Sunday, April 14, 2024
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मोदी जी का आना और बहुत कुछ बदल जाना: किसी को सबकुछ मिल जाना और किसी का सबकुछ लुट जाना

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यदि आप ये ब्लॉग पढ़ रहे है तो आप उन परिवर्तनों के साक्षी हैं जो मोदी जी के आने के बाद भारत में हुए है। इन परिवर्तनों से या तो आपके अच्छे दिन आ गएँ होंगे या फिर बुरे दिन ही आ गए होंगे। हम सब, दो कैटेगरीज में आ जाते हैं। पहले कैटेगरी में, सिकुलर और गंगा जमुनी तहजीब के मंझे हुए खिलाडी हैं। यदि आप इस कैटेगरी से हैं, तो आपके बुरे दिन शुरू हो गएँ होंंगे। यदि आप डरे हुए, शांतिप्रिय समाज से हैं, तो आप और डर गएँ होंगे। यदि आप रेलिजन ऑफ़ पीस से हैं तो आप अंदर-अंदर ही, पीस-पीस हो रहे होंगे। दूसरे कैटेगरी के लोग, किसी भी धर्म और संप्रदाय को मानने वाले हो सकते हैं, परन्तु भारतीय हैं। इनके अच्छे दिन शुरू हो गए हैं। इनको जो चीजे परेशान कर रही थी, वो या तो दूर हो गयीं हैं या फिर दूर होने की कगार पर होंगी। इतना विश्वास तो है मुझे।

पहले कैटेगरी के लोग, जो की सिकुलरिज्म और चमचागिरी के चैपियन हैं या फिर कभी रह चुके हैं। इसमें ख़वीश कुमार, क्रन्तिकारी पाजपायी, बुरखा दुखड़ा और कभीनव शर्मा, जैसे हज़ारो पत्रकार है जो आज या तो गुमनामी में जी रहे है या फिर चमचागिरी के साथ थोड़ा सा घुट-घुट कर, आज मौत और जिंदगी के बीच जी रहे है। शादी वाली नयी शेरवानी की नयी दुकान ही बस थोड़ा-थोड़ा चल रही है। आपको लग रहा होगा जिंदगी और मौत ही क्यों नहीं लिखा है? क्योकि इस टाइप की पत्रकारिता, अब मौत की कगार पर है और जिंदगी से दूर जा रही है, इसलिए पहले मौत लिखा। ओप इंडिया और रिपब्लिक न्यूज़ जैसे पत्रकारिता पैदा हो कर पल पोस रही हैं। ये स्वघोषित पत्रकार और समाज के ठेकेदार, जो हमेशा से भारत की भारतीयता का गाला घोट कर, सिकुलरिज्म का पाठ पढ़ाते रहते थे, खान्ग्रेसी सरकार की दुम सहला-सहला कर हमें बताते थे, की हम कितने पिछड़े थे कितने जानवर थे। और तो और, भला हो उन जेहादी मुगलो का जिन्होंने हमे जीना सिखाया, इंसान बनाया। ताज महल और लाल किला भी बनाया, उससे पहले तो भारत में भी कुछ था ही नहीं।

हमारे दिमाग में भर दिया की हम तो जातिवादी थे, और हमेशा रहेंगे, हम में हजारों बुराइयाँ है। इन चमचो को हमारी संस्कृत और सभ्यता में एक भी अच्छाई नजर नहीं आयी। हमें अपनी ही नजरो में गिरा दिया। इतना गिराया की हम उठना ही भूल गएँ, अपने पूर्वजो को गाली देने लगें और इन चमचो के बताएं रास्तो को ही अपना लिया। जिन दरिंदो ने हमारे पूर्व जो की मारा, प्रताड़ित किया, माताओ और बहनो का बलात्कार किया,मंदिरो को तोडा, सिख गुरु के नन्हे बेटो को जिन्दा चुनवा दिया, सिख गुरुओ को क़त्ल किया, उन्हें ही अपना आदर्श मानने लगे। हमारी हिस्ट्री की शुरुआत ही मुग़ल काल से की। इन्होने सिखाया की बिना कपड़ो वाली, बहन -बेटिया ही फेमनिस्ट है। असली फेमनिस्ट तो वो है जो शादी के पहले भी शारीरिक सम्बन्ध बनायें, और शादी के बाद कई लोगो से सम्बन्ध बनायें। जो बहनें ऐसा नहीं करती, वो पिछड़ी सोच की है।

