Saturday, May 8, 2021

TOPIC

Freedom of Expression

वसीम रिजवी पर क्यों हुआ है मुकदमा? क्या है जो उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी से उपर रखा गया है

वसीम रिजवी ने जिन कुरान के 26 आयतों पर मुकदमा किया है उसको लेकर सियासी मामला हुआ तेज़ जानिए क्या लिखा हुआ है इन कुरान की इन आयतों में

क्या होता है राजद्रोह? क्या कहता है सर्वोच्च न्यायलय?: 124A (IPC)

९ फरवरी २०१६ को एक आतंकवादी की मौत पर मातम मानते हुए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में " भारत तेरे टुकड़े होंगे ", "भारत की बर्बादी" "पाकिस्तान जिंदाबाद" के जो नारे लगाए जा रहे थे वो "राजद्रोह" की श्रेणी में आते हैं या नहीं?

हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना कहां तक उचित है??

विज्ञापन में दिखाए गए पात्रों के धर्म एक दूसरे से बदल दिए जाएं तो क्या देश में अभी शांति रहती। क्या तनिष्क के शोरूम सुरक्षित रहते। क्या लिबरल तब भी अभिभ्यक्ती की स्वतन्त्रता की बात करते।

The ossification of free speech in India

The advent of social media has ensured the prevalence of popular thought. The contention of some to the effect that it has challenged the elitism of the media having been granted, it has also ostensibly ensured an angrier populace.

To read or not to read, that is the question

An open letter to Bloomsbury by an avid reader and a fan of the publication.

अभिव्यक्ति

जब-जब काम कुछ खास लोगों के मन मुताबिक नहीं हुआ इन लोगों ने संस्थानों को हीं कटघरे में खङा कर दिया। मीडिया भी इस चीज से अछूता नहीं रहा है। मीडिया में भी एक वर्ग ने खुद को इमानदार और बाकी को नए नए(गोदी मीडिया)शब्दों का प्रयोग कर के उनकी पत्रकारीता पर हीं सवाल करते हैं।

Law against fake news is need of the hour: Media can’t hide anymore behind the freedom of speech

Article 19.1.a b which deals with freedom of speech and expression is universally applicable to all the citizens, including journalists. There is no special provision under the constitution for freedom of speech to the media.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में चलता हिन्दू धर्म का अपमान

जिस हिन्दू धर्म ने इस राष्ट्र को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया, सर्वधर्म समावृत्ति की शिक्षा दी उसी धर्म के सम्मान की अव्हेलना कर देना इस देश में कहाँ तक उचित है? क्या समीक्षा एवं अपमान के बीच कोई विभाजन की रेखा नहीं बची अथवा कोई रेखा खींचना नहीं चाहता।

Right to Dissent- Repercussion with free speech

Sedition is big word, and to prove it is rather bigger and mightier task but we cannot pollute the essence of our constitution in name of free speech.

The jargon of free speech

Raising voice and making oneself heard is the right of every citizen, but adopting violence is not. The generation needs to understand the evil motive of the political parties and the repercussions they can face when they violate laws.

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