Saturday, February 4, 2023

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Selfless Social services by RSS

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरोधी, भ्रटाचारी, तानाशाह और आतंकी ही क्यों होते हैं? भाग-२

आज कांग्रेस से लगभग ४० वर्ष बाद जन्म लेने वाले संगठन ने कांग्रेस को अस्तित्वविहीन कर छटपटाने के लिए छोड़ दिया है इस उम्मीद के साथ की एक दिन उसका चाल, चरित्र और सोच हमारे सनातन धर्म के अनुसार होगी, उसके विरुद्ध नहीं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरोधी, भ्रटाचारी, तानाशाह और आतंकी ही क्यों होते हैं? भाग-१

आरएसएस और कांग्रेस दो ऐसे संगठन हैं जिनका इतिहास लगभग १०० वर्ष के आसपास का है। कांग्रेस तो लगभग १२५ से १४० वर्ष पुरानी है। आइये देखते हैं दोनों संगठनों के उतार और चढाव को और समझते हैं कि दोनों में बुनियादी अंतर क्या है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्र सेवा में बढ़ते कदम

राष्ट्र को परमवैभव पर ले जाने के जिस उद्देश्य को लेकर विजयादशमी के दिन नागपुर में प्रखर राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत डा. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।

भारत के निर्माण में संघ का योगदान

गांधी जी ने ए.ओ. द्वारा गठित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को समाप्त करने की बात भी कही थी। स्वतंत्रता संग्राम में किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी का कोई योगदान नहीं है, आजादी की लड़ाई में सभी का रक्त शामिल है।

Shri Mohan Bhagwat ji’s statement- Hindus and Muslims in India share the same DNA- caused ripple effect

The RSS is perceived to be the organisation of the majority Hindus. However, the meaning of Hindutva encompasses all.

कोरोना काल में भी देशभर में सेवा कार्य में जुटा हुआ है संघ

कोरोना की प्रथम लहर की भांति दूसरी लहर में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक अनुषांगिक संगठन सेवा भारती सहित अन्य सबन्धित संगठन व संस्थाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों व जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध करवाने के कार्य में जुटे हुए हैं।

दृढ़ संकल्प, सजगता, धैर्य व सामूहिक प्रयासों से कोरोना संकट पर निश्चित ही विजय प्राप्त होगी– डॉ. मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत प्रयास व धैर्य के साथ भारतीय समाज कोरोना पर निश्चित ही विजय प्राप्त करेगा.

RSS: Perspective with unbiased lenses

Should we call RSS Swayamsevaks as religious fanatics if they are following the principles of Sanatana Dharma and serving society without any prejudice, rich or poor, black or white, no religious and caste discrimination?

निधि समर्पण अभियान में 5.45 लाख स्थानों पर 12.47 करोड़ परिवारों से किया संपर्क – डॉ. मनमोहन वैद्य

कोरोना काल और श्रीराम मंदिर जनसंपर्क अभियान में ध्यान में आया कि संघ को जानने की समाज में उत्सुकता बढ़ी है। इसलिए स्थान-स्थान पर संघ परिचय वर्ग की योजना बनेगी।

Why I went to a Shakha!

Once ashamed of having attended a Shakha once, this is how I gained respect for RSS!

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