Tag Archives: JNU

The nation and its fragments

The new Law drives India in majoritarian terms, far from anything that the founders of the democracy could have imagined.

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क्या जेएनयू हिंसा छात्र संघों के राजनीतिक दलों से किसी भी तरह के साहचर्य को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का सही मौका नहीं है?

क्या एक सभ्य लोकतंत्र को चलाने हेतु आवश्यक नागरिकों की नस्ल को पैदा करने और प्रशिक्षित करने के उद्देश्य में इस तरह के विरोध प्रदर्शन किसी तरह से उपयोगी हो पाएँगे? या ये अराजकता और तानाशाही को जन्म देंगे?

एमसीयू वालो कुछ सीखो

यह कौनसा तरीका हैं चुप चाप बैठ के रघुपति राघव गा रहे हो विरोध प्रदर्शन के लिए इतना भी नहीं पता प्रदर्शन कैसे किया जाता हैं अरे सीखो कुछ जामिया वालो से।

Subsidizing higher education in institutes like JNU

It might seem to one that students are protesting for hostel fee hike but in reality these issues are temporary in nature and these protests are manifestation of the anxiety of the ‘comrades in faculty’ whose end in all likelihood is near considering their incompatibility with the present regime.

मैं और तथाकथित सेकुलरिज्म

मोदी हेटिंग में इतने अंधे हो चुके हैं की ना अपना भला दिख रहा है ना देश का. और अगर ये इनका सेकुलरिज्म है, तो ये सेक्युलरसिम इन्हे मुबारक.

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