Saturday, June 25, 2022

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Decoding ‘godi media’

Notwithstanding these facts, if Yashwant Sinha does not understand who is ‘godi media’ and who is lying thousand times despite his faith that ‘truth has a bad habit of prevailing over falsehood ultimately’, there is none in this living world to teach the IAS-turn-politician octogenarian.

टिक टॉक और रेबीज़ कुमार का दर्द

शुरुआत मोदी सरकार कुछ नहीं बोली लेकिन जब इसका फायदा सीधे तौर पर माइनॉरिटी पीपल अर्थात पंचरवालों को मिलने लगा जिससे भाजपा और संघ परेशान थी और समय -समय पर टिक टोक को बैन करने की साजिश रचने लगे जिसमें एक साजिश #Youtube_Vs_TikTok भी थी।

Media bias & fake news in India: The origins

The world has seen violence induced due to mindless media reports and so has India.

आबादी: समस्या या बहाना?

जब सीमित संसाधनों वाले भारत देश को विकास की तरफ ले जाना था, तो जहां इंदिरा गांधी ने 'हम दो हमारे दो' की बात की, जिससे आबादी की बढ़ोत्तरी में कमी आए, तब उत्तर भारत के वामपंथी सोच के तथाकथित सोशलिस्ट नेता अपने-अपने वोट-बैंक के लिए 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी (संसाधन लेने में, टैक्स भरने में नहीं)' का राग अलाप रहे थे।

अदना सा पत्रकार: हें हें हें

शाम आठ बजे और कुछ टीआरपी जैसे समाजवादी कारणों से अब नौ बजे, प्राइमटाइम में अधोमुखी मेरूरज्जु से निहुरा हुआ एक अदना सा पत्रकार...

Why Ravish Kumar is more dangerous than other contemporary news anchors

Anchors like Ravish Kumar who declare themselves neutral and inert to any political influence are the most dangerous ones because they can camouflage their political narratives as news by decorating it with false but sensational information, relatable characters and conventional ‘Governments don’t care about poor’ sentiments.

Challenge of Covid-19 pandemic: The Buck will finally stop at the Centre’s doors

It is time to put its slogan 'sabka sath sabka vikas sabka viswas' to serious introspection. In the practical world, a leader, however great, can only work for the 'good' and 'vikas of all'.

रवीश जेल क्यूँ जाना चाहते हैं?

रवीश का प्राइम टाइम के दर्शक एकदम मूर्ख होते हैं. वो प्राइमटाइम पहले टीवी पर देखते हैं. फिर यूट्यूब पर इसके बावजूद, जब भी किसी भक्त से भिडंत होती है तो हर बार उन्हें धोबिया पछाड़ का सामना करना पड़ता है.

रविश कुमार- 19 साल की लड़की ने पाकिस्तान जिंदाबाद क्या कहा कि मंच पर घबराहट मच गई

रवीश कुमार का लगभग प्रत्येक प्राइम टाइम "It suites my agenda" वाले मॉडल पर आधारित होता है जिसमें वे उन सभी खबरों को प्राथमिकता देते हैं व बार बार करते है जो उनके राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सूट करती हैजबकि हर उन अन्य खबरों पर वाइट वाश करते है जो उनके Selected narrative के अनुकूल नहीं होती है।

A case study of Jews and Israel: learning lessons for Indians and citizenship amendment bill

Any Jew living anywhere in the world, persecuted or not persecuted can seek refuge and ultimately citizenship of Israel.

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