Thursday, September 24, 2020
Home Hindi जाति है कि जाती नही

जाति है कि जाती नही

Also Read

AKASH
दर्शनशास्त्र स्नातक, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी परास्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय PhD, लखनऊ विश्वविद्यालय
 

हाल ही में फिल्म आर्टिकल 15 पर स्वरा भास्कर का एक लेख हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुआ, जिसमें वह कहती हैं,

जाति से अनभिज्ञ होना आधुनिक भारत में अपने आप में एक ऐसी सहूलियत है, जिसका लाभ सवर्ण ही ले सकते हैं।

फिल्म आर्टिकल 15 की बात करते-करते महोदया जाति व्यवस्था की उस सच्चाई को खोलने का प्रयास करने लग जाती हैं, जो उन्होंने कभी जी ही नहीं है। उन्होंने दिल्ली में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की और आज मुंबई में काम कर रही हैं। जो व्यक्ति दिल्ली-मुंबई से कभी बाहर गया ही नहीं, उसे क्या पता होगा कि गाँव के खेतों में धान कैसे लगते हैं या गाँव के किसी पुराने खंडहर में छुपते-छुपाते लोग ताश कैसे खेलते हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अपनी ज्ञान की पोटली दूसरे लोगों के सामने यह कहकर खोलनी चाहिए कि समाज ऐसा ही है।

जाति व्यवस्था से बाहर ही नहीं निकलना चाहते 

बदायूं बलात्कार और हत्याकांड ऐसा केस था, जिसने निर्भया कांड के बाद एक बार फिर सबको दहला दिया था। उसके साथ सहानभूति रखने वाले सिर्फ एक जाति, पंथ से नहीं थे बल्कि वे लोग भी थे, जिन्हें उच्च बौद्धिक समाज, मार्क्स के कथनों में शोषणकर्ता कहता है अर्थात ब्राह्मण।

इस फिल्म के बहाने लोगों को अपनी भड़ास निकालने का मौका मिला गया। मेरे जैसे ब्राह्मण इसलिए भड़ास निकाल रहे हैं, क्योंकि मेरा मानना है कि हमारी गलत छवि पेश की जा रही है और शोषित वर्ग इसलिए नाराज़ है, क्योंकि इस फिल्म में एक नायक के तौर पर किसी ब्राह्मण को दिखाया गया है।

उनकी दलील है कि एक बार फिर उन्हें ब्राह्मण के रहमो-करम पर इंसाफ के लिए अपनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। दरअसल, समाज की समस्या ही यहीं से शुरू होती है कि हम अपनी जाति व्यवस्था में इतना रम चुके हैं कि उससे बाहर ही निकलना नहीं चाहते।

मेरी अपनी कोई बहन नहीं है लेकिन दिल्ली में एक बहन बनी जिसने मुझे राखी बांधी, वह बहन मुस्लिम थी। बीएचयू जिसे ऐसा मान लिया जाता है कि वह सिर्फ हिन्दुओं के पढ़ने की जगह है, वहां कोलकाता से आया हुआ एक मुस्लिम दोस्त मेरे साथ एक थाली में खाना खाता था। चाहे चर्च हो या गुरूद्वारा मुझे किसी भी धर्म को सम्मान देने में कभी हिचकिचाहट नहीं हुई। 

 

शोषण के बदले शोषण कहां तक उचित?

ऐसा नहीं है कि जाति व्यवस्था का दंश सिर्फ कुछ तबकों को झेलना पड़ता है।

मुझे याद है बीएचयू में एक टीचर ने क्लास के सभी ब्राह्मण लड़कों को इंटरनल में कम नंबर दिए थे। एक और प्रोफेसर थे, जिन्होंने मुझे फेसबुक पर ब्लॉक कर दिया, क्योंकि मैं उनके ब्राह्मण विरोधी शब्दों का विरोध कर देता था।

