Sunday, November 27, 2022
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Abhishek Kumar

Politics -Political & Election Analyst

देश को अब टू नहीं “वन चाईल्ड पॉलिसी” की जरूरत

हमारे देश में 'हम दो, हमारे दो' का कॉन्सेप्ट कई दशकों से चला आ रहा है. लोगों को जागरुक किया जाता रहा है, लेकिन अब देश मे टू चाईल्ड पॉलिसी की नही वन चाईल्ड पॉलिसी की आवश्यकता है.

चालबाज चीन के चंगुल में फंसता गया श्रीलंका 

2014 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कोलंबो का दौरा किया तो इसे भारत के लिए स्पष्ट कूटनीतिक संकेत माना गया था। जिनपिंग के श्रीलंका दौरे के बाद अगले ही साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका का दौरा किया।

अवमानना की हद

किस-किस के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलेगा? फैसले की आलोचना अलग बात होती है और अपनी बात रखना अलग। सवाल है कि क्या अपनी बात रखना भी अवमानना हैं?

क्या भारतवंशी करेगा अंग्रेजों पर राज?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जाॅनसन के इस्तीफे के बाद सवाल यह है कि उनकी जगह कौन लेगा? ब्रिटेन के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर कुछ भारतीय मूल के नागरिकों के नाम भी उभरे हैं। उनमें सबसे पहला नाम तो ऋषि सुनाक का ही है। दूसरा नाम जाॅनसन सरकार में गृह मंत्री रहीं प्रीति पटेल का है।

भारत में पनपती तालिबानी मानसिकता

राजस्थान के उदयपुर और महाराष्ट्र के अमरावती में हुई बर्बर हत्या ने साबित कर दिया हैं कि सिर तन से जुदा की सनक वाले देश में जिहाद करने के लिए बेख़ौफ़ बेलगाम होते जा रहे हैं.

बेलगाम होता सोशल मीडिया

सोशल मीडिया के महाकाय कॉरपोरेट जब फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और ऐसे अन्य प्लेटफॉर्म लेकर सामने आए, तब कहा गया था कि इससे दुनिया एक-दूसरे के करीब आएगी। शुरू में ऐसा हुआ भी, पर बाद में ये प्लेटफॉर्म बेलगाम हो गए।

नूपुर केवल बहाना, कहीं ओर हैं निशाना?

नूपुर शर्मा ने जो भी वक्तव्य दिया था वो करोडों हिंदू धर्म को मानने वालों के आराध्य भगवान शिव के ऊपर मुस्लिम नेता तस्लीम रहमानी द्वारा की गई घटिया और निंदनीय टिप्पणी के बाद प्रतिक्रिया के रूप में दिया था।

खींचतान की सत्ता

महाराष्ट्र में सत्ता के लिए चल रही खींचतान अब अदालत की परिधि में आकर एक नए दौर मे प्रवेश कर गई है। सत्ताधारी गठबंधन...

महाराष्ट्र राजनीति में दावेदारी का दंगल

अब महाराष्ट्र में शिवसेना पर दावेदारी का दंगल शुरू हो चुका हैं.

सिद्धू मूसेवाला की हत्या पर AAP सरकार कठघरे में!

शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ़ सिद्धू मूसेवाला की हत्या कानून व्यवस्था की हालत तो बता ही रही हैं, उससे भी बड़ा सवाल राज्य सरकार के उस फ़ैसले पर भी खड़ा हो गया हैं जिसमें सरकार ने अचानक से चार सौ ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा वापस ले ली.

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