Saturday, May 8, 2021

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Hypocrisy of Indian civil society and their Western sponsors: A rejoinder

Shashi Tharoor and his lame allegation on PM Modi, once again torn apart!

Dr. Chris Ogden is biased, let’s expose him

This is a rejoinder to the conversation held between John Pollock, Editor-9DASHLINE and author Dr. Chris Ogden, University of St. Andrews, Scotland-UK and published under the title “In Conversation: Chris Ogden on China and India” in the Europe based online magazine 9DASHLINE on 23 March 2021.

निधि समर्पण अभियान में 5.45 लाख स्थानों पर 12.47 करोड़ परिवारों से किया संपर्क – डॉ. मनमोहन वैद्य

कोरोना काल और श्रीराम मंदिर जनसंपर्क अभियान में ध्यान में आया कि संघ को जानने की समाज में उत्सुकता बढ़ी है। इसलिए स्थान-स्थान पर संघ परिचय वर्ग की योजना बनेगी।

India’s farm laws: The victims of vested interests

The 2020 enacted Farm Laws are victims of the clash between Modi-BJP-RSS and Gandhi-Congress-WPC.

Why I went to a Shakha!

Once ashamed of having attended a Shakha once, this is how I gained respect for RSS!

संघ विचार-परिवार के वैचारिक अधिष्ठान की नींव- श्री गुरूजी

संघ विचार-परिवार जिस सुदृढ़ वैचारिक अधिष्ठान पर खड़ा है उसके मूल में माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी के विचार ही बीज रूप में विद्यमान हैं। संघ का स्थूल-शरीरिक ढाँचा यदि डॉक्टर हेडगेवार की देन है तो उसकी आत्मा उसके द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी के द्वारा रची-गढ़ी गई है।

Just another attempt of stereotyping Hindus and Hindutva?

Indian born foreign residentials get a special honor by our left and neutral audience when they critic India and Hindus!

संघ नींव में विसर्जित पुष्प

संघ के निर्माता डा. केशवराव हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उन्हें नगर में घूमते हुए अंग्रेज सैनिक, सीताबर्डी के किले पर फहराता अंग्रेजों का झण्डा यूनियन जैक तथा विद्यालय में गाया जाने वाला गीत ‘गाॅड सेव दि किंग’ बहुत बुरा लगता था।

6 दिसंबर 1992 के बिना भव्य राम मंदिर निर्माण की कल्पना क्या संभव थी

6 दिसंबर 1992 की वो शुभ तारीख... जिसने बदल कर रख दिया इतिहास, हर धुरी बदल गयी यानी उस दिन हर तरफ जय श्री...

06/12/92 : हिंदुत्व की प्रबल पराकाष्ठा

उस दिन इस देश ने देखा कि अब कांग्रेस जैसे मुस्लिम सेक्युलर दल के सामने एक हिंदूवादी दल भाजपा का उदय हो चुका है। उस दिन देश ने वास्तव में महसूस की संघ और विहिप की मजबूत उपस्थिति और शक्ति।

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