आज समाज के पढ़े-लिखे प्रोफेसर इस दंश को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि उनके पुरखे शायद उच्च वर्ग द्वारा शोषित हुए थे। उस शोषण का बदला आज उच्च वर्ग के लोगोंं से लेना कहां तक उचित है? इस तरह तो समाज में कभी समरसता आ ही नहीं सकती है, क्योंकि जिस तरह उनके मन में एक शोषित होने का दर्द है, वह अब उच्च वर्ग वाले के भी मन में है। हमें अपने पूर्वजों और कवियों को सिर्फ इसलिए नहीं पढ़ना चाहिए कि उन्होंने इस पर लिखा है, उनको ग्रहण भी करना चाहिए। किसी ने कहा भी है,

बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेई

 

घृणा का भाव कभी समरस नहीं होने देगा

मैं यह नहीं कह रहा कि उच्च वर्ग ने कोई अत्याचार नहीं किया लेकिन जब तक हम उन पुरानी चीज़ों को ढ़ोएंगे, तब तक हमारे मन में घृणा का भाव रहेगा और ये घृणा का भाव हमें कभी समरस नहीं होने देगा।

वैसे बदायूं के केस में आरोपित और विक्टिम दोनों एक जाति के थे ना कि ब्राहमण। यह सिर्फ इसलिए बता रहा हूं कि कई लोग आर्टिकल 15 के ट्रेलर को देखने के बाद बदायूं केस के आरोपियों को ब्राह्मण समझ कर गलियां दे रहे हैं। मेरी नज़र में जाति की राजनीति करने वाले सभी नेता ब्राह्मणवाद विचारधारा से ग्रसित हैं, क्योंकि वह समाज में एकीकृत भाव का निर्माण होने ही नहीं देना चाहते। बाकि समझ अपनी-अपनी। गालियां बेशक देना लेकिन तर्क के साथ।

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

AKASH
दर्शनशास्त्र स्नातक, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी परास्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय PhD, लखनऊ विश्वविद्यालय

Latest News

वन्स अपॉन ऐ टाइम इन मुंबई …नाउ इन उत्तर प्रदेश!

आज सुशांत हमारे बीच नहीं है पर जब जब उत्तर प्रदेश फिल्म सिटी की बात की जाएगी सुशांत सिंह राजपूत का नाम स्वतः ही सबको याद आएगा। मेरी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से सविनय निवेदन है की प्रस्तावित फिल्म सिटी में सुशांत के नाम पर कुछ न कुछ जरूर बनाया जाए।

India is watching

Every institution in the country, however powerful, derives its justification from the people. The reawakening in the civilisation is visible. The cause of the yearning is not because Modi is in power. Modi is in power because of the awakening. The expression has just begun.

Silence is the digital coffee break!

Our new reality is virtual life and specially the professional life. We have to bring to physical real life as much as possible.

Farmer bills 2020: Protest or celebrate?

It’s time to celebrate and not protest, as the exploitation masters have been tossed up by these reforms and at the same time empowered and enhanced value of our lovely farmers socially and economically.

Suppressing Maratha history in school textbooks

Secularism has never inspired anyone to do anything, except indulging in laziness. A nation without history is like a man without soul. We urgently need to recast our history books by focusing on a few critical points.

Open letter to Mr. Julio Ribeiro

From the time BJP, despite all out efforts by vested interests from both within and outside the country to deny its well deserved entitlement, won the mandate of the people in 2014 there have been unwarranted apprehensions and antagonism in people like you.

Recently Popular

Nationalism and selective secularism

the word "Nationalism" is equated with the word "fascism" or the sense of Nationalism is portrayed as against the idea of India. It is not incorrect to deny that the secular lobby is phenomenal at drawing false equivalences.

पोषण अभियान: सही पोषण – देश रोशन

भारत सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवनचक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध ढंग से पोषण अभियान चलाया जा रहा है, भारत...

5 Cases where True Indology exposed Audrey Truschke

Her claims have been busted, but she continues to peddle her agenda

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.

Mughals are NOT Indians

In this article we analyse whether Mughals were Indians or invaders who stayed because of the vast wealth and resources and also the power it gave them in the Islamic world.
Advertisements