Monday, November 28, 2022
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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर इतना हंगामा क्यों?

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RAJEEV GUPTA
RAJEEV GUPTAhttp://www.carajeevgupta.blogspot.in
Chartered Accountant,Blogger,Writer and Political Analyst. Author of the Book- इस दशक के नेता : नरेंद्र मोदी.

मालेगाव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2008 में फंसाया था और कांग्रेस सरकार और इसके नेताओं के इशारे पर प्रज्ञा ठाकुर को NIA ने हिरासत में लेकर लगभग 5 सालों तक घोर यातनाएं देकर उनका उत्पीड़न किया. साध्वी प्रज्ञा एक टेलीविज़न चैनल को दिए गए इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा कर चुकी है कि कांग्रेस नेताओं के कहने पर NIA में हेमंत करकरे समेत कई पुरुष उसे निर्वस्त्र करके उल्टा लटका देते थे और लगातार पिटाई करते हुए इस बात के लिए दबाव डालते थे कि प्रज्ञा इस बात को कबूल कर ले कि इस मामले में उसका हाथ है और उसने यह ब्लास्ट आर.एस.एस प्रमुख मोहन भागवत के कहने पर अंजाम दिया है. लगातार 5 सालों तक (जब तक कांग्रेस की सरकार सत्ता में बनी रही) प्रज्ञा ने लगातार कांग्रेस सरकार के नेताओं की इस दरिंदगी को चुपचाप झेला लेकिन उनकी बनाई गयी मनगढंत “हिन्दू आतंकवाद” की कहानी में किसी तरह का सहयोग नहीं किया.

2014 में जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हुईं और केंद्र में मोदी सरकार ने कार्यभार संभाला तो NIA ने खुद ही कबूल कर लिया कि वह कांग्रेस के नेताओं के कहने पर साध्वी प्रज्ञा को जबरन फंसाने की कोशिश कर रहे थे और क्योंकि उनके पास उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं था, इसलिए वह उसको गंभीर यातनाएं देकर उससे यह “कबूलनामा” प्राप्त करना चाहते थे जिसको आधार बनाकर वह कांग्रेस की “हिन्दू आतंकवाद” की कहानी को आगे बढ़ा सकें. 2017 में जब प्रज्ञा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया तो कोर्ट ने भी NIA से यही बात पूछी और वहां NIA ने कोर्ट को यही बताया कि उनके पास प्रज्ञा के खिलाफ इस मामले में लिप्त होने के कोई भी सुबूत मौजूद नहीं हैं. जब हाई कोर्ट को भी इस बात की पूरी तसल्ली हो गयी कि प्रज्ञा ठाकुर को कांग्रेसियों ने बेवजह ही गलत तरीके से फंसाया था और उसके खिलाफ किसी सरकारी एजेंसी के पास कोई भी सुबूत नहीं है, तो उसने प्रज्ञा को जमानत पर रिहा करने में कोई भी देर नहीं लगाई.

अब इस बात पर आते हैं कि प्रज्ञा ठाकुर के भोपाल से कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने पर कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष इतना क्यों बौखलाया हुआ है. पहली बात तो यह है कि “हिन्दू आतंकवाद” की काल्पनिक कहानी का सूत्रधार दिग्विजय सिंह को ही कहा जा सकता है -जब मुंबई में 26/11 का आतंकी हमला हुआ था, उस समय भी सभी आतंकियों के हाथों में “कलावा” बंधा पाया गया था और अगर उस समय गलती से कसाब को जिन्दा नहीं पकड़ा गया होता (उसके हाथ में भी कलावा बंधा हुआ था), तो दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने इस हमले के लिए भी RSS को जिम्मेदार बताकर “हिन्दू आतंकवाद” की कहानी को और पुख्ता करने की पूरी तैयारी कर रखी थी. दिग्विजय सिंह ने तो बाकायदा एक समारोह करके एक किताब जिसका शीर्षक था- “26/11-मुंबई आतंकी हमला-RSS की साज़िश” का विमोचन भी कर दिया था.

अब कांग्रेस और उसके सहयोगी विपक्षी दलों को यह डर सता रहा है कि प्रज्ञा के चुनाव मैदान में कूदने से इस सारी साज़िश का ऐन चुनावी मौसम में खुलासा होना उसे बहुत मंहगा पड़ सकता है क्योंकि प्रज्ञा ने चुनाव लड़ने से पहले ही यह कह दिया है कि वह इस साज़िश के सूत्रधार दिग्विजय सिंह को चुनावों में हराकर देश के सामने कांग्रेस के इस घिनौने षड्यंत्र का पर्दाफाश करना चाहती हैं. विपक्षी दलों में और खासकर कांग्रेस में प्रज्ञा के चुनाव लड़ने को लेकर जो हाहाकार मचा हुआ है, उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए कि हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए कांग्रेसियों ने एक फर्ज़ीवाड़े के तहत एक निर्दोष साध्वी को न सिर्फ गिरफ्तार किया बल्कि उसे पांच सालों तक घोर अमानवीय यातनाएं भी दिलवायीं. अगर प्रज्ञा चुनाव नहीं लड़ती तो शायद मैंने भी यह लेख नहीं लिखा होता और जितनी जानकारी इसमें दी गयी है, वह सब लोगों तक नहीं पहुँच पाती.

इसी तरह अब और लोग भी इन बातों को सामने लेकर आ रहे हैं. कांग्रेस को प्रज्ञा के चुनाव लड़ने पर ऐतराज़ नहीं है, उसे खौफ अब इस बात का है कि अब उसकी सभी साज़िशों का पर्दाफाश होने वाला है. इस खुलासे के बाद जनता कांग्रेस की क्या हालत करेगी, उसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है.

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