Wednesday, March 3, 2021
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मेरे चश्मे से ‘ऐसा’ RAMJAS दिखता है!

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  • विवाद की शुरुआत होती है placard पर ABVP लिखकर ट्विटर पर चस्पाने से.
  • सोशल प्लेटफार्म जो किसी भी तरह के विचारों के लिए एक आज़ाद मंच है-ऐसे मंच पर यह placard डाला गया.
  • #ABVP का सीधा-सीधा नाम लिया गया था लेकिन Miss.’G’ के समर्थक ABVP को ओवरटेक करते हुए सीधा कूदे BJP-RSS पर.

FoE की आड़ में शुरू हुआ वैचारिक कोहराम यहीं से राजनीतिक हो गया. छात्र राजनीति को औजार बना कर सरकार पर हल्ला-बोल शुरू हुआ. इसपर प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक था. अबतक Miss.’G’ के वामपंथी लगाव और AAP-सम्बन्ध से भी लोग परिचित हो गए थे. उसके हाथ में पकड़े ABVP के placard को लोगों ने कैनवस की तरह इस्तेमाल किया और अपने-अपने पसंद के रंग भरने लगे. एक दूसरे पर राजनीतिक तंज़ कसे जाने लगे.

सभी अपनी-अपनी योग्यता के अनुसार किस्से गढ़ कर साझा कर रहे थे, बहस का माहौल काफी व्यंग्यात्मक था- कुछ तीर पैने थे तो कुछ गुदगुदाने वाले. इसी दौरान किसी ने ‘Pak’ वाला placard भी सर्कुलेट कर दिया. ABVP के placard पर कलाकारी का जो सिलसिला शुरू हुआ था उसी धारा में ‘Pak’ वाला placard भी गोते लगाने लगा. इसी मज़ाकिया माहौल में सहवाग-हुड्डा ने भी अपना एक ‘placard’ ट्वीट कर दिया, मतलब अब सेलेब्रिटीज़ भी अपने FoE का ईस्तमाल कर रहे थे, दोनों तरफ से ट्वीट्स का हमला हो रहा था चूँकि एक खेमे के पास ‘placard’ वाली तस्वीर थी इसलिए अभिव्यकि का मौका ज़्यादा इन्हें मिला.

याद रहे के अभी तक सिर्फ राजनीतिक दल और अन्य मुद्दे ही चर्चा का विषय थे .

(Miss.’G’ अब तक FOE की एम्बेसडर बन चुकी थी-वो भी ट्वीट के जवाब में ट्वीट्स के तीर चला रही थी)

ट्विटर का मिजाज़ बदला लिबरल-पत्रकार S.G. (ndtv) ने सहवाग को एक सीरियस ट्वीट करके कठघरे में खड़ा कर दिया (“Very sad, 20 year, martyr’s daughter, FoE, girl, rape threat”) ऐसा करके उसने बहस को अपने रंग में रंग दिया था. RW वाले जो अब तक कार्ड-कार्ड खेल कर मज़े ले रहे थे, उनको बैकफुट पर धकेल दिया गया. अब बारी थी LW की जिनके पास अब अपना एक दमदार नैरेटिव था-martyr’s daughter.

RW को वक़्त लगा इस शहीद वाले एंगल को काउंटर करने में. अभी तक तो सब विपक्षी दलों के समर्थकों को ट्रोल कर रहे थे पर अब अचानक बहस का रुख़ बदल दिया गया था. LW के धुरंधर भी कमान संभाल चुके थे फिर तो क्या धर्म-जात-मानसिकता-मर्डरर-अनपड़-ग्वार-ज़ाहिल-औकात, Hooda की माँ से Hooda की को-स्टार्स तक को नहीं बख्शा गया!

अब एक छोर से गालियां तो दूसरे छोर से शहीद की बेटी वाली ढाल!

देश के शहीद की बात थी, पीछे हटना ही था.

तब यह फैसला हुआ कि Miss.’G’ को ही सीन से हटाया जाए. यह लोग उसको सपोर्ट करने की आड़ में सबकी औकात नाप रहे हैं. लेकिन Miss.’G’ हटने को तैयार नहीं थी, ना तो tweets-posts से और ना ही tv debates से! वो ठान चुकी थी जब तक फोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं!

