Saturday, August 8, 2020

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आज न सिर्फ उत्सव मानना है अपितु कार सेवकों के बलिदान को याद कर प्रपंचों से भी लड़ना है

आज न सिर्फ राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, बल्कि नए भारत निर्माण के संकल्प का वास्तविक आगाज भी हो रहा है। आज से हर राम भक्त दायित्व है कि अपने धर्म के विरुद्ध रचे जाने वाले प्रपंच और मिथ्या दुष्प्रचार का खंडन करे तथा अपने धर्म और कार सेवकों के बलिदान की शुचिता बनाए रखे।

राम मंदिर निर्माण से राम राज्य की ओर

सच्चे लोकनायक के रूप में प्रभु श्री राम ने जन जन की आवाज को सुना और राजतंत्र में भी जन गण के मन की आवाज को सर्वोच्चता प्रदान की। राजनीति में शत्रु के विनाश के लिए कमजोर, गरीब और सर्वहारा वर्ग को साथ जोड़ कर सोशल इंजीनियरिंग के बल पर उस युग के सबसे बड़ी ताकत को छिन्न- भिन्न कर दिया। ज्ञात इतिहास में अनेकों पराक्रमी, परम प्रतापी, चतुर्दिक विजयी और न्यायप्रिय राजा हुए लेकिन सही शासन का पर्याय रामराज्य को ही माना गया।

श्री गुरुजी- “संकीर्ण मानसिकता” अथवा संगठित, सशक्त एवं समरस हिन्दू समाज के प्रवर्तक

माधव सदाशिव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी के चित्र लगा एक पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उनके हवाले से संघ दलित पिछड़ो को बराबरी के अधिकार का विरोध है ऐसा बताया जा रहा है। जबकि सचाई यह है की श्रीगुरुजी, विश्व हिंदू परिषद् के पहले सम्मेलन प्रयागराज 1966 में सभी पंथो के संतो को एक मंच पर लाकर "हिन्दव: सहोदरा सर्वे, ना हिन्दु पतितो भवेत" का प्रस्ताव पारित करवाया था।

साउथ कोरिया में संघ जरूरी क्यों

मैं विग़त 8 महीनो से साउथ कोरिया में रह रहा हूँ। यहाँ भारतीय लोगों की संख्या क़रीब 13 हज़ार हैं। पर एच॰एस॰एस न होने के आभाव में मैंने महसूस किया है, कि भारतीय लोग संगठित नहीं हैं। और संगठित नहीं होने के कारण लोग अपनी संस्कृति से दूर जा रहे हैं।

आखिर क्या है वीर सावरकर का हिंदुत्व जिससे वामपंथी चिढ़ते हैं?

सावरकर का मानना था कि सामाजिक अनुबंध के आधार पर राष्ट्र राज्य मजबूत नहीं हो सकता है तथा राष्ट्रीय एकता स्थापित करने के लिए कोई मजबूत बंधन आवश्यक है। आज जब देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जिहादी-वामपंथी गठजोड़ के नेतृत्त्व में अलगाववादी आवाज़े उठती हैं तो सावरकर का सामाजिक अनुबंध को लेकर दृष्टिकोण स्पष्ट समझा जा सकता है।

मुंबई के कांदिवली से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 10 स्वयंसेवक बैरंबाग के मुस्लिम बस्ती(रेड ज़ोन) में स्क्रीनिंग के लिए रवाना हुए

कई बार संघ के विरोधी भी देख कर दंग रह जाते है कि ये लोग किस मिट्टी के बने है हम इनका तिरस्कार करते हैं और ये देश सेवा में व्यस्त रहते हैं और संघ स्वयंसेवकों की प्रसंशा करने पर विवश हो जाते हैं।

संघ पर सोशल मीडिया के द्वारा मिथ्या एवं फर्जी पोस्ट से कुठाराघात करने का एक नया वामपंथी चाल

संघचालक डॉ मोहन भागवत जी के नाम से एक फर्जी न्यूज वायरल किया गया, न्यूज एक पेपर कटिंग के रूप में बनाई गई। जिसका शीर्षक 'कोरोना ने तोड़ी मेरी धर्म में आस्था' एक फर्जी डिजाइन किया हुआ है

“Sangh” & “Seva”- two synonyms

"Seva is never ending dharma (work) सेवा परमो धर्म। which is done not to get anything in return not get any fame and name, and more importantly after this seva there shall not be an attitude of the work one did is called seva”, this is part of the definition of SEVA that RSS has defined as.

राष्ट्रवाद ही भारत को एक सूत्र में बांध सकता है

हिन्दू संस्कृति के अलावा इस देश को कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से इटानगर तक कोई एक नहीं रख सकता है, कारण हर जाति, जन - जाति और धर्म के मूल में हिन्दू संस्कृति की झलक दिखती है।

How Hindus in India should tackle the threat of mass conversions!

It’s high time Hindus realise if they do not listen to the problems of their fellow-men, if they fail to organise and bring solutions to their fellow-men, if they fail to treat everyone equally, then someone else will.

Latest News

The history of India – a story of distortion by marxists

By interpreting history only on the basis of economic monopoly can not eradicate the wrongdoings which were done based on religion.

Democracy has stung Communism big time in Galwan

China has spoiled relations with entire neighbourhood and well beyond its capacity to manage. The fool cards like BRI, blank cheque diplomacy and the debt-traps can buy few leaders of poor countries for short-term, but turn people of these nations into long-term enemies as well.

Religious secularism

With the hypocritical standards which are followed in this country, a person is looked down upon to celebrate an historical moment in his religion.

मोदी को न राम से बड़ा बताया है और न ही जय श्रीराम का उदघोष साम्प्रदायिक है

हिन्दू धर्म में तुलसीदास और सूरदास जैसे कई कवियों ने भगवान कृष्ण और राम के लिये वात्सल्य भाव का प्रयोग किया है। आज भी वैष्णव सम्प्रदाय में भगवान की वात्सल्य भाव से पूजा की जाती है तथा उन्हें परिवार के एक बालक की तरह ही देखा जाता है।

What the Ram Temple means to a Hindu

The difference between Hindu diversity and Christian or Muslim diversity - while the latter began as one and split with differences of opinion, we began as many and came together under one blanket, while retaining individual identities – the ultimate balancing act

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Curious case of Swastika

Swastika (स्वस्तिक) literally means ‘let there be good’ (su "good" and asti "let it be"), or simply ‘good it is’ implying total surrender to paramatma and acceptance of the fruits of karma.

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Jainism’s Rama

In Jainism re-telling of Ramayana, Rama (also known as Padma), a gentle hero, is not the one who kills Ravana. Instead, his younger brother Lakshmana kills Ravana, the king of Rakshasas, who are otherwise a civilized and vegetarian people.

Striking similarities between the death of Parveen Babi and Sushant Singh Rajput: A mere co-incidence or well planned murders?

Together Rhea and Bhatt’s media statements subtly and cleverly project Sushant as some kind of a nut job like Parveen Babi, another Bhatt conjuring.

National Education Policy 2020 envisions to revive the ancient Indian wisdom, philosophy, human ethics and value system

The NEP 2020 is indeed has the potential to make India – Atmanirbhar if implemented properly. It envisions to make India a knowledge driven society and become Vishwa Guru in the field of education.
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