आई.ए.अस और.आई.पी अस तो कोई भी बन सकता है, कोई भी आत्मनिर्भर हो सकता है, यह तो छोटी से चीज है, असली चीज तो फेमनिस्ट होना हैं। इन्होने सिखाया भांड (एक्टर) ही असली हीरो और सुपर स्टार है, कणिकाएं ही हेरोइन हैं। यही लोग भारत को रिप्रेजेंट करते हैं, और हमारे आदर्श होने चाहिए। इन कणिकाओ और एक्टरों ने सिखाया की ब्राह्मणो ने सिर्फ दलितों का शोषण किया है, राजपूतो ने माताओ और बहनो की इज्जत लूटी है, और महाजन लोगो ने लोगो की संपत्ति लूटी है। नन्द, सुंग, राय, पल्लव, कुषाण, सत्यावहन, कणव, सुंग, पल, चालुक्य और मौर्य जैसो वंशो का तो कोई योगदान ही नहीं है हमारे हिस्ट्री में, इनके लिए तो ये तो पौराणिक कथाओ के पात्र मात्र हैं।

कुछ आतंकवादी जो भारत के विभाजन से समय यही भारत में रुक गएँ, जो अब दूसरे विभाजन की तैयारी में हैं, हमें सिखाया की मंदिर में तो पत्थर की मूर्ति रहती हैं, जो आप के लिए कुछ नहीं करेगा। करने वाला तो बिल्ला नंबर ७८६ हैं। सिर्फ मजारों में ही शक्ति है, वही जाओ तभी आपकी ऊपर वाला सुनेगा। इन आंतकवादियो ने सिखाया की, पठान का बच्चा ही ईमानदार होता हैं। मजे की एक बात बताऊ, ईमानदार सिर्फ वही हैं जो सिर्फ अल्लाह में विस्वास रखता हैं, और मोहम्मद पैगम्बर साहब को असली और आखिरी पैगम्बर मानता हैं। इन्होने हमें सिखाया, पुलिस तो सिर्फ शोषण करती है और गरीबो का खून चूसती है, वो तो इंसान हैं ही नही। सी आर पी अफ, इंडियन आर्मी वाले तो सिर्फ आतंकवादी है।

आतंकवादी तो होते ही नहीं, ये तो डरे हुए लोग हैं, जो इंडियन गवर्नमेंट की बदसलूकी से हथियार उठा लेते हैं, ये तो टीचर या गरीब के बेटे होते हैं, दसवीं पास टीचर और अनपड हो कर भी इंजीनियर होते हैं, शांतिप्रिय होते हैं, उनके लिए न्यायालय भी रात को तीन खुलने लगे। पचास सालो से इन्हे खाद और पानी दे रहे एन जी ओ, भी अब रो रहे है, इन्होने बताया की भारत में सिर्फ गरीबी ही है और सिर्फ जीसस ही भगवान हैं, अब इनका धंधा, मंदा हो कर बंद होने को आया है, वो आज मोदी जी को गाली दे देकर अपना बुरिया बिस्तर बांध रहे है। दुनिया के सारे प्रोपेगंडा चैनेलो हमारे देश की धज्जिया उड़ाते रहे। आज इनकी भी दुकान बंद हो रही हैं, क्योकि अब हिन्दू भी इतिहास और पूर्वजो की गौरव गाथा पढ़ रहे हैं। इन सिकुलर ठेकेदार को अपना ट्रैक चेंज करना पड रहा है। कुछ की दुकाने बंद हो गयीं है, कुछ आई सी यूं में पड़े हैं, कुछ गिड़-गिड़ रहे हैं, और अभी भी मोदी जी को गली दे रहे हैं। कुछ ने तो, सिकुलरिस्म का चोंगा उतार के, मोदी जी की भक्ति भी शुरू कर दी है। कुछ सही रस्ते में आ गएँ है, डर के मरे। कुछ तो हम लोगो को भक्त बता रहे है। परन्तु, इन चमचो को ये बात समझ में नहीं आती की भक्त अपने भगवान को नहीं बदलता है, उसकी श्रद्धा अपरिवर्तनीय होती है, इन चमचो की तरह नहीं, जो अपने आका बदलते रहते है। बस, लार टपकाते रहते है, चंद पैसो के लिए।

