Tuesday, August 11, 2020
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चाईनीज मानसिकता पर प्रहार

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LoAC पर सैनिकों की हिंसक भिड़ंत में हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए तथा चीन के लगभग 45 सैनिक मारे गए। इस घटना के बाद पारम्परिक शांतिपूर्ण वार्ता का विकल्प स्वतः ही समाप्त हो जाता है। भारत सरकार ने विभिन्न मोर्चे पर चीन की घेराबंदी शुरू कर दी है चाहे वो सैन्य रणनीति हो या आर्थिक प्रतिबन्ध।

इसी क्रम में 29 जून को भारत सरकार ने 59 चाइनीज़ एप पर प्रतिबन्ध लगा दिया। हालाँकि ये काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था क्योकि साइबर एक्सपर्ट्स की टीम लगातार चाइनीज़ एप की डाटा चोरी के बारे में चेतावनी दे रही थी। लेकिन कुछ लोग आकस्मिक रक्षा विश्लेषक बनकर आपको ये बताते घूमेंगे कि “एप बैन करने से क्या होगा? क्या भारत सरकार 20 सैनिकों की शहादत का बदला सिर्फ एप बैन करके लेगी?” पर ऐसा नहीं है कि सरकार यहीं रुक जाएगी, आगे भी रणनीति के अनुसार चाइना को घेरने के लिए फैसले लेती रहेगी।

लेकिन क्या सिर्फ भारत सरकार बिना जनता के सहयोग से चीन को आर्थिक झटका दे सकती है? जब बात आती है चाइना के सामान का बहिष्कार करने की तो अधिकतम जनता समर्थन में होती है। देश में कई स्थानों पर आम जनता द्वारा चाइना के सामान को तोड़कर या जलाकर प्रदर्शन किया जा रहा है तथा एक सन्देश देने का प्रयास हो रहा है कि चाइना से सम्बंधित कोई सामान न खरीदें और न ही बेचें। इस बात पर भी कुबुद्धिजीवियों का एक समुदाय विशेष आपको ये ज्ञान देता मिल जायगा कि जो चाइनीज़ सामान जैसे मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर पहले से घर पर मौजूद है, उसे फेंक दे क्या? ऐसे लोग आपको सही तर्क कभी नहीं देंगे कि इन प्रदर्शनों का उद्देश्य चाइनीज सामान को न खरीदने के लिए लोगो में जागरूकता फैलाना है नाकि अपने घर से सामान निकालकर फेंकना। 

जब भी राष्ट्रवाद से सम्बंधित कोई भी बात आती है तो आदत के अनुसार एक खास प्रजाति बिलकुल इसके उलट दिखाई पड़ती है। जैसे इसी प्रकरण में कुछ नकली क्रांतिकारी सोच रखने वाले लोग ये बोलते दिखेंगे कि “हम तो चाइनीज सामान लेंगे, तुम कुछ भी कहते रहो. भारत में कुछ बनता ही कहाँ है।” और ऐसा बोलते हुए अपने ही देश को नीचा साबित करने लग जाते हैं। उदाहरण के लिए भारत के स्मार्टफोन बाजार में चाइना का लगभग 70% शेयर है। निःसंदेह यह आंकड़ा कम नहीं है, लेकिन इसका अर्थ ये भी नहीं कि भारत चाइना पर सम्पूर्ण निर्भर है। 2014 में भारत में मात्र 2 मोबाइल मैनुफैक्चरिंग यूनिट थी जोकि आज के समय में 268 हैं। लेकिन यह बात आपको ये अल्पज्ञानी हवाई मछलियाँ नहीं बतायेंगी।

इस प्रकरण में एक और ट्रेंड चल रहा कि PUBG नामक मोबाइल गेम को सरकार ने प्रतिबन्ध के दायरे से बाहर रखा है। इस पर भी लोगो के अलग अलग सकारात्मक और नकारात्मक विचार हैं। लेकिन इस गेम के चाहने वालों में एक वर्ग ऐसा भी है जो भारत सरकार को यह गेम नहीं बैन करने की नसीहत दे रहा है। ऐसा करके ये वर्चुअल शूरवीरों की जमात सीधे तौर पर सरकार को चुनौती देने की चेष्टा कर रही है। जब एक मोबाइल गेम के सस्ते नशेबाज स्वयं के कर्तव्य तथा देशहित को दरकिनार करते हैं तो इनकी चाइनीज मानसिकता झलक जाती है। 

सवाल ये है कि हम चाइनीज सामान लेना बंद कर सकते हैं पर ये चाइनीज मानसिकता वाले होनहारों से कैसे निपटा जाये जिनका लक्ष्य सिर्फ भारत और भारतीयता को कोसना ही है। आज भारत अपना रुख स्पष्ट कर चुका है तथा विश्व के कई देश भारत के नेतृत्व में चीन से हर मोर्चे पर लड़ने कि तैयारी कर रहे हैं। लेकिन ऐसे समय पर ये अज्ञानचंद लोग भ्रम तथा नकारात्मकता फ़ैलाने में व्यस्त हैं। सोशल मीडिया के स्टेटसबाज #बॉयकॉट_चाइना का स्टेटस लगाकर “भारत में कुछ नहीं बनता” का राग अलापते आपको मिल जाएंगे जिससे इनकी डिफेक्टेड सोच और दोगलई साफ़ पता चलती है।

 

भारत आज अपने खिलाफ उठने वाली ताकतों को उखाड़ फेंकना जानता है। प्रधानमंत्री जी ने भी भारतीय जवानों की शहादत पर कहा था, “हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं, लेकिन हम अपने देश की अखंडता और संप्रभुता के साथ समझौता भी नहीं करते हैं। जब भी समय आया है, हमने देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है, अपनी क्षमताओं को साबित किया है।”

-Prashant Bajpai

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