Monday, August 15, 2022
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अनाथ, अबला, बेसहारा मोहम्मद जुबेर को आखिर मिला हर आंतकवादी के पक्ष में लड़ने वाली वकील वृंदा ग्रोवर का, मिली जमानत

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Sampat Saraswat
Sampat Saraswathttp://www.sampatofficial.co.in
Author #JindagiBookLaunch | Panelist @PrasarBharati | Speaker | Columnist @Kreatelymedia @dainikbhaskar | Mythologist | Illustrator | Mountaineer

इसे विडंबना कहे या देश का दुर्भाग्य कि पिछले दो महीने से देश में धार्मिक अस्थिरता पैदा करने में मुख्य भूमिका अदा करने वाले तथा एल्ट न्यूज के को–फाउंडर मोहम्मद जुबेर को आज सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत के साथ साथ इसी मामले में दुबारा मुकदमा दर्ज ना करने का निर्देश भी, तथा साथ में फिर से ऐसी हरकत जुबेर ना करे उसके लिए कोई पाबंदी या निर्देश भी नही। मोहम्मद जुबेर जो खुद को पत्रकार मानने से इनकार कर रहा था आज मिलोर्ड ने जबरदस्ती का ठुसकर पत्रकार बनाकर जिम्मेदारी के साथ कहा कि आखिर पत्रकार को भला थोड़े ही ट्वीट करने या गंदगी करने से रोक सकते है? ट्वीट भी कौनसे, जिन्हे तोड़ मरोड़कर पेश करके धार्मिक भावनाओं को आहत करवाने के अलावा कोई काम नही किया। वहीं यूपी पुलिस के सामने खुद अनाथ, अबला और बेसहारा मोहम्मद जुबेर ने खुद स्वीकार किया कि उसे इस तरह के ट्वीट करने के करोड़ों रुपए मिलते थे और आज भी मिल रहे है। मोहम्मद जुबेर चीख चीख कर खुद को पत्रकार नहीं होने का दावा कर रहा था पर मिलोर्ड ने ठान ली तो ठान ली। बिना जांच के पत्रकार बनाकर भेजा।

अब आतें है कि मैं बार बार मोहम्मद जुबेर को अनाथ, अबला, बेसहारा क्यों कह रहा हूं तो सुने कि पिछले दो महीने में इसके घर या घरवालों का कोई अता पता नहीं, कोई सामने नहीं आया, किसी ने मीडिया, सरकार या किसी से मोहम्मद जुबेर के बेकसूर होने की गुजारिश नही की। 2011 से पहले के कोई प्रमाण फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबेर के कहीं नहीं मिले और तो और एमसीआई ने एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डायरेक्टर की पोस्ट भी दे दी, आखिर इन सबका आधार क्या रहा होगा? दो महीने से विधवा विलाप करने वाले अब शांत थे। आज मिलोर्ड ने फिर हवा दे दी, और आज फिर एक बार देश में मोहम्मद जुबेर ट्विटर पर ट्रेंड कर गया। अब जहां नुपुर शर्मा के मामले को तुल पकड़ाने से लेकर कन्हैयालाल टेलर और उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई उस पूरे मसले को आज सुप्रीम कोर्ट में मिलोर्ड के द्वारा रखी गई टिप्पणी के बाद कमजोर कर दिया गया।

अब इस अबला, अनाथ और बेसहारा मोहम्मद जुबेर के पक्ष में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए आगे आई वृंदा ग्रोवर, जिसका परिचय आपके सामने आना जरूरी है इसी से आप अंदाजा भी लगा सकते है कि आखिर मोहम्मद जुबेर चीज क्या है? और इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन लोग है? आखिर इनके मंसूबे क्या थे? पुलिस ने कहा- चतुर और शातिर हैं जुबैर

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा कि आप खुद देखें कि वह व्यक्ति (जुबैर) कितना चतुर और शातिर है। वृंदा ग्रोवर ने जुबैर की ओर से कहा कि क्या अपना मोबाइल फोन या सिम कार्ड बदलना अपराध है? क्या मेरे फोन को रिफॉर्मेट करना अपराध है? या फिर चालाक होना गुनाह है?

वृंदा ग्रोवर ने कहा, इनमें से कोई भी दंड संहिता के तहत अपराध नहीं है. यदि आप किसी को पसंद नहीं करते हैं, तो कोई बात नहीं, लेकिन आप चालाक आदमी पर इस तरह आरोप नहीं लगा सकते हैं. ये जांच के नाम पर जबरिया फंसाने वाली चाल है.

कौन है वृंदा ग्रोवर?

आंतकवादी अफजल गुरु….

जिसने देश में दहशत फैलाने का कार्य किया, देश को कमजोर करने का कार्य किया, उसकी फांसी की माफी की अपील करने वाली देश की एकमात्र वकील है वृंदा ग्रोवर

निर्भया कांड

दिल्ली के अंदर हुए वाकिये ने पूरे देश की जड़े हिलाकर रख दी थी उस निर्भया बलात्कार व हत्याकांड के आरोपियों की एकमात्र बचाव करने वाली वकील है वृंदा ग्रोवर

इशरत जहां एनकाउंटर

डेविड हेडली से संबंध तथा इशरत जहां एनकाउंटर में इशरत जहां के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाली एकमात्र वकील थी वृंदा ग्रोवर

याकूब मेमन

जिस आंतकवादी ने 300 से ज्यादा हिंदुस्तानियों तथा बच्चों को मौत के घाट उतारा उस याकूब मेमन के लिए मृत्यु माफी की अपील करने वाली एकमात्र वकील है वृंदा ग्रोवर

कसाब

मुंबई में समुंद्रमार्ग से आकर दहशत फैलाने वाले आतकवादियो में एक जिंदा पकड़े गए अजमल कसाब के ना केवल बचाव बल्कि उसकी मृत्यु माफी के खिलाफ अपील करने वाली एकमात्र वकील थी वृंदा ग्रोवर

अब मुद्दा ये है कि आखिर इन सबके पीछे कौन है ? इन सबका बचाव करने वाली वकील ही अगर मोहम्मद जुबेर की वकील है तो मामला कुछ और है जिसे रूप कुछ और दिया जा रहा है ना कोई जांच, ना कोई नागरिकता की बात, ना ही कोई प्रामाणिकता की बात, बस सीधे सीधे जमानत वो भी इस तरह के मामले की जैसे मामूली सा मामला हो…।

क्या ये परीक्षण था? या एक बार और पूरे जोश के साथ दुबारा इस तरह की गतिविधि किसी और के रूप में वापिस होने का आभास, कहीं तो जांच का विषय है। वहीं आज लोग वृंदा ग्रोवर को बधाई दे रहे है जबकि सच कुछ अलग है कहीं इसके आका भी तो कहीं लाहौर, कराची या ढाका में तो नहीं?

खैर, जनता को सच जानना चाहिए, जानने की जरूरत है।

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