अभिसार शर्मा के नाम इक खुला खत, संदीप कुमार के मुद्दे पर

अभिसार शर्मा जी,

आम आदमी पार्टी के मुखपत्र पे आपका लिखा लेख पढ़कर प्रथम दृष्टया जो मेरी प्रतिक्रिया थी , वो है “चित भी मेरी , पट भी मेरी और सिक्का मेरे बाप का” ! जिस संदीप कुमार के सेक्स स्कैंडल पर आपने इतना लंबा चौड़ा लेख लिखा , समझ मे नहीं आया की क्यों ? आख़िर क्या ज़रूरत पड़ गई आपको यह लेख लिखने की और और उसमे उन प्रश्नो को पाठकों से पूछने की ! आख़िर आपके न्यूज़ चैनल का तो स्लोगन ही है “आपको रखे आगे” और इसीलिए 31 अगस्त 2016 को आपके न्यूज़ चैनल पर ऐंकर गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहा था कि हमारे पास यह सीडी सबसे पहले आई और हमने केजरीवाल को भी भेजी ! हमने यह वीडियो देखा यह 9 मिनट का वीडियो बहुत ही आपत्तिजनक है इसलिए आपको नहीं दिखा सकते !

तो मुद्दा यह है कि उस वीडियो की जब सक्रीनिंग आपके स्टूडियो मे हो रही थी तो क्या उस वीडियो को देखने वालों मे ऐसा कोई भी नहीं था जो उन संदेहास्पद चीज़ों पर गौर करता ! आख़िर खबर दिखाने की इतनी होड़ क्यों , पब्लिक को बेवकूफ़ बनाने के लिए ? TRP के लिए ? या दिल्ली सरकार पर दबाव डालने के लिए ? और आप कदाचित् इन तीनो को ही हासिल कर लिए ! जनता को गुमराह किया और सरकार पर दबाव डलवाकर संदीप कुमार को बर्खास्त भी करवाने मे कामयाब हो गये ! लेकिन उस IRS ऑफीसर जो की IIT पास आउट भी है , उनके निर्णय पर ज़रूर प्रश्न चिन्ह लगा देता है !

इस गंदगी के दाग केजरीवाल के हिस्से भी आई , इस कांड का खुलासा करने वाले ने यह भी बताया कि सीडी की जानकारी केजरीवाल को 15 दिन पहले ही हो गई थी तो शक होता है कि ने जानबूझकर सीडी की सत्यता की जाँच नहीं करवाई या फिर उन्होने भी यह मान लिया था कि संदीप कुमार सच मे अपराधी हैं ! केजरीवाल ने अंदर ही अंदर संदीप कुमार से ज़रूर स्पष्टीकरण माँगा होगा , लेकिन उन्हे यह भान नही रहा होगा कि इसे TRP की भूखी मीडीया मे भी दे दिया जाएगा ! और जब संदीप कुमार को अपराधी मान लिया गया तो आपको दर्शको पर ठीकरा फोड़ने की ज़रूरत नहीं है !

आपके न्यूज़ चैनल के खुलासे के बाद , संदीप कुमार की प्रतिक्रिया आने से पहले ही अरविंद केजरीवाल ने फ़ैसला सुना दिया और बा-कायदा वीडियो संदेश जारी करके कहा कि संदीप कुमार ने पूरे मूव्मेंट को शर्मसार किया अर्थात अपराधी घोषित किया (राम जाने किस मूव्मेंट की बात कर रहे थे क्योंकि इंडिया अगेन्स्ट करप्षन मूव्मेंट मे संदीप कुमार शामिल नहीं थे ) ! और संदीप कुमार ने अपने बयान मे अपनी तुच्छ राजनीति की झलक देते हुए सिर्फ़ इतना ही कहा कि मुझे एक दलित होने के नाते फँसाया जा रहा है ! लेकिन उन्होने इस सीडी के बारे मे बिल्कुल नहीं बताया उसमे दिखने वाला इंसान वो है या नहीं ! सिर्फ़ इतना कि एक दलित होने के नाते फँसाया जा रहा है !

इस फिल्म के संदीप कुमार के होने का दावा किया आपकी पत्रकार बिरादरी ने ! इन सबने मिलकर यह तस्दीक़ की कि ABP NEW जिसे सेक्स स्कॅंडल मान रहा है दरअसल वो Consensual sex था ! फिर इसमे आग मे घी डालने का काम किया उनकी ही पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष ने ! उन्होने ही लोगो को बताया कि कैसे कोई आम आदमी से महात्मा बन सकता है , लोगों को यह समझाने की कोशिश की जिसे (कु) कृत्य समझ रहे हैं वो एक प्रक्रिया है कि परमानंद की, उसे हवस समझने की भूल ना करें !

आपने अपने लेख मे एक सवाल उठाया कि :: सवाल ये भी उठ सकता है के पीड़ित महिला इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद सामने क्यों आई? मगर ये सवाल बेमानी है, क्योंकि आप और हम अपने comfort zone से किसी “बलात्कार पीड़ित” की मनोदशा पर टिपण्णी नहीं कर सकते। बशर्ते वो बलात्कार पीड़ित है।

इसका उत्तर सिर्फ़ इतना ही हो सकता है उस महिला को शायद यह ज्ञांत ही ना हो कि ये भद्र पुरुष उसके शरीर के साथ साथ उसकी आत्मा के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं ! उसकी सहमति/ असहमति से इस कृत्य को फ़िल्माना भी अपने आप मे एक अपराध है ! और लोगों का क्या है कि लोग पूरी फिल्म को नहीं उसके किसी एकाध अच्छे डायलॉग को याद रखते हैं जैसा कि “केजरीवाल ने कहा था भविष्य मे कोई क्या करेगा किसी के माथे पर लिखा नहीं होता” और संदीप कुमार ने कहा था कि “घर से निकलते समय अपनी पत्नी के पाँव छूकर ही निकलते हैं” !

आपने के और सवाल पूछा कि “एक ब्लॉग लिखने पर आशुतोष को NCW ने समन क्यों भेजा, तो जवाब यह है मित्रवार, सिर्फ़ एक लेख लिखने मात्र से सुब्रमणियम स्वामी पर मुक़दमा कर दिया गया था, आपके लिए FREEDOM OF SPEECH के मायने कुछ हैं और किसी अन्य के लिए कुछ और, और शायद आप भूल गये कि सुप्रीम कोर्ट ने भी आज़म ख़ान के बयान (जो कि बुलंदशहर की घटना को राजनीतिक साजिस साबित करने पर तुले हुए थे ) को अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं बल्कि सीमा लांघना कहा था ! इसलिए जज बनने की कोशिश ना ही करें तो सही है !

और हाँ , अंत मे एक और बात कहना चाहूँगा हर मुद्दे पर कहीं ना कहीं से मोदी को मीडिया ज़रूर घुसेड देती है, CM से PM बनाने मे सबसे बड़ा योगदान है मीडिया का ! ना मीडिया 12 वर्षों तक नरेंद्र मोदी का फर्जी एनकाउंटर करती ना ही पब्लिक की सहानुभूति मोदी के र मे जाती ! इसलिए दर्शक और पाठको से सवाल पूछो ना कि उनपर सवाल खड़े करो !

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