Thursday, October 21, 2021
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ASHISH TRIPATHI

Right Winger, an army brat, interested in issues of society(particularly middle class), like to have realistic view (equidistant from pessimistic as well as optimistic).

आज के भारत की महाभारत

हर बार चीन ही भारत की सीमा पर हलचल की पहल क्यों कर जाता है? इसका जवाब 2013 में कॉन्ग्रेस सरकार के रक्षा मंत्री एंटनी ने दिया था, "आजादी के बाद से ही सीमावर्ती इलाकों में रोड इसलिए नहीं बनाईं गई क्योंकि भारत की सरकारों को डर था कि अगर चीन ने सीमा पर तैनात भारतीय जवानों को मार भी दिया तो भी वह खराब रास्तों की वजह से भारतीय क्षेत्र में ज्यादा अंदर नहीं घुस पाएगा!"

13 जुलाई 2002: भारत बनाम इंग्लैंड और आतंकी बनाम मज़दूर

विडंबना की पराकाष्ठा देखिए, जहां लंदन में भारत की जीत के हीरो मोहम्मद कैफ रहे और भारतीयों ने उनको खुशी-खुशी सिर-आंखों पर बैठाया और उस जीत का दिल खोल कर जश्न मनाया, वहीं जम्मू के कासिम नगर में इस्लामी आतंकवाद ने गरीब और बेसहारा मज़दूरों को निर्ममता से मौत के घाट केवल इसलिए उतारा क्योंकि वो सब हिंदू थे।

फेमिनिज्म वायरस की भारतीय सेना में घुसपैठ

सेना शायद राजनीतिक, मीडिया या सामाजिक दबाव में महिलाओं को रियायत दे भी दे, मगर क्या मुश्किल समय और सेना की कठोर नौकरी में आने वाली कोई आपातकालीन स्थिति हमको कोई रियायत देगी?

Girija Tickoo murder: Kashmir’s forgotten tragedy

her dead body was found roadside in an extremely horrible condition, the post-mortem reported that she was brutally gang-raped, sodomized, horribly tortured and cut into two halves using a mechanical saw while she was still alive.

चीन के दुस्साहस वायरस की मानेकशॉ थैरेपी

चीन की सेना विशाल जरूर है, मगर उसकी मौजूदा सेना में किसी सैनिक या अफसर ने कभी कोई जंग नहीं लड़ी और फिर पहाड़ी की लड़ाई तो और भी कठिन आयाम है, जिसमें भारतीय सेना को महारत हासिल है।

Covid19 didn’t collapse Delhi’s system, it just exposed the collapsed system

Mohalla clinics as such have a very controversial past, from allegations of running mohalla clinics on the properties of AAP members to corruption and mismanagement and to their overhyped unbelievable statistics showing diagnosis of 533 patients within 4 hours, there have been many contentious issues in their functioning.

आबादी: समस्या या बहाना?

जब सीमित संसाधनों वाले भारत देश को विकास की तरफ ले जाना था, तो जहां इंदिरा गांधी ने 'हम दो हमारे दो' की बात की, जिससे आबादी की बढ़ोत्तरी में कमी आए, तब उत्तर भारत के वामपंथी सोच के तथाकथित सोशलिस्ट नेता अपने-अपने वोट-बैंक के लिए 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी (संसाधन लेने में, टैक्स भरने में नहीं)' का राग अलाप रहे थे।

कोरोना काल: स्कूल बनाम अभिवावक

क्या बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल की है, अभिभावकों की बिल्कुल भी नहीं? क्या कोरोनावायरस वैश्विक महामारी में जब दुनिया ज़्यादा से ज़्यादा चीजों को ऑनलाइन कर रही है तो ऑनलाइन शिक्षा से परहेज़ क्यों?

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