Monday, March 1, 2021

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संघ विचार-परिवार के वैचारिक अधिष्ठान की नींव- श्री गुरूजी

संघ विचार-परिवार जिस सुदृढ़ वैचारिक अधिष्ठान पर खड़ा है उसके मूल में माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी के विचार ही बीज रूप में विद्यमान हैं। संघ का स्थूल-शरीरिक ढाँचा यदि डॉक्टर हेडगेवार की देन है तो उसकी आत्मा उसके द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी के द्वारा रची-गढ़ी गई है।

Just another attempt of stereotyping Hindus and Hindutva?

Indian born foreign residentials get a special honor by our left and neutral audience when they critic India and Hindus!

संघ नींव में विसर्जित पुष्प

संघ के निर्माता डा. केशवराव हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उन्हें नगर में घूमते हुए अंग्रेज सैनिक, सीताबर्डी के किले पर फहराता अंग्रेजों का झण्डा यूनियन जैक तथा विद्यालय में गाया जाने वाला गीत ‘गाॅड सेव दि किंग’ बहुत बुरा लगता था।

6 दिसंबर 1992 के बिना भव्य राम मंदिर निर्माण की कल्पना क्या संभव थी

6 दिसंबर 1992 की वो शुभ तारीख... जिसने बदल कर रख दिया इतिहास, हर धुरी बदल गयी यानी उस दिन हर तरफ जय श्री...

06/12/92 : हिंदुत्व की प्रबल पराकाष्ठा

उस दिन इस देश ने देखा कि अब कांग्रेस जैसे मुस्लिम सेक्युलर दल के सामने एक हिंदूवादी दल भाजपा का उदय हो चुका है। उस दिन देश ने वास्तव में महसूस की संघ और विहिप की मजबूत उपस्थिति और शक्ति।

Tribals- The new target of breaking India forces

It is a major handiwork of the Christian missionaries and other breaking India forces with active support from various political parties and state governments, silently a mass movement is taking place to separate the tribals from Hindudom.

दीपावली और नागरिकता संशोधन अधिनियम

आधुनिक राष्ट्र राज्य व्यवस्था में यह महत्वपूर्ण है कि हम उन्हें सामवैधानिक रूप से भी वैध नागरिक बनाए, जो कि नागरिक संशोधन अधिनियम के बाद पूर्ण हो चुका है। अधिनियम आने के बाद यह पहली दीपावली है और यह दीपावली उन सभी प्रताड़ित हिंदुओं के जीवन में नयी रोशनी लेकर आएगी।

परम पूज्यनीय से भेंट

सामान्य व्यक्ति के लिए शायद यह लेख 'तिल का ताड़' हो, किंतु एक स्वयंसेवक के लिए अभूतपूर्व अनुभव हो सकता है।

“हिंदुत्व” भारतवर्ष की उदारता एवं मानवता के श्रेष्ठ गुणों का निचोड़ है

हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है। जहां हिंदुत्व घटा, देश वहां बटां। पूर्वोत्तर के राज्य तथा जम्मू-कश्मीर इसका ज्वलंत प्रमाण है।

आज न सिर्फ उत्सव मानना है अपितु कार सेवकों के बलिदान को याद कर प्रपंचों से भी लड़ना है

आज न सिर्फ राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, बल्कि नए भारत निर्माण के संकल्प का वास्तविक आगाज भी हो रहा है। आज से हर राम भक्त दायित्व है कि अपने धर्म के विरुद्ध रचे जाने वाले प्रपंच और मिथ्या दुष्प्रचार का खंडन करे तथा अपने धर्म और कार सेवकों के बलिदान की शुचिता बनाए रखे।

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