Monday, May 25, 2020
Home Hindi बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 3)

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 3)

Also Read

shridevsharmahttp://www.shridevsharma.com/
In my blog, I share my study and observations on issues current and related, and welcome my readers to share their views.

“हिन्दु धर्म के दर्शन पर विचार”

डा. अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म पर सारा विचार वर्ण व्यवस्था को धर्म का केन्द्र बिन्दु मान कर रखा।

बाबा साहब अम्बेडकर की दृष्टी में मनुवाद (भाग 3), Baba Saheb Ambedkar and Manuvaad, Shridev Sharma

उनके अनुसार एक हिन्दू दूसरे हिन्दू के साथ कुछ बाँट नहीं सकता । न जीवन काल में, न मृत्यू के बाद । एकता और भाईचारे की भावना से हिन्दू अपरिचित हैं। हिन्दुत्व वह सिद्घान्त है जो दो मनुष्यों की समानता को धार्मिक रूप से नकारता है।

 

हिन्दू के जीवन का हर क्षण धर्म से नियमित है। वो कैसे जिये, मरे तो कैसे जलाएँ। जब बच्चा पैदा हो तो कौन सा कर्म काण्ड़ किया जाय। उसका नामकरण, मुंडन, उसका पेशा, उसका विवाह, उसका खाना, क्या खाना, और क्या नहीं खाना, कितनी बार खाना, कितनी बार संध्या पूजा करना । दिन कैसे व्यतीत करना।

ये कुछ अजीब सी बात है कि कुछ शिक्षित हिन्दु ये मानते हैं कि इन सब बातों से कुछ अन्तर नहीं पडता।

परंतु वे ये भूल जाते हैं कि धर्म सामाज की सबसे बड़ी ताकत है। धर्म परमात्मा सत्ता  का अनुशासन है। उसकी व्यवस्था सामाज के आदर्शों को निर्धारित कर देती है। वो व्यवस्था दिखाई नहीं देते हुए भी हर रोज का जीता जागता सच है। जो धर्म को नकारते हैं, वो ये भूल कर बैठते हैं कि धर्मसत्ता कितनी प्रभावी और शक्तिशाली होती है। धर्म के आदर्श के रूप में स्थापित व्यवस्था के प्रभाव और शक्ति का मुकाबला मानवकृत कोई व्यवस्था कर ही नहीं सकती।

अछूत, अपमान और जनेयू

वर्ण व्यवस्था के घार्मिक आधार व हिन्दुओं में अछूतों के प्रति भ्रातृत्व के अभाव ने भयावह अपमान उत्पन्न किया। संवैधानिक और कानूनी प्रावघान भी परम्परागत रूप से सामाज में व्याप्त जाति के संस्कार को दूर नहीं कर पाए।

वामपंथी विचार इस अपमान का गहराई से अध्ययन करने लगे।

 2009 में अॉक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी प्रेस ने “ह्यूमिलिएशन” शीर्षक से अपमान के सिद्धांत का अध्ययन प्रकाशित किया।
 

राष्ट्रवादी मान्यता ने स्त्री एवं अछूत माने जाने वाली जातियों के स्वाभिमान पर चोट कर रही मान्यताओं को अनदेखा किया। यह विश्वास इस अध्ययन के केन्द्र बिन्दू में था।

वैलेरियन रोड्रिक्स के अनुसार भारत से यह अपेक्षा की जाती थी कि वह सांस्कृतिक रूप से गुलामी के समय की अपमानजनक व्यवस्था से अपने हर नागरिक को मुक्त करा सकेगा। रोड्रिक्स के अनुसार भारतीय संविधान की सबसे बड़ी चुनौती अछूतों को सार्वजनिक जीवन में हिस्सा देने की धी। रोड्रिक्स के अनुसार अछूत आज भी भारतीय समाज के हिस्से की तरह नहीं माने जाते।

भारतीय सामाज आज भी छूत अछूत, शुद्धि अशुद्धि के आदर्श से मुक्त नहीं हो पाया। ब्राह्मणवाद के पूर्वाग्रह ने अछूतों को अपमान से मुक्त नहीं होने दिया।
जनेयू के अध्यापकों तथा विद्यार्थियों का एक वर्ग राष्ट्रवाद को सामाजिक जीवन में हर दिन हो रहे अछूतों के अपमान की कसौटी में परख कर निरस्त करना चाहता है।
- advertisement -

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

shridevsharmahttp://www.shridevsharma.com/
In my blog, I share my study and observations on issues current and related, and welcome my readers to share their views.

