधी से भी बड़ा हैं। इन सबों ने अपने पुरुषार्थ से अपने नाम को इतिहास मे अमर ही नहीं वरण अपने नामों की काया इतनी बड़ी कर दी कि पीढ़ी दर पीढ़ी स्वयं को इन नामों से जोड़ती चली आई।

अगर इस कालचक्र की दिशा वर्तमान की ओर मोड़े तो एक आनंदमय अनुभूति होती है मोदी नाम की। परन्तु, अगर मोदीजी की खानदानी पृष्ठभूमि पर नजर डाले तो जो तुलनात्मक अध्ययन की चाह मन को उत्साहित कर रहा है उस पर प्रश्नचिह्न लगना स्वभाविक है कारण कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम हो, या बुद्ध अथवा महावीर या फिर राष्टपिता गाँधी, इन सभी के समाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि कुलिन हैं। पर, अगर हम वर्तमान प्रधानमंत्री मोदीजी की बात करें तो एक अति समान्य पृष्ठभूमि से तालुक रखतें हैं। गरीबी की संघर्ष ने उन्हे मानवीय मूल्यों को समझकर राष्ट्र एवं नीतियों की ज्ञान से अनुभूति कराया।

पर, क्या उन विभूतियों से मोदीजी की तुलना की कुचेष्टा हास्यापद हैं? वेदानुसार, व्यक्तित्वों की तुलना का मजबूत आधार कर्म है। और कर्म मे प्रगाढ़ता लाने का सुगम मार्ग अनुशासन होकर गुजरता है। बीजेपी में एक जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर अपनी निष्ठा एवं रचनात्मक शैली से अटलजी के मन: भाव मे प्रवेश कर 2001 मे गुजरात राज्य का मुखिया बनने का अवसर मिला। मुखिया पद को सेवक पद मे तब्दील कर, गुजरात की अनुपम सेवाकर अपने नाम को हर गुजरातियों के श्वास में प्रवाहित करवा दिया। अपनी राजकीय सेवा भाव से उन्होंने गुजरात माॅडल की ऐसी अमित छाप छोड़ी कि सम्पूर्ण भारतवर्ष उन्हे अपना बनाने को लालायित हो उठा। मोदी-मोदी की वह आँधी चली की पूरा भारतवर्ष मोदीमय हो गया।

मई 2014 में वें प्रधानमंत्री बन गए। विश्व इतिहास में कई ऐसे मोके आये जब प्रभावी वक्ता जन मन में आश की दीप जलाकर जन-मानस के मन भाव मे प्रवेश कर अपने नेतृत्व की शिखा पर चढ जाता है। संभवतः सभी राजनीतिक आलोचक इसी आशा के तत्व को मोदीजी के राजनीतिक उत्थान का कारण बताया। उनके सफल चुनावी बोल- अच्छे दिन आनेवाले हैं – जन सैलाब बन जन मानष के अन्तःकरण में बस गया। अच्छे दिन के विश्वास तले पूरे हिन्दुस्तान में सर्वोपरी नेता के रूप मे स्वीकृति मिली। पर,एक नेता से एक विचार बनने का सफरनामा यहाँ से शुरु हुई

मोदीजी ने अपने नेतृत्व से सरकारी योजनाओं में जन-भागीदारी बढ़ाकर अत्यधिक योजना को जन-आन्दोलन मे तब्दील कर दिये ।स्वच्छता अब सबों का हक एवं दायित्व बन गया। गंगा की सफाई जन जन की चेतना बन गई। नोटबंदी- कालाधन एवं भ्रष्टाचार- पर विरोधात्मक प्रतीक बन गया।

सबों का  हो  घर
हर घर में  बिजली
हर परिवार का हो खाता
बैंक हो गई अपनी।

 

कई दशकों तक जो सपना था, अब अपना होने लगा था। एक नई भारत की एक नई सुबह, मोदी मे हर जन, जन जन में मोदी सार्थक हो रहा था। पाँच साल बाद आज “मोदी” नाम प्रधानमंत्री से ज्यादा एक क्रांति का नाम है।

