Home Hindi नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- प्रकृति के उल्लास का पर्व

नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- प्रकृति के उल्लास का पर्व

नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- प्रकृति के उल्लास का पर्व

आप सभी पाठकों को नव वर्ष की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं यह वर्ष आपके लिए आरोग्य एवं समृद्धि लाए।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2078 का आगमन हो चुका है, आइए प्रकृति के इस उल्लास पर्व को हम सब मिलकर मनाते हैं हमारी सनातन संस्कृति का यह पवित्र पर्व है, इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था एवं भगवान विष्णु के दस अवतारों में से प्रथम अवतार इसी दिन हुआ था और इसीलिए वैष्णव दर्शन में चैत्र मास नारायण का ही एक रूप है और आसपास लहलहाती फसलों को देख सरसों से भरे हुए पीले खेत एवं चारों तरफ सकारात्मकताओं के इस मास में चैत्र शुक्ल नवमी को ही प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। दयानंद सरस्वती जी द्वारा समाज कल्याण हेतु आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन की गई थी।

कालगणनाओं के लिए कल्प, सृष्टि, युगादि आदि समस्त ज्योतिषीय गणनाओ का भी प्रारंभ का दिन है। चैत्र मास का वैदिक नाम मधु मास है अर्थात आनंद से परिपूर्ण मास क्योंकि इसी मास में समस्त वनस्पति एवं सृष्टि प्रस्फुटित होती है चारों तरफ कोयल की स्वर लहरी होती है यह पवित्र दिन इसलिए भी पूजनीय है क्योंकि लंका विजय के पश्चात प्रभु श्री राम के अयोध्या वापस आने के बाद इसी दिन उनका राज्याभिषेक हुआ था सिखों के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव जी का भी प्रकट उत्सव है। सिंध प्रांत के समाज रक्षक वरुण अवतार संत झूलेलाल जी भी इसी दिन प्रकट हुए थे।

विक्रमादित्य की भांति उनके पुत्र शालिवाहन ने फूलों को परास्त करके दक्षिण भारत में श्रेष्ठ राज्य की स्थापना हेतु शालिवाहन संवत्सर शुरू किया। इसी दिन से हिंदू घरों में नवरात्रि, कलश स्थापना, पताका ,ध्वज पूजन से मां की आराधना शुरू होती है। ऐसे ही अनेकानेक महत्व लिए यह दिन आता है जोकि हमारी संस्कृति का गौरव हमें दिखाता है अतः आइए हम सब मिलकर इस नववर्ष का भव्य स्वागत करें।

भारत माता की जय
वैभव वर्मा

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