Latest News

भारतीय भाषाई विविधता पर हावी पश्चिमीकरण और हमारी दुर्बलता

संस्कृत विश्व की पुरातन भाषा है और वर्तमान की सभी भाषाओं की उत्पत्ति इसी भाषा से हुई है किन्तु आज यही संस्कृत भाषा विलोपित होती जा रही है। उससे भी बड़ी विडम्बना यह है कि हम स्वयं अपनी भाषागत परंपरा का पश्चिमीकरण कर रहे हैं। (by @omdwivedi93)

COVID 19- Agonies of Odisha Sarpanches no one is talking about

While the delegation of the collector power to the Sarpanch is being welcomed by all, the mismanagement has put an woe among these people's representatives.

The implications of structural changes brought by Coronavirus – Part 1

Many companies will move towards greater share of employees working from home with a weekly one to two day gathering for team building purposes. The IT industry in India estimates that close to 50 per cent of the country’s 4.3 million IT workers will soon work from home.

Saving the idea of India

Should Mickey (Valmiki) have not been more inclusive and given name Rehman instead of Hanuman and Agatha instead of Agastya? Such bandicoot the wrier was!

Feminism is nice, but why settle for a lesser idea?

Feminism talks about only women, Devi talks about humanity and cares for everyone equally as a compassionate mother (real gender neutrality)

Centre’s Amphan package for West Bengal should be low in ‘cash’, high in ‘kind’

while helping the state, the centre must reduce the cash disbursement as much as possible. The corruption through misappropriation is believed to be directly proportional to the 'cash component' in a package.

Recently Popular

तीन ऐसे लोग जिन्होंने बताया कि पराजय अंत नहीं अपितु आरम्भ है: पढ़िए इन तीन राजनैतिक योद्धाओं की कहानी

ये तीन लोग हैं केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, दिल्ली भाजपा के युवा एवं ऊर्जावान नेता एवं समाजसेवी कपिल मिश्रा एवं तजिंदर पाल सिंह बग्गा। इन तीनों की कहानी बड़ी ही रोचक एवं प्रेरणादायी है।

सावधान: सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर छात्र-छात्राओं को किया जा रहा गुमराह!

अगर इन्टरनेट पर उपलब्ध जानकारियाँ गलत हो या संस्थाओं से प्रेरित हो तब तो आपका ऐसे संस्थाओं के जाल में फसना निश्चित है और इसका एहसास आपको जब होगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

ABVP and RSS volunteers conduct door-to-door screening of residents in Mumbai

Volunteers of ABVP and RSS began door to door screening in slum pockets of Nehru Nagar in Mumbai, equipped with PPE sets and directed by doctors on board, and screened over 500 people in total in the last three days.

AMU की पाक ज़मीं से उपजा भारत के Secularism का रखवाला निर्देशक

अगर अनुभव सिन्हा एक एजेंडा से भरे निर्देशक नहीं बल्कि सचमुच दलितों के पक्ष कार एवं भला चाहने वाले व्यक्ति हैं तो क्या वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जिसके वह alumni रहे हैं में दलित आरक्षण के मुद्दे को उठाएंगे? क्या देश के अन्य विश्वविद्यालयों की तरह एएमयू जैसे विश्वविद्यालय में भी दलितों को आरक्षण का अधिकार नहीं?

Ayan invasion theory- A myth

What’s shocking to me is that a certain section of India holds up to the AIT and consistently tries to prove it right despite many genetic/ archeological/ historical evidences. Now who is that section that I am referring to ? The “left” of India.