(Miss.’G’ ने इस बीच टीवी बाइट्स, और इंटरव्यू भी दे डाले असहिष्णुता का जिन भी बहार आ चूका था, न्यूज़ चैनेल्स पर Intolerance की बहस एकबार फिर छिड़ गयी और एकबार “फिर” डिबेट के लिए पुराने तजरबाकार खिलाडियों को स्टूडियोज़ में बुला लिया गया)

यहाँ  ट्विटर पर गोलपोस्ट चेंज करने की तैयारियां चल रही थी- यानी plan B

उनसे Sehwag-Hooda को अपमानित करने का जवाब माँगा जाए. हम आपस में ही एक-दूसरे की छिछालेदर करते रहते. हमारा कख ना घिसना था!? कुछ मुट्ठी भर लोगों में ही हमारी जान-पहचान का दायरा सिमट जाता है परिवार-पड़ोसी-दोस्त-रिश्तेदार. अब कल तक Miss.’G’ भी तो हम में से ही एक थी, AAP का आशिर्वाद और LW का साथ मिलने से BLUE TICK भी मिल गया, आम से ख़ास हो गईं, उस मुल्क की ज़ीशान हो गईं!

पर आपको तो सुकून मिलना था उनको ज़लील करने से जिनको दुनिया जानती हो.

सफलता तो उसी में है जब दुनिया भर के newspaper/channels की हेडलाइंस ऐसी हों

  • INDIAN actor BULLY a 20yr old girl.
  • INDIAN Cricketer Virender Sehwaag mocks girl for supporting Muslim student’s right to free speech-fall from grace!
  • BJP threatens “Indian” girl with “RAPE” for posting “Pro-Pakistan” messages.

(GeoEnglish, The Express Tribune)

हम अपने शहीद के बलिदानों को नमन करते हैं और देश के गौरव का सत्कार भी. इनके हिस्से का भी तो होगा कुछ FoE!?

Miss.’G’ ने placard के सहारे ABVP पर अपना विचार रखा, तो इन्होंने उसी placard का प्रयोग अपनी अभिव्यक्ति के लिए किया. वो कहां जानते थे के आगे चलकर इस नौटंकी का प्लॉट इमोशनल करवट लेगा जहाँ इनके placard कहानी के साथ नहीं बल्कि विपरीत रख कर सजा दिए जायेंगे!

(Miss.’G’ अपडेट:-NDTV studios-DCW-AAP के दफ्तर से अपनों का आशिर्वाद लेते हुए जालंधर! और वहीँ दूसरी और सरकार के मंत्री अपने और अपने दल के दूसरे नेताओं के बयानों की सफाई में लगे थे)

इस बीच वीडियो आया 21feb का. काफी कुछ ऐसा और भी आया जिसको लेकर LW को कटघरे में खड़ा किया जा सकता था लेकिन किसी A-जर्नलिस्ट ने कहानी का यह सिरा पकड़ा ही नहीं पर LW ने पकड़ा—->फोगाट सिस्टर्स को—- वो तो अपने हरियाणा की छवि खराब होता देख-अनजाने में ही इस ट्रोल के निशाने पर आ गई. कुश्ती के खिलाड़ियों को राजनीतिक अखाड़े में खींच लिया गया. अच्छे-अच्छों को अपने दावों से चित करने वाले इन खिलाड़ियों को अनपड़-गवार-जाहिल सरीके तमगों से नवाज़ा गया. खिलाड़ी हो या कलाकार-आमआदमी या पत्रकार- सबको उनके ट्वीट्स के हिसाब से खेमों में बाटा जाने लगा.

ट्विटर पे एक तरफ ये सब चल रहा था दूसरी तरफ “सड़क” पर एक अलग ही तरह की सियासत आकार ले रही थी.

आईए उतरें सड़कों पर

Day 1

  • Umar khalid को invitation,
  • ABVP का Objection,
  • Prog. Cancellation,
  • AISA-SFI का frustration

Day 2

  • ABVP का चूँकि मुद्दा Umar Kahalid को दिया गया निमंत्रण था, जीत तो मिलनी ही थी. दुश्मनों जैसी सोच रखने वालों को सरहद में घुसने से रोक पाने की सफलता ने देशभक्ति का जोश भर दिया. जीत यह भी के JNU में तो तमाशा करते ही हैं पर हमारा कैंपस JNU के ज़हर से बच गया.  तिरंगा मार्च निकाला गया
  • उधर ख़लबली थी LW के खेमे में. अब ज़रूरी था ब्रांड न्यू लेकिन सॉलिड टॉपिक. FOE का मुद्दा फाइनल हुआ. चूँकि देशभक्ति की बराबरी करनी थी तो कुछ सामन भी जुटाना था. तिरंगा+नए स्लोगन्स+placards+पोस्टर्स और मेन अट्रैक्शन में लीडर्स को बुलाना तय हुआ.

