Thursday, July 2, 2020
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बॉलीवुड का काला सच

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हाल के ही दिनों में आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर धीरज शर्मा ने 1960 से लेकर 2010 तक बॉलीवुड के बारे में शोध किया किया था और उन्होंने पाया की उसमे में जितने भी मूवी बनी है उसमे सभी में एक समानता दिखाई पड़ती है खास कर “सलीम-जावेद” के लिखे मूवी, इन सभी मूवी जिसमे शोध किया गया उसमे पाया गया की न फिल्मों में 58% भ्रष्ट राजनेता हिंदू ‘ब्राह्मण’, 62% भ्रष्ट व्यापारी हिंदू ‘वैश्य’ जाति से दर्शाए गए थे, जबकि लगभग 74% फिल्मों ने सिख पात्रों को हंसी के रूप में प्रस्तुत किया। हालाँकि, 84% मुस्लिम चरित्रों को दृढ़ता से धार्मिक और ईमानदार दिखाया गया था (तब भी जब फिल्म में उनका चरित्र एक अपराधी का था)। पाकिस्तानी लोगों का स्वागत करने, विनम्र, खुले विचारों वाले और साहसी के रूप में प्रस्तुत किया। जबकि भारतीयों को बड़े पैमाने पर संकीर्णता, बेपरवाह और रूढ़िवादी के रूप में पेश किया गया।

इस तरह की चीज़े आज से नहीं बॉलीवुड में शुरुवात के दिनों से एक एजेंडा के तहत डाला जाता है, इन फिल्मो में बताया जाता है की, हिन्दू जातिवादी से घिरा हुआ है, मंदिरों के पंडित बलात्कारी और धन संचय करने वाले होतें है जबकि इसाई और मुस्लिमो को आदर्श बताया जाता, इसाई के बारे में बताया है इनके स्कूल अच्छे होतें है, इसाई नर्स अच्छी होती है, चर्च में हीरो जा के शादी करता है और वहाँ जा के ईसा मसीह की पूजा करता है भले वह हिन्दू हो, कुल मिला के फिल्मो के माध्यम से चर्च का प्रचार किया जाता है, ताकि दर्शको की दिमाग में भरा जा सके की इसाई चर्च, हॉस्पिटल और स्कूल अच्छे होते हैं। वहीँ दूसरी तरफ यह बताया जाता है की मुस्लिम मौलवी अच्छे होतें हैं, मुस्लिम अच्छे होते हैं, लोग मस्जिद में शांति प्राप्त करने जाते हैं।

कुल मिला के बात यही रहता है की हिन्दू धर्म खतरनाक चीज़ है, इसमें शोषण, आतंकवादी, पिछड़ी हुई है, ये काम लगातार पिछले 50 सालों से लगातार किया जा रहा है ताकि हिन्दुओं के मन में हिन्दू धर्म के खिलाफ धीमा जहर डाला जा सके और हिन्दुओं के मन में हिन भावना भरा जा सके।

हाल के दिनों में ही बॉलीवुड में बदलाव देखने को मिला है की, देश भक्ति और हिंदुत्व वाली फिल्म बना रही है जिससे की महेश भट्ट, यश राज, तीनो खान, करन जौहर, अनुराग कश्यप और ऐसे अन्य लोगों को लगने लगा है की वो जो प्रोपेगेंडा फैलाते थे वो अब हो नहीं पा रहा तो ये लोग अब ऑनलाइन वेब सीरीज के माध्यम से प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है जैसे, “सेक्रेड गेम, पाताललोक इसमें दिखया जाता है की मंदिरों में पंडित मांस खाता है, हिन्दू धर्मगुरु ही आतंकवादी और बलात्कारी है और इन्ही के कारण शांतिप्रिय मुस्लिम आतंकवादी बनता है।

