Thursday, April 22, 2021
18 Articles by

pranay

शिवाजी और उनका लोकाभिमुख शासन-तंत्र

शिवाजी महाराज की शासन-व्यवस्था लोकाभिमुख थी। वे एक निरंकुश शासक की बजाय लोककल्याणकारी शासक के रूप में हमारे सामने आते हैं। ए

समय एवं समाज की चेतना को झंकृत करने वाले- छत्रपति शिवाजी

शिवाजी का उदय केवल एक व्यक्ति का उदय मात्र नहीं था, बल्कि वह जातियों के उत्साह और पुरुषार्थ का उदय था, गौरव और स्वाभिमान का उदय था, स्वराज, सुराज, स्वधर्म व सुशासन का उदय था और इन सबसे अधिक वह आदर्श राजा के जीवंत और मूर्त्तिमान प्रेरणा-पुरुष का उदय था।

संघ विचार-परिवार के वैचारिक अधिष्ठान की नींव- श्री गुरूजी

संघ विचार-परिवार जिस सुदृढ़ वैचारिक अधिष्ठान पर खड़ा है उसके मूल में माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी के विचार ही बीज रूप में विद्यमान हैं। संघ का स्थूल-शरीरिक ढाँचा यदि डॉक्टर हेडगेवार की देन है तो उसकी आत्मा उसके द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी के द्वारा रची-गढ़ी गई है।

यह पाखंड बंद करो मोमिनों-बुर्कापरस्तों! प्रभु श्रीराम भी हमारे और माँ दुर्गा भी हमारीं!

शुतुरमुर्गी सोच आत्मघाती होगी, आँखें खोलकर देखिए आपके आस-पड़ोस में रोज एक 'रिंकु' मारा जा रहा है, रोज एक 'निकिता' तबाह की जा रही है, रोज एक 'नारंग' 'ध्रुव तिवारी' इनकी जिहादी-ज़ुनूनी-मज़हबी हिंसा का शिकार हो रहा है।

कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीरियत और जम्हूरियत दोनों अधूरी है

कश्मीरी अवाम ने विगत 17 महीनों में जिस शांति, सद्भाव, सहयोग, समझदारी, परिपक्वता एवं लोकतांत्रिक भागीदारी का परिचय दिया है, दरअसल उसे ही भारत के लोकप्रिय एवं यशस्वी प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटलबिहारी बाजपेयी ने कश्मीरियत, जम्हूरियत, इंसानियत का नाम दिया था और यह निर्विवाद एवं अटल-सत्य है कि कश्मीरी पंडितों एवं ग़ैर मज़हबी लोगों को साथ लिए बिना वह कश्मीरियत-जम्हूरियत-इंसानियत आधी-अधूरी है।

दिल्ली में किसानों के वेश में गुंडों-दंगाइयों-आतंकियों का हिंसक प्रदर्शन

गणतंत्र-दिवस के दिन इन्होंने अपनी काली करतूतों से समस्त देशवासियों का सिर पूरी दुनिया में झुका दिया है। इतिहास इन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा।

दूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के साँपों को!

यदि सरकार ने अब भी इन गुंडों-दंगाइयों-आतंकियों के साथ नरमी बरती तो अगले चुनाव में उसे भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। इन गुंडों-दंगाइयों-आतंकियों से निपटने के लिए अब देशभक्त नागरिकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

लोकतंत्र में हिंसा एवं अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं

लोकतंत्र में हिंसा एवं अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं- लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहन आस्था, विकास एवं सुधार को राजनीति की केंद्रीय धुरी...

महापुरुषों के जीवन-निकष पर हम कितना खरा उतर पाए हैं?

संपूर्ण विश्व में न्याय, समानता एवं स्वतंत्रता के पैरोकार एवं प्रशंसक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरणा ग्रहण करते हैं और करते रहेंगें। उनकी प्रतिभा एवं देशभक्ति, जीवटता एवं संघर्षशीलता, साहस एवं स्वाभिमान, स्वानुशासन एवं आत्मविश्वास, संगठन एवं नेतृत्व-कौशल, ध्येय एवं समर्पण सहसा विस्मित करने वाला है।

खालसा पंथ की सिरजना के पीछे का ध्येय और गुरु गोबिंद सिंह जी

गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा पंथ और उनकी बलिदानी परंपरा के महात्म्य को समझने के लिए हमें तत्कालीन धार्मिक-सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों पर विचार करना होगा।

Latest News

Recently Popular