अर्बन नक्सलाइड और सो कॉल्ड यूनिवर्सिटी छात्र और शिक्षक, जो छत्तीसगढ़ या की देश के किसी कोने में, सी आर पी अफ और आर्मी के जवानो के बलिदान पर, दीपावली मनाते थे,भारत देश और भारतीयता को गली देते थे वो आज या तो चुप होते जा रहे हैं, या जेल में है, या फिर छुप-छुप कर काम कर रहे है। सबसे ज्यादा दुखी तो वो लोग है जो मंदिर बनाने का दिन पूंछते थे, परन्तु अब चुप हो गएँ है।

अब आतें है उन लोगो पर जो आज खुश हैं, जिन्हे अपने पूर्वजो पर गर्व है, जिन्हे भारतीयता प्यारी है, जो इस गंगा-जमुनी तहजीब के जाल से बहार निकल आएं है या फिर निकलने की कोशिश कर रहे है। अर्णव , अमिश और सुधीर चौधरी जैसे लोग जो आज आजाद और निडर हो कर सिकुलरिस्म पर बाते कर रहे है , जिन्हे अब उन शांतिदूतो से डर नहीं लग रहे है। टीवी पर आप और हम आसमानी किताब पर डिस्कशन देख रहे है, और उनके सर, धड़ से अलग नहीं हुए है, दिन के उजाले में उनकी सुपारी नहीं दी जा रही है। जो की सपनो से काम नहीं है। आप अलीगढ यूनिवर्सिटी, जाधवपुर यूनिवर्सिटी, और जे ऍन यु यूनिवर्सिटीज की सच्चाई टी बी पर देख पा रहे हैं।

आज हम सो कॉल्ड सुपर स्टारों को उनकी औकात बता पा रहे है। आज हमारे जवान और नेता, चीन और पकिस्तान को उनकी भाषा में जबाब दे पा रहे है। हम ओप इंडिया में अपने विचार व्यक्त कर प् रहे है, किसी शांतिदूत हमें जहनुम नहीं भेजा। धारा ३७० हट गयी है। अब एक दलित भी वहां अधिकारी बन सकता है। हर-दिन शांतिदूतो को ७२ हूरे नसीब हो रही है, उनके भी अच्छे दिन आ गएँ है। अभी तक ३०० शांतिदूत, इस साल ७२ हूरो के पास भेज दिए गएँ है। हमारे आराध्य श्री राम को उनका जन्मस्थान भी मिल गया है। बैंक जो गरीबों को अंदर भी नहीं आने देते थे, आज खाता खोलने के लिए आतुर है। स्वच्छता के लिए हम जागरूक हो रहे हैं। फ्री ऐल पी जी सिलिंडर्स मिले है, गरीबो और गरीब मज़दूरों के पैसे उनके खातों में आ रहे है, उनकी आमदनी पर डांका डालना थोड़ा सा मुश्किल हो गया है, या फिर असंभव सा होता जा रहा है। डिजिटल लेनदेन बढ़ गया है, अब कैश लूटने वालो की भी परेशानियां बढ़ गयी है।

