Saturday, November 28, 2020
Home Hindi कोरोना काल: स्कूल बनाम अभिवावक

कोरोना काल: स्कूल बनाम अभिवावक

Also Read

ASHISH TRIPATHI
Right Winger, an army brat, interested in issues of society(particularly middle class), like to have realistic view (equidistant from pessimistic as well as optimistic).

मार्च में सरकार ने कोरोनावायरस वैश्विक महामारी का संज्ञान लेते हुए देश भर में लॉकडाउन लागू किया था, जिसके फलस्वरूप लगभग सभी चीजें, संस्थाएं, आर्थक गतिविधियां, स्कूल-कॉलेज आदि बंद हो गए थे। मई के महीने से सरकार ने धीरे-धीरे कुछ कुछ चीजों को रियायत देते हुए खोलना शुरू कर दिया था, मगर स्कूल जुलाई से पहले खुलने के आसार नहीं। इस दौरान स्कूल की फीस को लेकर अभिभावकों समूह द्वारा वाट्सऐप पर तरह तरह के मैसेज भेजकर फीस न देने के लिए माहौल बनाया जा रहा है।

April, स्कूल पूरी तरह बंद: “जब क्लासें ही नहीं चल रहीं हैं तो स्कूल फीस किस बात की मांग रहे हैं? हम पैसे नहीं देंगे!”

May, ऑनलाइन क्लास चलीं: “हमारे बच्चे जब ऑफलाइन में क्लास में होते हुए भी ठीक से पढ़ नहीं पाते तो मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास में बच्चे कैसे पढ़ पाएंगे?”(बच्चे मोबाइल पर अपने पेरेंट्स से ज़्यादा सक्रिय हैं और जब पेरेंट्स अपने घरों में अपने सामने अपने 2-3 बच्चों को शांतिपूर्वक मोबाइल के सामने पढ़ने नहीं बैठा सकते तो क्लास में टीचर से उन जैसे 50 बच्चों को अनुशासित ढंग से पढ़ाने का महत्व समझते हैं?)

June, सरकारें अगले महीने स्कूल खोलने का विचार कर रही है: “हमारे बच्चे सोशल डिसटेंसिंग का पालन नहीं कर पाएंगे, बच्चों में इम्युनिटी पॉवर कम है; जब तक वैक्सीन नहीं आएगी, तब तक हम बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे!”

मेडिकल जानकारों का मानना है कि सारी प्रक्रिया से गुजरने के बाद बाज़ार में वैक्सीन उपलब्ध होने में 2 साल का समय लग सकता है, तो क्या तब तक स्कूलों को बंद ही रखा जाएगा?

फीस को ले कर स्कूल बनाम अभिवावकों के इस विरोधाभास ने अगर तूल पकड़ा तो ज़ाहिर है कि इसमें राजनीति भी आएगी और राजनीति सही या ग़लत की जगह संख्या किस की ज्यादा है और किससे ज्यादा राजनीतिक फायदा है की बुनियाद पर काम करती है। एक क्लास में टीचर तो 5-6 पढ़ाते हैं मगर उसमें पढ़ने वाले 50 छात्रों के 100 अभिभावकों का पलड़ा अधिक प्रभावशाली रहेगा!

क्या बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल की है, अभिभावकों की बिल्कुल भी नहीं? क्या कोरोनावायरस वैश्विक महामारी में जब दुनिया ज़्यादा से ज़्यादा चीजों को ऑनलाइन कर रही है तो ऑनलाइन शिक्षा से परहेज़ क्यों? वैसे भी शायद यही ऑनलाइन क्लास आने वाले भविष्य में पूर्णतः आम बात हो सकती है, कई देशों में पेन-पेपर की जगह बच्चे कम्प्यूटर पर ही नोट्स बनाते हैं, टेस्ट देते हैं।

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

ASHISH TRIPATHI
Right Winger, an army brat, interested in issues of society(particularly middle class), like to have realistic view (equidistant from pessimistic as well as optimistic).

Latest News

Teachers assign essays with a 280 character limit

This a satire news article, which 'reports' that the government has added 280 character essays to the educational curriculum in an attempt to train students to use Twitter in the future. Note: I have chosen an image of a school from your media library and added the twitter logo on top of it.

हिन्दू विरोधी वैचारिक प्रपंच, शब्दों का भ्रम (भाग-१)

धर्म शब्द को जिस प्रकार अनुचित अनर्थकारी व्याख्या के साथ प्रचलित किया गया है। इससे अधिक विनाशकारी आघात हिन्दू समाज को संभवतः ही किसी और शब्द से हुआ हो।

26/11 : संघ और हिंदूओं को बदनाम करने के लिए कांग्रेस का सबसे घटिया प्रयास

Hinduism is a complex, inclusive, liberal, tolerant, open and multi-faceted socio-spiritual system of India called “Dharma”. Due to its innumerable divergences, Hinduism has no concept of ‘Apostasy’.

Hinduism: Why non-Hindus can’t comprehend

Hinduism is a complex, inclusive, liberal, tolerant, open and multi-faceted socio-spiritual system of India called “Dharma”. Due to its innumerable divergences, Hinduism has no concept of ‘Apostasy’.

आओ तेजस्विनी, प्रेम की बात करें

इसे लव जिहाद कहा जाये या कुछ और किन्तु सच यही है कि लड़कियों के धर्म परिवर्तन के लिए प्रेम का ढोंग किया जा रहा है और उसमें असफलता मिलने पर उनकी हत्या।

दाऊद लौटेगा भारत – कहा पैंसठ साल का और सीनियर सिटीजन होने के कारण पुलिस उसे नहीं पकड़ सकती

दाऊद को लगता है कि पैंसठ की उम्र और वरिष्ठ नागिरक बनने के बाद भारत के GO और लिबरल्स उसके लिए सरकार से लड़ेंगे और उसे जेल में एक दिन भी नहीं रहना पड़ेगा।

Recently Popular

गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

The story of Lord Jagannath and Krishna’s heart

But do we really know the significance of this temple and the story behind the incomplete idols of Lord Jagannath, Lord Balabhadra and Maa Shubhadra?

Pt Deen Dayal Upadhyaya and Integral Humanism

According to Upadhyaya, the primary concern in India must be to develop an indigenous economic model that puts the human being at centre stage.

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.