Friday, April 12, 2024
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दीपावली और नागरिकता संशोधन अधिनियम

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Natively from Siddharthnagar, Uttar Pradesh. Currently living in Delhi.

आज भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या का कार्यक्रम कवर करने जा रहे एक मित्र के साथ दिल्ली के आदर्श नगर स्थित पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों कि बस्ती में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 

सायं 5 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें वहाँ रहने वाले परिवारों को दिया, तेल और बत्ती उपहार के रूप में दिया गया, ताकि वह दीपावली पूरे हर्षोल्लास से माना सकें। बस्ती में ही हिंदू शरणार्थी बच्चों के लिए पाठशाला लगी हुई थी, जिसमें 50-60 बालक-बालिकाएँ में से कुछ ने अतिथि को हनुमान चालीसा, गायत्री मंत्र का पाठ करके सुनाया। इन बालक-बालिकाओं को देख के ऐसा तो लगता है कि अपने संस्कृति में, अपने जीवन पद्धति में, बहुत अच्छे तरीक़े से इनका अभ्यास कराया जा रहा है। इस कार्य के लिए विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन ज़रूर साधुवाद के पात्र है। पाठशाला से निकलने के बाद दीपोत्सव का कार्यक्रम था, बस्ती के सभी साथी हिंदुओं ने साथ मिलकर माँ लक्ष्मी का आरती किया, यहाँ भी आरती का गायन एक बालिका ने ही किया। दीपोत्सव कार्यक्रम के बाद जब अतिथि द्वारा उनकी समस्याओं के बारे में पूछा गया तो एक स्वर में शरणार्थियों ने पानी और बिजली की समस्या का ज़िक्र किया। 

आदर्श नगर स्थित हिंदू शरणार्थियों कि इस बस्ती में बिजली नहीं पहुँची है, पानी का कनेक्शन नहीं पहुँचा है, बस्ती में इंटर्लॉकिंग सड़क तक नहीं है, बारिश के मौसम में ज़रूर यहाँ पे चलना भी दूभर हो जाता होगा। क्या यह दिल्ली राज्य सरकार की नाकामी नहीं है, जो इन शरणार्थियों को मूलभूत सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है ? क्या इन शरणार्थियों का यह मूलभूत अधिकार नहीं है कि वह सम्मान के साथ अपने परिवार का जीवनयापन करा सके ? क्या इन हिंदू शरणार्थियों कि गलती बस इतनी है कि, यह लोग रोहिंग्या मुसलमान या बांग्लादेशी घुसपैठी नहीं है, तथा भारत की इस भूमि को अपना पुण्यभूमि मानते हैं ? क्या इन्हें धर्मनिरपेक्ष भारतीय गणराज्य के अंदर हिंदू होने की सजा दी जा रही है ? कोई भी सरकार शीर्ष से नहीं चल सकती है, क्यूँकि राज्य व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे इसके लिए Driving Force जनता ही है। कल्याणकारी  राज्य व्यवस्था के अंतर्गत सर्व सामान्य का कल्याण एवं गरीब की ज़िंदगी को आसन बनाना ही किसी भी सरकारी तंत्र का लक्ष्य होना चाहिए। आज इन शरणार्थी कैम्प में रहने वाला हर व्यक्ति सरकार के ऊपर पूर्ण रूप से निर्भर है क्यूँकि सरकार ने इनकी मूलभूत सुविधाओं का ध्यान ही नहीं रखा। बिना इनकी मूलभूत ज़रूरतों को पूरा किए, सही मायनों में इनके स्वतंत्र जीवन की आकांक्षा पूरी नहीं की जा सकती। सरकार का दख़ल समाज जीवन में कम से कम होना अपेक्षित है, पर यह तभी मुमकिन है जब सरकार इन शरणार्थियों की मूलभूत ज़रूरतों को जल्द से जल्द पूरा कर दे। स्वच्छ वातावरण, बिजली, पानी, पढ़ाई, दवाई, मानव विकास के वह नींव हैं, जिन्हें मज़बूत किए बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता। आदर्श नगर के शरणार्थियों के साथ तभी न्याय होगा, जब उनकी यह ज़रूरतें, राज्य पूरी कर देगा।

क्यूँ CAA ? 

