Saturday, November 26, 2022

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All you need to know about India’s National Language issue

The goal for National Language is to reinforce the feeling that we are one, give as an extra anchor to hold on to. It is not supposed to be an official language.

Kichcha Sudeep contradicts his own statement on Hindi not being the National Language!

Celebrities like Kichcha Sudeep and politicians like Siddaramaiah and Kumarswamy who know Hindi quite well are provoking their own people against Hindi, limiting their prospects. Why?

The Row over Hindi being the National Language: Justified?

Home Minister Amit Shah’s statement to use Hindi instead of English for communication within India has sparked a row recently.

हिंदी तो बहाना है, देवनागरी में उर्दू पढ़ाना है

हिंदी की पुस्तक ‘रिमझिम’ को पढ़ते हुए लगता है देवनागरी लिपि में उर्दू और अंग्रेजी को पढ़ रहे हैं। इन शब्दों को बलात डाला गया है, जबकि इनके स्थान पर हिंदी के लोकप्रिय शब्द हिंदी में उपलब्ध हैं। लेकिन नरैटिव चलाने वालों के दिमाग में हिंदी है ही कहां?

नए भितरघाती- ट्रोजन राइट विंग (TRW)

ट्रोजन आरडब्ल्यू (TRW) क्या है? हम कैसे पहचाने कि कोई सोशल मीडिया की आवाज TRW है? यह भी प्रश्न उठता है कि क्या केवल मोदी / शाह या भाजपा / आरएसएस की आलोचना करने से ही कोई TRW हो जाता है?

The enemy of Hindi

British govt considered the suggestion of making Hindi as more pragmatic and wanted to accept it in 1867, Sir Syed Ahmad Khan started opposing it and launched a campaign to make Urdu the second official language.

कब तक सामने आते रहेंगे प्यारेमियाँ जैसे चरित्र?

क्या प्यारेमियाँ को दंडित करने मात्र ही समस्या का हल है? क्या प्यारेमियाँ अकेला अपराधी है? ऐसे अनेक सवाल हैं जो एक समाज के रूप में हमें स्वयं से पूछने ही चाहिए।

चाईनीज मानसिकता पर प्रहार

सवाल ये है कि हम चाइनीज सामान लेना बंद कर सकते हैं पर ये चाइनीज मानसिकता वाले होनहारों से कैसे निपटा जाये जिनका लक्ष्य सिर्फ भारत और भारतीयता को कोसना ही है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सच

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कैसे निर्धारित की जाती है?

समीक्षा: प्रेमचंद की छिपी हुई कहानी ‘जिहाद’ की

आत्मगौरव, निजधर्म के सम्मान में वह मुसलमान हो जाने के स्थान पर मृत्यु को वरीयता देता है और जिहादियों के हाथों मारा जाता है। यही प्रेम त्रिकोण का टर्निंग पॉइंट बनता है।

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