जन जन की चेतना का नाम है मोदी
बच्चों बच्चों का विश्वास है मोदी
संतों के आशीर्वाद का फल है मोदी
खेत खलिहान का छाव है मोदी
सेना प्रतिकार है मोदी
घर घर की पहचान है मोदी
हर भारतीयों की शान है मोदी

मोदी साहब वृद्ध होते जा रहे, पर मोदी नाम लोगों में उर्जा का संचार करता। मोदीजी सख्त प्रशासकीय छवि के है, पर इनका नाम बच्चों में नटखटपना प्रवास करवाता है। समर्थक हो, आलोचक हो या समालोचक हो, मोदीजी के ईतर “मोदी” नाम की लहर पर चर्चा की केन्द्रबिंदु रखते है। भारतीय राजनीतिक इतिहास मे पहली बार महिलाओं को भी रैली तक खींचा है तो मोदी के नाम ने। हर चायवाला खुद को मोदी और चौकीदार खुद मे मोदी देखने लगा है। मोदी नाम भारतीय जन -मानष की संघर्ष की कहानी बन चूका है। मोदी नाम की ध्वनि जन जन की आत्मा में बस चूका है शायद मोदी से बड़ा मोदी का नाम हो चूका है?

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

Shuvranshu Jha
B.tech in civil engineering from NIT PATNA. Former Senior Engineer at L&T construction. Interested in Journalism, Politics, Constitution and History. Debator.

Latest News

The Mafia and the anti-Hindu Propaganda; all in the name of Sushant Singh Rajput

Quite interestingly when the impact of underworld on Bollywood is reducing, intellectual terrorism is increasing in various forms.

इत्तेफ़ाक देखिए जिस बोर्ड ने उन्हें टीम में नहीं दी जगह आज उसी बोर्ड के वह प्रेसिडेंट बनें बैठे है; दादा के जन्मदिन पर...

प्रिंस ऑफ कोलकाता से लेकर क्रिकेट के सबसे बड़े पद पर काबिज़ होना; हर मामले में दादा बेजोड़ है। जिनका कोई जोड़ नहीं।

It is need of an hour to adopt post pandemic work culture seriously

Physical and social distancing does not means distancing with your personal virtues of politeness and care.

Corruption in UP Police reaches to new high: Taking lives of their own colleagues for a gangster

The real and rare face of up cops was seen during the wretched night of 2nd and 3rd July, where up police lost its 8 brave policemen in a conspired shootout at Bikru village in Kanpur district.

Arts in pre and post social media era

Looking at students within boxes of science, commerce and arts is highly myopic and to think that Arts students don’t have a bright (read heavy-pocketed) future, at worse, is archaic. Social media has done its part. It’s time to continue the conversations in the real world.

Depression: A curse for society

It is normal to be sad and upset with various events of life however if the feeling of hopelessness is on regular basis, then it is worrisome.

Recently Popular

Maharashtra students unhappy with government’s silence on SSC and HSC syllabus cuts

. With the on-going struggle of the government officials to curb the spread of SARS-COV-2 in containment areas, speculations have arisen that schools and colleges in the state may not open till August or September looking at the pace of the COVID cases rising.

Who killed Sushant?

Initially his suicide was linked with bullying and nepotism. Rhea has been already interrogated in this case. The Mumbai police has already registered a case under professional rivalry and is investigating.

Mocking the mock test

We live in a MOCK world and even the air that we breath is mock air!

Love-hate relationship between the military and social media

Defense news are LEAKED rather than SHARED on Social media. And we've to be cautious!

Striking similarities between the death of Parveen Babi and Sushant Singh Rajput: A mere co-incidence or well planned murders?

Together Rhea and Bhatt’s media statements subtly and cleverly project Sushant as some kind of a nut job like Parveen Babi, another Bhatt conjuring.