जब भी इन दाउद इब्राहीम के खान गैंग को लगता है की उनका प्रोपेगेंडा फ़ैलाने में दिक्कत कोई करेगा और इन खान गैंग से कोई बाहर का लोग आ के एकाधिकार छीन लेंगे जिससे उन्हें हिन्दुओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा फ़ैलाने में दिक्कत होगा तो ऐसे कलाकारों पर इतना दवाब डाला जाता है की वो बॉलीवुड छोड देते है या खुदखुशी कर लेते हैं, ये खान सिर्फ इतना चाहते हैं की बॉलीवुड में सिर्फ उनके लोगों का अधिकार हो इसलिए वे अपने रिश्तेदार को आगे बढ़ाते है भले उसे कुछ ना आता हो। जो अच्छे कलाकार होते हैं उन्हें हासिये में डाल दिया जाता है या उन्हें बड़ी फिल्मे नहीं दि जाती, जैसे के के मेनन. मनोज वाजपयी, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, सौरव शुक्ला, अन्नू कपूर, कंगना रानौत- इनको फिल्मे नहीं दि जाती या दि भी जाती तो इन्हें मजाकिया जोकर का रोल दे दिया जाता है। अक्षय कुमार के “केसरी” को कोई भी सम्मान नहीं मिलता लेकिन जिस फिल्म में अलिया भट्ट काम करती उसे अवार्ड पे अवार्ड मिलने लगता है इसी तरह से ऐसे बहुत सी मूवी है इसके अच्छे होने के बाद भी उसे अवार्ड नहीं मिलता या ऐसे मूवी को खान गैंग मिल कर कम स्क्रीन दिलवाते हैं जिससे वो कमाई ना करे और फ्लॉप हो जाये।

ये आज से नहीं हो रहा है गुलशन कुमार के समय में अधिकांश फिल्मो में भजन कीर्तन होता था लेकिन दाउद इब्राहीम के द्वारा उनके हत्या होने के बाद में बॉलीवुड में क़वाली और सूफी गाने आने लगी, ऐसे अनेक उदहारण देखने को मिल जायेंगे जिसमे पता चलेगा जब बॉलीवुड में खान गैंग को खतरा महसूस हुआ है तब ये मिल ये हत्या, खुदखुशी, काम से निकलवा के उनको धमकी दे देते हैं की उनके रास्ते में कोई ना आये। अक्षय कुमार अजय देवगन, कंगना रानौत जैसे कलाकारों को कम स्क्रीन मिलती है ताकि उनकी कम कमाई हो लेकिन उनकी कमाई अच्छी हो जाती है जिससे ये खान, भट्ट, कपूर, यश, जोहर गैंग को डर लगने लगा है और सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या करवा के ये गैंग ऐसे कलाकार को डरा के रखेंगे। सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी ऐसा ही हुआ छिछोरे आने के बाद उसने 7 मूवी साइन किया था लेकिन उसमे से कुछ मूवी में सलमान खान अपने आदमी को दिलवाना चाहते थे ऐसे सुशांत सिंह राजपूत से विवाद हुआ और उनसे सारी 7 मूवी छीन लि गई उन्हें पार्टी में बुलाया जाता और उन्हें अपमानित किया जाता ये अलिया भट्ट जैसे लोग उन्हें टीवी सीरियल का एक्टर कह कर चिढाते और ये जो करन जौहर, महेश भट्ट, सलमान खान जैसे लोग जो आज सुशांत सिंह राजपूत के मरने के बाद सांत्वना दे रहे हैं ये वही सब हैं जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत से फिल्मे छीने और पार्टी में उनका मजाक बनाया।

 

ये वही गैंग है जो वामपंथियो को, तबलीगी जमात को, मुस्लिम अतंकवादियो को और चर्च को धर्मपरिवर्तन, हिन्दुओं को बदनाम करने और हिन्दुओं के खिलाफ करने के लिए फण्ड मुहैया कराते हैं।

एक बिहारी शरीर से, शिक्षा से, धन से कमजोर हो सकता है लेकिन कभी भी मानसिक रूप से कमजोर नहीं होता उसमे सहन शक्ति बहुत ज्यादा होता है आप खुद सोच लीजिये ये खान गैंग वालों ने सुशांत सिंह राजपूत की किस हद तक तोडा होगा की उसे आत्महत्या करना पड़ा। समय आ गया है बॉलीवुड को बदला जाये, अब “चलता है, छोड़ो क्या करना है” से काम नहीं चलेगा इस पे सभी को सोचना पड़ेगा इन खान, भट्ट, कपूर, जोहर गैंग के एकाधिकार ख़त्म करना पड़ेगा।

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