Tuesday, June 22, 2021
11 Articles by

पवन सारस्वत मुकलावा

कृषि एंव स्वंतत्र लेखक , राष्ट्रवादी ,

ट्वीटर बना निहित स्वार्थ ताकतों का अड्डा

उपराष्ट्रपति राजनीति से ऊपर हैं. वे संवैधानिक पद पर हैं. क्या ट्विटर अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य व्यक्तियों अन्य नेताओं के साथ ऐसा दुर्व्यवहार कर सकता है?

पर्यावरण पर गहराता संकट, भविष्य के लिए वैश्विक चुनौती

हमें यह बात नहीं भूलना चाहिए कि पर्यावरण की अनदेखी के कारण ही आए दिन भूकंप और खतरनाक समुद्री तूफान जनजीवन को नष्ट कर रहे है। जब तक पर्यावरण शुद्ध है, तभी तक समाज जीवित है।

कोरोना काल में भी देशभर में सेवा कार्य में जुटा हुआ है संघ

कोरोना की प्रथम लहर की भांति दूसरी लहर में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक अनुषांगिक संगठन सेवा भारती सहित अन्य सबन्धित संगठन व संस्थाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों व जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध करवाने के कार्य में जुटे हुए हैं।

वीर सावरकर जयंती विशेष: हिंदुत्व के पुरोधा थे

वीर सावरकर एक व्यक्ति नहीं, एक विचारधारा थे। चाहे जेल में हों, चाहे नजरबंदी में हों, चाहे खुले मैदान में, प्रखर राष्ट्रवाद की लौ उनमें सदैव जलती रही। इस जिंदा शहीद ने कभी भी अपने सिद्धांतों और अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया।

राजनीतिक लाभ लेने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान विद्या भारती की कट्टरपंथियों से तुलना करना अशोभनीय

देश में शिक्षा के नाम पर राजनीति करना यह आमचलन हो गया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विद्या भारती से जुड़े स्कूलों की तुलना पाकिस्तानी कट्टरपंथी मदरसों से करना कतई सोभनीय नही है.

पुलवामा अटैक: 14 फरवरी का दिन दुःखद, स्वर्ग जैसी धरती हुई थी खून से लहूलुहान

आज भी पुलवामा अटैक के उस मंजर को याद कर हर किसी की आंखे नम हो जाती है। वीर शहीदों की शहादत को आज भी पूरा देश नमन करता है।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष: हर भारतीयों के लिए पराक्रम के प्रतीक

भारत माता के सपूत के स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को केंद्र सरकार ने हर साल पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।

स्वामी विवेकानंद जयंती: एक युवा, जिसने साधु बनकर दुनिया को असली भारत की पहचान बताई

12 जनवरी का दिन देश भर में युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिन स्वामी विवेकानंद जी को समर्पित हैं. आइए जानते हैं एक आम युवा व्यक्ति के स्वामी विवेकानंद बनने तक के सफर को.

6 दिसंबर 1992 के बिना भव्य राम मंदिर निर्माण की कल्पना क्या संभव थी

6 दिसंबर 1992 की वो शुभ तारीख... जिसने बदल कर रख दिया इतिहास, हर धुरी बदल गयी यानी उस दिन हर तरफ जय श्री...

अब पत्रकारिता के दमन पर, अभिव्यक्ति की आज़ादी कहा है

4 नवंबर यानी बुधवार की तरोताजा सुबह ने मुंबई में जैसे आपातकाल की याद दिला दी हो यानी अभिव्यक्ति की आजादी जैसे सो कोस दूर हिलोरे मार रही हो ,स्वंत्रता की आजादी जैसे गड्ढे में दम ले लिया हो।

Latest News

Recently Popular