पिछले वर्ष ‘Winter Session’ के दौरान भारत के दोनों सदनों में नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पारित किया जो आगे चलकर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बना। इस क़ानून ने भारत के तीन पड़ोसी देश (जहाँ इस्लाम के मानने वाले बहुसंख्यक है) पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़्गानिस्तान से आए हुए प्रताड़ित अल्पसंख्यक (जिनमें बहुतायत हिंदू हैं) जैसे कि हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी को छः साल के cut off date पे भारत की नागरिकता देने की बात कही गयी थी। इन तीन इस्लामिक देशों में रहने वाले हिंदुओं के साथ किस प्रकार के व्यवहार होते है, यह किसी से छिपा नहीं है, आए दिन हिंदुओं की नाबालिग बच्चियों का अपहरण करके उनका धर्म परिवर्तित किया जाता है और अंत में उनका किसी अधेड़ उम्र के व्यक्ति के साथ निकाह करा दिया जाता है। पाकिस्तान में हाल के दिनों में बुद्ध की मूर्तियाँ तोड़ी गयी है। अफ़ग़ानिस्तान में बामियान स्थित बुद्ध की मूर्तियों के साथ क्या हुआ, इसका साक्षी सम्पूर्ण विश्व है। अफ़ग़ानिस्तान में आए दिनों मंदिरों और गुरुद्वारों पे हमले हो रहे है। बांग्लादेश में इस्लामिक भीड़ द्वारा मंदिरों को तोड़ा जाना एक आम बात हो चुकी है, पिछले दिनों बांग्लादेश में एक हिंदू लड़की को फ़्रान्स की घटना पे टिप्पणी करने के कारण अगवा कर लिया गया। इन तीन इस्लामिक देशों  में धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू यदि भारत में नहीं आएगा तो और कहाँ जाएगा ? इन तीन इस्लामिक देशों की ही बात क्यूँ करें, पूरे विश्व में कही भी धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू यदि भारत की पुण्यभूमि पर नहीं आएगा तो आख़िर कहाँ जाएगा ? विश्वभर में रहने वाले हर हिंदू की धरती भारत ही है, इसपे उसका उतना ही अधिकार है जितना मेरा और आपका। यदि अपना धर्म, संस्कृति, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा हेतु कोई भी हिंदू भारत माता की तरफ़ देखता है तो, हमारा यह दायित्व बनता है कि माँ के आँचल का साया उन्हें भी मिले। दुनिया भर में रहने वाले हर हिंदू की मातृभूमि, पितृभूमि और सबसे महत्वपूर्ण भूमि यही भारत की धरती है, इसीलिए उनका अधिकार कि वे यहाँ आकर, भारत के सम्मानित नागरिक बन सकें। आदर्श नगर में रहने वाले हिंदू शरणार्थियों ने भी यही किया। यह हमारी हार है कि हमसे सामवैधानिक रूप से अपनाने में इतना विलम्ब हुआ।  

आधुनिक राष्ट्र राज्य व्यवस्था में यह महत्वपूर्ण है कि हम उन्हें सामवैधानिक रूप से भी वैध नागरिक बनाए, जो कि नागरिक संशोधन अधिनियम के बाद पूर्ण हो चुका है। अधिनियम आने के बाद यह पहली दीपावली है और यह दीपावली उन सभी प्रताड़ित हिंदुओं के जीवन में नयी रोशनी लेकर आएगी। भारत का आत्मनिर्भर बनना सिर्फ़ राज्य का आत्मनिर्भर बनना नहीं है, अपितु इस संस्कृति का आत्मनिर्भर बनना है या कह सकते हैं कि Civilisational State का आत्मनिर्भर बनना है। यह तभी मुमकिन है जब विश्व में रहने वाला हर हिंदू सम्मान के साथ जीवनयापन कर सके क्यूँकि हर हिंदू में एक भारत बस्ता है। बिना इस Civilisational State का पुनरुत्थान किए, Nation State  का पुनरुत्थान अधूरा ही रह जाएगा। नागरिकता संशोधन अधिनियम, Civilisational state के पुनरुत्थान के लिए उठाया गया पहला कदम है । 

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