ऐसा कहना झूंठ होगा की सब कुछ ठीक हो गया है मोदी जी के आने के बाद। बहुत सारी आशाएं अभी भी पूरी नहीं हुयी है। परन्तु हमारा भी तो कुछ कर्तब्य है, हम आप को भी तो कुछ करना होगा, हमारी भी तो कोई जिम्मेदारी है। सब कुछ मोदी जी तो नहीं कर सकते हैं। सत्ता का नशा बड़े बड़े को सिकुलर बना देता है, मोदी जी न सही, उनकी मंत्रिपरिषद तो सिकुलर हो ही रही हैं। उनके लिए लव जिहाद तो हमारी आपकी कपोल कल्पना है। इन सिकुलर मिनिस्टरों की इतनी औकात नहीं की, सही हिस्ट्री तो पढाये। सही किया गया पावडेकर को हटा कर, जो गर्व से कहता था, की नेहरू जी की हिस्ट्री में तो मैंने, एक शब्द भी नहीं बदला है। हमें पहचानना होगा इन जैसे सियारो को जो शेर होने का ढोंग कर रहे है। मोदी जी के रास्ते में कांटे बो रहे हैं। आज देश की जरुरत योगी जी है, तिवराज जैसे करप्ट सरकार और हटटर जैसे सोने वाली सरकार नहीं चाहिए, इनका ख्याल भी हमें ही रखना होगा। मुझे नहीं पता क्या मज़बूरी थी मोदी जी की, जो सुरेश प्रभु जैसे रेलवे मिनिस्टर को हटा दिया। चालबाजों से प्रभावित हो कर, स्मृति ईरानी जैसे ऍमअच्आरडी मिनिस्टर को हटा देते है मोदी जी। जो की शिक्षा नीति को सही दिशा में ले जा रही थीं।

शायद डिग्री विवाद के कारण, परन्तु मोदी जी को भी याद रखना चाहिए, इससे पहले के शिक्षा मंत्रियों की योग्यताओं को। रेफेरेंस के लिए हमारे पहले शिक्षा मंत्री अब्दुल कलम आज़ाद साहब को ही याद कर लेना था, जिन्होंने कभी भी स्कूल और कॉलेज का मुँह भी नहीं देखा, उनकी सारी शिक्षा-दीक्षा मदरसों में हुई। इनका असली नाम सैय्यद गुलाम मोहियुद्दीन अहमद बिन खैरुद्दीन अल हुस्सैनी था, और मक्का, सऊदी अरबिया की पैदाइश थे। मै ये कतई नहीं कह रहा हूँ की वो इस पद के काबिल नहीं थे, ये आप डिसाइड करिये, ऐसे ही बहुत सारे महानुभाव लोग कई मिनिस्टर पद की शोभा बढ़ा चुके हैं। और हम यहाँ, इस्मृति ईरानी की डिग्री को ले कर रोते रहते थे, क्योकि हम अभी भी मानसिक तौर कहीं न कहीं बीमार है। ये दाऊद गैंग, सो कॉल्ड बॉलीवुड कब साफ सुथरा होगा, इसका भी पता नहीं। इसके लिए आपको मोदी जी की जरुरत नहीं हैं, आपको इन सो कॉल्ड अथीस्ट, जो सबसे बड़े आतंकवादी हैं, उनकी मूवीज और सीरीज का बायकाट करना होगा। यदि हम इतना भी नहीं कर सकते हैं, तो हमें चुपचाप सो जाना चाहिए और अपनी नपुंसकता के लिए मोदी जी को दोष नहीं देना चाहिए, क्योकि उसका कोई इलाज़ नहीं हैं। हर मर्ज की दवा मोदी जी नहीं हो सकते। आपको विदेशी कंपनियों के उत्पादों का वहिष्कार करना होगा, इसके लिए मोदी जी के बैन लगाने का इंतज़ार न करिये, ये काम हम आप भी मिल कर सकते हैं।

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