Tuesday, June 22, 2021

Hindi

अभिव्यक्ति की आज़ादी या देशभक्ति या कुछ और

सोशल मीडिया और न्यूज मीडिया के चक्कर में वाद-विवाद का स्तर गिरता जा रहा है

राम राम कन्हैया भाई! तनिक हमारा भी सुनिये

भईया बोलना आसान है, करना मुश्किल । स्पीच देना आसान है, रोटी देना मुश्किल ।

क्योंकि वो कन्हैया नहीं है

उसने फैसला कर लिया है, वो कन्हैया नहीं बनेगा, क्योंकि वो स्वाभिमानी है

भीड़ का मिज़ाज

हरयाणा मे आरक्षण की माँग को लेके तोड़ फोड़ हुई तो उसी की आड़ मे बलात्कार भी। जवाबदेही किसी की नही है क्यूंकी ये भीड़ ने किया!

अर्नब के साथ राजदीप और बरखा भले न हों, देश उनके साथ है, और उसकी एक वजह है

अर्नब के साथ देश खड़ा है, और उसकी वजह से राजदीप और बरखा को तकलीफ़ हो रही है।

जेएनयू के छात्रों को आत्मविश्लेषण करना चाहिए

जेएनयू के छात्रों के नाम एक खुला पत्र

रवीश कुमार के कारनामें, जो उन्होंने स्टूडियो में अंधेरा कर के किया

टीवी पर अंधेरा कर के रवीश ने वही सब किया जो उन्होनें दूसरों पर करने का आरोप लगाया

भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक खुला पत्र – कृप्या जेएनयू मामले में दख़ल करें

माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय क्या जेएनयू में लगाए गए नारे माननीय न्यायालय की अवमानना नहीं है?

रविश कुमार की मार्मिक एवं कालात्मक विडियो का जवाब

रविश कुमार जी, ये अँधेरा अगर मीडिया का, पत्रकारिता का तस्वीर है, तो जनाब आपका चैनल इस अँधेरे का तमराज किल्विस है।

टीवी अंधेरा कर रवीश ने सवाल सही उठाए, पर जवाब कौन देगा?

मीडिया को टीबी हो गया है या रवीश के मुताबिक टीवी को टीबी हो गया है, पर मीडिया को बीमार करने के लिए ज़िम्मेदार कौन है ?

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