Day 3

  • सब कुछ तय समय पे और प्लान के मुताबिक़ हो रहा था. अपने कैमरा वालों को उनकी पोजीशन दे दी गई थी, चारों लीड स्पीकर्स की स्पीच भी रेडी थी, पार्टी का मीडिया भी तैनात था, पार्टी लीडर्स के आने का कन्फर्मेशन भी आ चुका था.
  • LW को इतने बढ़िया प्लान के साथ तैयार देख NSUI को लेफ्ट-आउट होने का ख़तरा दिखा. चूँकि टाईम कम बचा था तो उन्होंने छोटे कार्यक्रम *अनशन* के प्लान के साथ अपना एजेंडा भी सेट कर लिया.
  • मार्च और अनशन शुरू हुआ
  • मीडिया पे प्राइम-टाइम स्लॉट lined-up था-ट्विटर पर बहस चालू थी-लिबरल मीडिया के रिपोर्टर्स भी अपनी पार्टी की मदद करने के लिए ऐसे-ऐसे नेताओं को खोज रहे थे-साक्षी महाराज-गिरिराज सिंह-अनिल विज जिनसे काम की बाइट मिल जाए ताकि मैदान में खड़े सिपाहियों तक असला पहुँचता रहे.
  • विरोधी खेमे का मीडिया तंत्र भी बढ़िया काम कर रहा था. ना तो tv channels ABVP को बुला रहे थे और BJP प्रवक्ता BJP सहित RSS-ABVP की ओर आते तीर भी झेल रहे थे. ट्विटर की बहस भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही थी. एकतरफा नैरेटिव से ही कहानी हिट हो चुकी थी.

Day 4

HOPE

  • थोड़ी उम्मीद उस समय नज़र आई जब किसी एक चैनल ने “रामजस~आज़ादी” विडियो आखिरकार दिखाया. कहानी में पिरोए गए सभी किरदारों को गढ़ने वालों के बारे में भी दबी-जुबां में ही सही पर चर्चा होने लगी. शाम होते-होते Umar Khalid पर लगे charges साबित होने की ख़बर भी आई.
  • कुछेक channels ने तो ABVP को बोलने का मौका भी दिया.
  • ABVP कहिन
  • हमारा विरोध तो Umar को बुलाने पर था. विरोध दर्ज कराया और prog. रद्द  भी हो गया.
  • अब अगले दिन यह अपने ढोल-डफली-डंडे-गाने-नारों के साथ पोस्टर उठाये इस बात के लिए आ धमके के Umar का कार्यक्रम रद्द क्यों किया गया?
  • इनके ताम-झाम को देखकर रामजस स्टूडेंट्स ने सोचा DUSU वालों को बुला लेते हैं कहीं सिचुएशन हाथ से ना निकल जाए, DUSU वालों ने हमें बुला लिया.  ABVP तो वहां पहुँचने वालों में से चौथे नंबर पर थी.
  • यह AISa-SFI वाले कैमरा टीम के साथ मानो हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे. हमने तय कर लिया था इनसे भिड़ना नहीं है बस इनको कैंपस में नहीं आने देना है-रास्ता रोक लेते हैं. रास्ता ब्लॉक किया तो यह धकेलने लगे. हमारी ओर से भी धक्का मुक्की हुई. इन्होंने आज़ादी और खाक़ी-चड्डी वाले नारे लगा कर उकसाना शुरू कर दिया.  फिर तो माहौल एकदम ही बदल गया. दोनों पक्ष आपस में भीड़ गए. स्टूडेंट्स की संख्या के हिसाब से पुलिस कम थी. उन्होंने लाठियां चला दी. हम सबको पड़ी-मतलब जो उनके डंडे की जद्द में आया-उसको पड़ा.
  • हमपे यह तमाशा थोपा गया! Placard पे हमारा नाम लिख कर सोशल मीडिया पे चमका दिया मतलब बिना जांच-सबूत के सीधा मुज़रिम करार? डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स की तरह. बाद में ये लोग अपनी शिकायतों के पिटारे के साथ पुलिस स्टेशन के बजाए न्यूज़ स्टूडियोज़ और DCW के गेड़े लगाते रहे. केस दर्ज तो थाने में ही होता!?  फिर इनके नेता उठ कर आ गये. अपने राजनीतिक फायदे के लिए पुरे देश के स्टूडेंट्स आपस में लड़वा दिए और हमें 5 दिन तक कोसा सो अलग. इनको तो अपना एनुअल फंक्शन सेलिब्रेट करना था. पुरे ताम-झाम लेकर यह तो आए ही बवाल मचाने थे-सो मचा दिया.

पूरा खेल चारों तरफ से राजनीतिक बू मार रहा है. आगे-पीछे-ज़ाहिर-छुपे सभी लोग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हैं! अब आप कबूत्तर बनना चाह रहे हो तो बात और है. पूरा मीडिया तंत्र इनको मंच देने की होड़ में लग जाता है. हमें मौका मिलता मीडिया ट्रायल पूरा होने के बाद, मानो जज अपना फैसला सुनाने से पहले पूछ रहा हो “आपको कुछ कहना है?”

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