Saturday, September 25, 2021

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Left liberals

हिंदी तो बहाना है, देवनागरी में उर्दू पढ़ाना है

हिंदी की पुस्तक ‘रिमझिम’ को पढ़ते हुए लगता है देवनागरी लिपि में उर्दू और अंग्रेजी को पढ़ रहे हैं। इन शब्दों को बलात डाला गया है, जबकि इनके स्थान पर हिंदी के लोकप्रिय शब्द हिंदी में उपलब्ध हैं। लेकिन नरैटिव चलाने वालों के दिमाग में हिंदी है ही कहां?

The liberal trap: India’s Youth is their target

Wokeness in nutshell means getting derailed from practical life and creating fuss about sexuality and pronouns, defending Taliban but ridiculing Indian culture, defending Burqa and Hijab but attacking Hindu marriage rituals in name of smashing patriarchy, and so on.

सदियों का भेदभाव और अत्याचार

ये जो सदियों से भेदभाव और अत्याचार वाली कहानियां सुनाई जाती हैं ना हिन्दूओं को, ये सब हिन्दुओं को आपस में लड़ाने के षड्यंत्र हैं बस।

How Indian liberalism is the greatest malediction to the country’s progress

The left-wing has always praised the state and raised their finger towards the Modi government. But after the state's failed 'Kerala' model of handling the COVID-19 pandemic, and an increasing number of youth joining ISIS has shown it all!

समाजवाद और वर्ग संघर्ष

उत्तरप्रदेश में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है, राष्ट्रवादी कही जाने वाली BJP और खुद को लोहिया और जयप्रकाश के समाजवाद का उत्तराधिकारी बताती सामजवादी पार्टी आमने सामने है.

Rise of Hindu vote in Tamil Nadu and West Bengal

it can be safely assumed that with new rising Hindu vote, the non traditional BJP states might also have got good influence on ideology of RSS.

जागते रहो! स्लीपर सेल पूरी तरह मजबूत और सक्रिय है

स्लीपर सेल की लॉबी इतनी सक्रिय और मजबूत है कि देश के प्रमुख वैचारिक केंद्रों में अभी तक इन लोगों का कब्जा जमा हुआ है और देश में देशविरोधी नरैटिव को चलाने में इन्हें महारत हासिल है

नए भितरघाती- ट्रोजन राइट विंग (TRW)

ट्रोजन आरडब्ल्यू (TRW) क्या है? हम कैसे पहचाने कि कोई सोशल मीडिया की आवाज TRW है? यह भी प्रश्न उठता है कि क्या केवल मोदी / शाह या भाजपा / आरएसएस की आलोचना करने से ही कोई TRW हो जाता है?

वामपंथ का विषैला रक्त-चरित्र और उसकी विसंगतियाँ

वामपंथी शासन वाले देशों में न्यूनतम लोकतांत्रिक अधिकार भी जनसामान्य को नहीं दिए गए, परंतु दूसरे देशों में इनके पिछलग्गू लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई देकर जनता को भ्रमित करने की कुचेष्टा करते रहते हैं।

Time to be contemptuous of such contempts

Why should the Attorney General or the top court be wasting their time, effort and resources in pursing these ‘characters’ - Arundhati Roy, Prashant Bushan, Kunal Kamra, in painting them darker than they are, for they love it as much as the decent, dignified and respectable abhor it.

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