Wednesday, February 1, 2023
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सावधान: सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर छात्र-छात्राओं को किया जा रहा गुमराह!

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हमारा देश एक बड़ी जनसँख्या वाला देश है जहा लगभग 35% आबादी युवाओं की है। पिछले कुछ दशकों में इस देश के युवाओं ने हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है और आज भारत दुनिया भर में अपने प्रौद्योगिकी का लोहा मनवा चुका है। देश में लगातार हो रहे सुधारों ने देश को एक नईं दिशा दी है जिससे बच्चे लगातार उच्च शिक्षा के प्रति आकर्षित हो रहे है। इन तमाम सकारात्मक प्रयासों के बिच अभी भी कई ऐसे लोग है जो शिक्षा व्यवस्था को एक पेशे से ज्यादा कुछ नहीं मानते जिससे तमाम प्रयासों को झटका लग रहा है।

जैसा की आप सभी को ज्ञात होगा देश में 10वीं और 12वीं पास करने के बाद बड़े संख्या में छात्र उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेते है और एक जटिल प्रक्रिया से गुजरते है। ऐसे कम ही छात्र या छात्राओं को काउंसलिंग के जरिये देश के प्रतिष्ठित संस्थाओ में दाखिला मिल पाता है जहाँ वह बिना खोज खबर के अपना दाखिला करा सकें। इससे बचे हुए सभी छात्रों को उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने के लिए जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है वह इस प्रक्रिया से गुजरा हुआ कोई छात्र ही बता सकता है। घर में माँ-पिता जी से लेकर भाई-बहन सभी अच्छे संस्थाओं की खोज में अपने सभी जानकार सगे सम्बन्धियों से पूछताछ करते, राय-मशवरा लेते।

जब बात इससे भी ना बनती तब वह इन्टरनेट पर उपलब्ध जानकारियों को इस्तेमाल में लाते। मगर मान लीजिये की अगर इन्टरनेट पर उपलब्ध जानकारियाँ गलत हो या संस्थाओं से प्रेरित हो तब तो आपका ऐसे संस्थाओं के जाल में फसना निश्चित है और इसका एहसास आपको जब होगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। जब सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, लिंक्ड-इन, आदि का इस्तेमाल सभी के जीवन में आम हो चुका है तब डिजिटल मार्केटिंग के जरिये आप बच्चों तक भ्रामक तथ्य पंहुचा कर उन्हें आसानी से अपने झांसे में कर सकते है। ऐसे में उन सभी लोगो का कर्तव्य बनता है जो उस संस्था से जुड़े हो या वह चीजों को अच्छे तरीके से जानते हो, की सच को बहार लाये जिससे आने वाले छात्र-छात्राओं को सही और गलत जानने और चुनने का मौका मिल सके।

मामला जनपद गाजियाबाद स्तिथ ए.बी.इ.यस. इंजीनियरिंग कॉलेज का है जो डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनिकी विश्वविद्यालय, लखनऊ से संबधित है। दरसल कुछ दिनों पहले संस्था के अधिकृत सोशल मीडिया साइट्स पर आगामी शैक्षणिक सत्र में प्रवेश हेतु जानकारी दी गई थी। जिसपर संस्था के कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के अंतिम वर्ष के छात्र अखण्डप्रताप सिंह ने संस्था द्वारा छुपाये गए तथ्यों का जिक्र करते हुए लिखा था की किस प्रकार से संस्थान में अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद अंको के आधार पर छात्र-छात्राओं के बिच भेद-भाव होता है और स्पष्ट नीतियों के आभाव में शिक्षकों द्वारा अटेंडेंस के नाम पर बच्चों का शोषण होता है। बच्चे द्वारा किये गए इस कमेंट को संस्था द्वारा कई बार डिलीट किया गया पर बार-बार कमेंट करने पर कॉलेज द्वारा बच्चे के अकाउंट को ब्लाक कर कमेंट को डिलीट कर दिया गया जिससे सच को छुपाया जा सके। मामला सामने आने पर संस्थान के बच्चों के एक समूह द्वारा इंस्टाग्राम पर लिखा गया की आप कमेंट तो डिलीट कर सकते है पर सच्चाई को कैसे छुपा सकते है ?

गौरतलब है की वर्ष 2018 के जनवरी महीने में प्रोफेसर अजित शुक्ला के नेतृत्व में कॉलेज द्वारा “मिशन फॉर एक्सीलेंस (MFE)” डिपार्टमेंट का गठन किया गया जो गैरकानूनी था और UGC या AICTE के मनकों के विरुद्ध था। इस डिपार्टमेंट में  सभी डिपार्टमेंट के करीब 60-60 छात्र-छात्रओं को सम्मलित किया गया। इनका चयन इनके पिछले अंकों के आधार पर किया गया था और इन्हें अन्य बच्चों से अलग कक्षाओं में पढाया जाता था जिसका नाम “Section-X” रखा गया था। इन बच्चों को कई नईं प्रकार की तकनिकी के बारे में पढाया जाता था और विश्वविद्यालय और AICTE द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को धता बताते हुए, बिना कोर्स वर्क पूरा किये पुरे अंक दिए जाते थे। इन बच्चों को कम समय के लिए कॉलेज आना पड़ता था। जब “गैर मिशन फॉर एक्सीलेंस (Non-MFE)” के बच्चों को इस भेदभाव के बारे में पता चला तब उन्होंने कई बार शिकायतें की पर हर बार उन्हें डरा-धमका कर चुप करा दिया जाता और उनका रिजल्ट रोकने, एक साल बैक लगा देने जैसी बातें कही जाती।

इस सम्बन्ध में कॉलेज के निदेशक के साथ साथ विश्वविद्यालय से भी कई बार शिकायत की गई है पर उन्होंने कभी भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इस मामले की शिकायत माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश सरकार की जनसुनवाई पोर्टल, भारत सरकार की CPGRAMS सेवा, AICTE जैसे पोर्टलों पर भी की गई लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। विश्वविद्यालय और कॉलेज द्वारा हर बार गलत आख्या लगा कर शिकायत को बंद कर दिया जाता। इसी मामले को कमेन्ट द्वारा नए सत्र में प्रवेश लेने वाले इछुक छात्रों के बिच लेन हेतु इंस्टाग्राम पर कमेन्ट किया गया था।

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