Thursday, January 28, 2021

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Uttar Pradesh

फेक न्यूज़ के आसरे अब कांग्रेस

उ.प्र.विधानसभा चुनाव को ज्यादा समय नहीं बचा है। इसलिए कांग्रेस का गाय के प्रति स्नेह और समर्पण बढ़ना स्वाभाविक हैं। क्योंकि उ.प्र.में कांग्रेस के पास वाड्राईन के अलावा मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी नहीं है।

Police reform: Need of the hour

police have become the ‘subjects’ of Parliamentarians and legislators – with a high degree of politicization and allegiance towards ruling party. India still follows the Police Act, 1861, framed by the British, largely with an aim to crush dissent.

उत्तर प्रदेश भगवा-गढ़ बना रहेगा

2012 में मुलायम ने चुनाव जीतकर अखिलेश को मुख्यमंत्री पद दे दिया था। उसके बाद धुआंधार तरीके से बैक-टू-बैक तीन चुनाव अखिलेश ने अकेले दम पर हारे हैं। ये अलग बात है कि इस बात का कभी घमंड नहीं किया।

सावधान: सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर छात्र-छात्राओं को किया जा रहा गुमराह!

अगर इन्टरनेट पर उपलब्ध जानकारियाँ गलत हो या संस्थाओं से प्रेरित हो तब तो आपका ऐसे संस्थाओं के जाल में फसना निश्चित है और इसका एहसास आपको जब होगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

मॉडल पर चर्चा!

अन सेक्युलर मॉडल। (by @ambujkmrjha)

When the selfish royals throw their people to the wolves

The story which is emerging even before election results, is that the good-for-nothing royals have abandoned their troops in the middle of the battlefield to save themselves.

Should it not be Yogi’s choice to wear or not wear a skull cap?

liberals obsession with the word ‘Secularism’ makes them use it so loosely that it's become one of the most hated words amongst Indians

Yogi govt is working smartly to eliminate the monster of Japanese Encephalitis from UP

Encephalitis is a life threatening disease causing acute inflammation of the brain.

BSP opportunism let-down Late Brahm Dutt Dwivedi, the man who saved Mayawati

Politics is notoriously recognised for making “impossible possible” and turn a foe into an ally.

Latest News

Interesting “Tandav” challenges the conventional entertainment in India

Tandav actually challenges the way conventional entertainment has been in India not only for years but for decades now. It's a good story if a right wing student leader is corrupt and greedy but it is not a good story if the left leaning student leader does the same thing.

११वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस आज, अब ई-मतदाता पहचान पत्र कर सकेंगे डाऊनलोड

आज राष्ट्र ग्यारहवाँ राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है, यह दिवस वर्ष १९५० में आज ही के दिन, चुनाव आयोग की स्थापना के उपलक्ष्य में वर्ष २०११ से मनाया जा रहा है।

The bar of being at “The Bar”

The present structure of the Indian judicial system is a continuation of what was left to us by the colonial rulers.

Partition of India and Netaji

Had all Indians taken arms against British and supported Azad Hind Fauz of Netaji from within India in 1942 instead of allowing the Congress to launch non-violent ‘Quite India Movement’ of Gandhi, the history of sub-continent would have been different.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष: हर भारतीयों के लिए पराक्रम के प्रतीक

भारत माता के सपूत के स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को केंद्र सरकार ने हर साल पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।

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गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.

The reality of Akbar that our history textbooks don’t teach!

Akbar had over 5,000 wives in his harems, and was regularly asked by his Sunni court officials to limit the number of his wives to 4, due to it being prescribed by the Quran. Miffed with the regular criticism of him violating the Quran, he founded the religion Din-e-illahi

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था के मध्य अंतर और हमारे इतिहास के साथ किया गया खिलवाड़

वास्तव में सनातन में जिस वर्ण व्यवस्था की परिकल्पना की गई उसी वर्ण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके समाज में जाति व्यवस्था को स्थापित कर दिया गया। समस्या यह है कि आज वर्ण और जाति को एक समान माना जाता है जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।