Thursday, June 4, 2020
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दिल्ली के खाली कारतूस

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योगी आदित्यनाथhttp://www.yogiadityanath.in/
मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश); गोरक्षपीठाधीश्वर, श्री गोरक्षपीठ; सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश
 

कहते हैं कि दिल्ली दिलवालों का शहर है, पर पिछले 50 दिन देखें तो लगता है कि ये शहर दिल्लगीवालों का है। जहाँ देखो वहाँ अलग ही भसड़ मची हुई है। कालिंदी कुँज (शाहीन बाग) मे डटे हुए बिरयानीखोर अलग ही ड्रामा मचाये हुए हैं।

अभी दिल्ली में नया ड्रामा रचाया गया है एक नाबालिग लड़का देसी कट्टा लेके जामिया में गोली चलाता है, मीडिया आराम से उसके फोटो खींच रहा है विडियो बना रहा है और एक पुलिसवाला आराम से आकर उसका कट्टा ले लेता है और लड़का गिरफ्तार होते समय सबको बडे आराम से अपना नाम रामभक्त गोपाल बता देता है। एक और लड़का कालिंदी कुँज (शाहीन बाग) में हवा में गोली चलाता है और कहता है कि सिर्फ हिंदुओं की चलेगी। उसके बाद वही होता है जो Goebels बता के गया था। #PakSaafMedia और पूरी लिब्टार्ड जमात इसे घिसने में जुट जाता है। दोनों जगह साफ पता चल रहा है कि ये सब सिर्फ मीडिया को दिखाने के लिये किया गया है। इसे शुद्ध इंग़्लिश में कह्ते हैं False Flag Operation।

ज़ैसा की प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शाहीन बाग संयोग नहीं प्रयोग है। मैं कह्ता हूँ कि प्रयोग से पहले ये सोची समझी राजनीतिक बिसात भी है। चलिये Chronology समझते हैं। ये शाहीन बाग का प्रपंच दिल्ली के चुनाव से ठीक पहले रचा गया इस उम्मीद से कि जो सरकार कश्मीर से धारा 370 हटा सकती है वो दिल्ली में ये ड्रामा सहन नहीं करेगी और जिस तरह 2011 में UPA सरकार ने बाबा रामदेव और बाकी प्रदर्शनकारियों को रात के अँधेरे में रामलीला मैदान से हटवाया था उसी तरह का कुछ एक्शन यहाँ देखने को मिलेगा। बाकी काम तो भाँड पत्रकार शिरोमणि रवीश कुमार कर देते कि किस तरह एक शांतिप्रिय आँदोलन को इस फासिस्ट सरकार ने कुचल दिया और बाकी राजदीप, राहुल जैसे #PakSaafMedia वाले भी तो कुछ करते। बढ़िया सा माहौल बनता, कोई और नशेड़ी फिल्मस्टार भी इसमें डरके दिखाता और कुक्कुरहाव करता। किसी भी तरीके से कुछ तो माहौल बनता पर हाय रे निर्दयी मोदी और शाह, कोई प्लान नहीं चलने दिया। सारे पत्ते फेंट लिये पर कुछ ना चला। साँप के मुँह में छछूंदर बन गया है शाहीन बाग ना तो खत्म करते बन रहा है ना जारी रख कर। नित नये शर्जील जैसे पढ़े लिखे wannabe Osama दिख रहे हैं।

ये जब लगा कि पासा तो उल्टा पड़ गया है और इसका फायदा BJP को मिलता दिख रहा है तो ये दो प्यादे भेज कर इस पूरे प्लान को किसी भी तरह अंजाम तक पहुँचाने का प्रयास किया गया, किसी तरह कुछ तो हो, किसी तरह तो केंद्र सरकार को बैकफुट पर लाया जा सके। लिब्टार्ड जमात तो यह भी साबित करने में लगी हुई है कि ये प्यादे BJP ने इसलिये भेजे हैं ताकि किसी तरह राष्ट्रपति शासन लगा सके, इस से बडा शुतुर्मुर्गी ख्याल क्या होगा कि कब्र मे पाँव लटकाये पडी केजरीवाल की सरकार को ज़िन्दा शहीद बना दिया जाये।

बिना लाग लपेट के कहूँ तो ये ख़ाली कारतूस सबको समझ आ रहे हैं, दिल्ली के बहुसँख्यक लोगों को दिखने लगा है कि इस जिहादी भीड़ और उनके घर के बीच कौन दीवार बन कर खड़ा है और दिल्ली की जनता केजरीवाल को बोलने वाली है कि निकल पहली फुर्सत में निकल।

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