Saturday, April 20, 2024
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इमरान और उनके बचकाने तर्क

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AKASH
AKASH
दर्शनशास्त्र स्नातक, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी परास्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय PhD, लखनऊ विश्वविद्यालय

पुलवामा हमले की जब चहुँओर आलोचना हो रही थी तब पाकिस्तानी पीएम इमरान खान सो रहे थे। 19 फ़रवरी को जब इमरान पुलवामा को लेकर कैमरे के सामने आते हैं तो अपने देश को defend करने के लिए उन्हें 6 मिनट के विडियो में भी कई कट लेने पड़े। इस विडियो में इमरान कुछ अलग नहीं कर पाए। यहाँ भी वह वही शब्द बोले जो उन्हें पाकिस्तानी सेना और ISI की तरफ से उनको दिए गये। ऐसे बयान हमेशा से ही पाकिस्तान की पहचान बने रहे हैं। इसकी पुष्टि इस्लामाबाद हाईकोर्ट के एक जज ने यह कहकर की थी कि ISI अपनी मर्जी से जजों को केस में नियुक्त करती है और मैनेज करती है। पिछले साल चुनाव में इमरान पर आरोप लगा था कि वह सेना की कठपुतली है। उनको जिताने के लिए सेना ने नवाज शरीफ की बेटी मरियम को जेल से बाहर तक निकलने नहीं दिया था।

इमरान खान पाकिस्तानी टीम में एक बॉलर थे और राजनीती में भी उनकी भूमिका इससे ज्यादा की नहीं है। 2002 में जब पूरा पाकिस्तान तानाशाह मुशर्रफ का विरोध कर रहा था तब इमरान उसकी कप्तानी में चुनाव की पिच पर बैटिंग करने की कोशिस में लगे थे।

आज जब इमरान कैमरे के सामने बैठ रटा हुआ बोल रहे थे तब  वो किसी देश के प्रधानमंत्री कम प्रवक्ता ज्यादा लग रहे थे। लेकिन यह काम भी वो बखूबी नहीं कर पाए।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कहते हैं कि “पुलवामा हमले में पाकिस्तान का नाम बिना वजह लेना गलत है। इस तरह के आरोप बेबुनियाद है। अगर ऐसा है तो भारत को सबूत देने चाहिए।” ऐसा बोलते बोलते इमरान भूल गये कि इससे पहले भारत ने पाकिस्तान को सबूत भी दिए थे 26/11 के हमले में पूरे विश्व ने मान लिया कि इसमें पाकिस्तान का हाथ था। अमेरिका ने डेविड हेडली को पकड़कर सजा भी दे दी लेकिन पाकिस्तान रट्टू तोते की तरह अब भी चिल्ला रहा है कि हमारा इसमें कोई हाथ नहीं है। सबूत पर्याप्त नहीं है। यही एक वजह है कि लश्कर-ए-तैयबा का सरगना हाफिज सईद खुले आम पाकिस्तान में घूम रहा है। ठीक इसी तरह पठानकोट हमले में भारत ने तो एक कदम आगे जाते हुए पाकिस्तान की जाँच टीम को बुलाया था ताकि वह दोषियों को पकड कर उचित सजा दे। लेकिन उसका भी हाल ढाक के तीन पात जैसा ही रहा।

वैसे इमरान खान बात किन सबूतों की कर रहे हैं इस हमले की जिम्मेदारी जैश ए मोहम्मद ने ली है और ये जैश ए मोहम्मद पाकिस्तान से ही ऑपरेट हो रहा है। इसका मुखिया मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान के भावलपुर में ऐश की जिन्दगी जी रहा है और भारतीय सूत्रों के अनुसार इसमें उसकी मदद पाकिस्तानी सेना और ISI कर रहें है।

इमरान खान भारत को धमकी देते भी नजर आते हैं कि भारत अगर हमला करेगा तो हम भी पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन वो किन-किन  मोर्चों पर युद्ध लड़ेंगे। आर्थिक तौर पर वो पहले से चीन पर निर्भर हैं। सऊदी अरब से खैरात पाने के लिए वजीर-ए-आला को नंगे पैर खुद गाड़ी चलाकर जाना पड़ता है। और तो और पाकिस्तान की हालत इस समय इतनी ख़राब है कि गलती से एटम बम परिक्षण करने का भी कह दो तो उसके लिए भी कर्ज लेकर इंतजाम करना पड़ेगा।

यह वही इमरान खान हैं जिन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को बांग्लादेश के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहियें तब उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि इस युद्ध में हमने पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को बंदी बनाया था।

1999 में जब वो राजनीति का ककहरा सीखने की कोशिस कर रहे थे तब भी भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाई थी।

जाते जाते इमरान शांति का पाठ भी पढ़ा कर चले गये। जो इस समय भारत के कई देशद्रोही पढ़ रहें है कि युद्ध किसी मसले का हल नहीं है मिल बैठ कर बातों को सुलझा लेना चाहिए। इमरान साब को ये भी समझना चाहिए कि अगर बातचीत से मुद्दे हल होते तो उनको खुद तीन शादियाँ नहीं करनी पड़ती।

लेकिन उन्हें जबाव देना चाहिये, क्या आतंक मसले का हल है? क्या पडोसी मुल्क में सेना द्वारा अस्थिरता का माहौल बनाना मसले का हल है?

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दर्शनशास्त्र स्नातक, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी परास्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय PhD, लखनऊ विश्वविद्यालय
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