Monday, March 1, 2021
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Rahul Raj

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मोदी के चरखा छूते ही लोगों को गाँधी और खादी याद आने लगा

क्या जहाँ जहाँ गाँधी का ब्रांड लग गया, वहां गाँधी की जगह किसी और को एम्बेसडर नहीं बनाया जा सकता?

राष्ट्रवाद के नाम पर कहीं हम राष्ट्रवाद का ओवरडोज़ तो नहीं ले रहे हैं

सुषमा स्वराज ने आवेग में Amazon को खुलेआम धमकी देकर जय जयकार तो बटोर लिया, लेकिन उन्होंने कुछ वैसे लोगों को राष्ट्रवाद के नाम पर ट्रोल और परेशान करने का बहाना भी दे दिया, जिनमें भ्रष्टाचार, अपराध, ग़रीबी और अत्याचार को देखकर राष्ट्रवाद नहीं जागता, लेकिन राष्ट्रगान और तिरंगा देखकर जाग जाता है।

जब दिल्ली कचड़ों में सड़ रहा है, केजरीवाल ट्विटर पर मोदी और उनकी माँ पर चुटकुले लिख रहे हैं

किसी राज्य में ग़रीब किसान मरता है तो केजरीवाल दिन भर ट्वीट करते हैं, कहीं किसी ग़रीब को demonetisation के चलते खड़ा होना पड़ता है तो केजरीवाल प्रेस-कांफ्रेंस बुलवा लेते हैं; लेकिन दिल्ली के ग़रीब सफ़ाई कर्मचारियों को जब महीनों महीनों वेतन नहीं मिलता, तब केजरीवाल की सारी कैफ़ियत ही बदल जाती है।

जब लोग ओम पुरी को पाकिस्तानी बोलते हैं तो मुझे गुस्सा क्यों आता है

हम ओम पूरी जैसे कलाकारों को पाकिस्तानी बोल बोलकर हर उस पगले कलाकार की आवाज़ दबा देते हैं जो एक अलग परिपेक्ष्य की सम्भावना ढूंढता है

केजरीवाल ने जादुई छलनी से देख कर राजेंद्र कुमार को ईमानदार बना दिया

क्या केजरीवाल कहना चाह रहे हैं कि अगर तमिलनाडु, बंगाल या दिल्ली का प्रमुख सचिव भ्रष्ट हो, तो उन्हें माफ़ कर दिया जाए ?

बैंगलुरु जैसी वारदात हमें एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का बहाना दे देती है

बैंगलुरु जैसी घटना हमारे समाज के खोखलापन को उजागर कर देती है

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