Tuesday, June 18, 2024

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new year

2022 – The year of hope, despair or gloom

This year has been notably different in welcoming the end rather than exceptional individual achievements, Geo-political developments, economical headwinds or natural calamities.

नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- प्रकृति के उल्लास का पर्व

चैत्र मास का वैदिक नाम मधु मास है अर्थात आनंद से परिपूर्ण मास क्योंकि इसी मास में समस्त वनस्पति एवं सृष्टि प्रस्फुटित होती है चारों तरफ कोयल की स्वर लहरी होती है यह पवित्र दिन इसलिए भी पूजनीय है क्योंकि लंका विजय के पश्चात प्रभु श्री राम के अयोध्या वापस आने के बाद इसी दिन उनका राज्याभिषेक हुआ था सिखों के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव जी का भी प्रकट उत्सव है।

A look back in 2020 and planning 2021

As we usher in the New Year 2021 with gusto, let’s not forget the lessons learned in the gloom and doom year.

नववर्ष में अपेक्षायें व हमारा उत्तरदायित्व

मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मबल से हम स्वयं में बदलाव लाकर "परिवार, समाज, देश" को दीर्घकालीन लाभप्रद स्थिति प्रदान कर सकते हैं तो उस पर दृढ़ निश्चय से हम सभी को प्रयत्न अवश्य करना चाहिए।

डूबते सूरज की बिदाई नव-वर्ष का स्वागत कैसे 

आज पाश्चात्य सभ्यता का अनुसरण करते हुए जाने अनजाने हम अपनी संस्कृति की जड़ों और परम्पराओं की डोर को काट कर किस दिशा में जा रहे हैं?

बैंगलुरु जैसी वारदात हमें एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का बहाना दे देती है

बैंगलुरु जैसी घटना हमारे समाज के खोखलापन को उजागर कर देती है

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