Sunday, June 16, 2024
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शारदा घोटाले के बाद दीदी की पार्टी का शिक्षक भर्ती घोटाला

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Nagendra Pratap Singh
Nagendra Pratap Singhhttp://kanoonforall.com
An Advocate with 15+ years experience. A Social worker. Worked with WHO in its Intensive Pulse Polio immunisation movement at Uttar Pradesh and Bihar.

जी हाँ मित्रों आजकल पश्चिम बंगाल में ममता दीदी के सरकार के दो बड़े नाम पूरे भारत में छाये हुए हैं, एक नाम है पार्थ चटर्जी का जो एक दो नहीं अपितु तीन तीन विभागों के मंत्री है और दूसरा नाम है अर्पिता मुखर्जी का जो बंगला फिल्मो की छोटी मोटी नायिका हैं पर पार्थ चटर्जी की खासम खास हैं।

शिक्षक भर्ती घोटाला के बारे में जानने से पहले चलीये थोड़ा देख लेते हैं, आखिर पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी हैं कौन?

पार्थ चटर्जी!
प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा दीक्षा:-
मित्रों पार्थ चटर्जी का जन्म दिनांक ६ अक्तूबर १९५२ को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ। इनके पिताजी का नाम स्वर्गीय श्री प्रबीर कुमार चटर्जी और माता जी का नाम स्वर्गीय श्रीमती रामा चटर्जी है।

पार्थ चटर्जी ने कोलकता के नरेन्द्रपुर स्थान पर स्थित रामकृष्ण मिशन विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने आशुतोष कॉलेज से अर्थशास्त्र (Economics) की पढ़ाई पूरी की।इसके पश्चात कलकत्ता विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) कि डिग्री ली और एंड्रयू यूल (Andrew Yule) नामक कम्पनी के साथ एक मानव संसाधन पेशेवर (HR professional) के रूप में जुड़ गए। प्रारम्भिक जीवन से ही सार्वजनिक व धार्मिक कार्यों में रूचि होने के कारण वह वर्तमान में कोलकाता में नकटला उदयन दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष भी हैं, जो अपने विभिन्न प्रकार के थीम वाले पंडालों के लिए प्रसिद्ध है। वक़्त आने पर पार्थ चटर्जी ने श्रीमती बबली चटर्जी जी से शादी की और अब उनकी एक बेटी भी है जिसका नाम सोहिनी चटर्जी है।

राजनितिक जीवन:-
पार्थ चटर्जी ने वर्ष २००१ में अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत करते हुए, बहेला पाश्चिम नामक विधान सभा से विधायक का चुनाव जीता और २००६ में पुन: उसी सीट से विधायक चुन लिए गए। वर्ष २००६ से २०११ तक वो पाश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य करते रहे।

वर्ष २०११ में जब ममता दीदी की सरकार बनी तो उन्होंने दिनांक २० मई २०११ को कैबिनेट मिनिस्टर के रूप में शपथ लिया और ममता बनर्जी ने उन्हें Commerce and Industry, Public Enterprises, Information Technology and Electronics and Parliamentary अफेयर्स जैसे मंत्रालयो की जिम्मेदारी सौप दी। यही नहीं पार्थ चटर्जी को वर्ष २०११ में हि हाउस के Deputy Leader के पद के लिए भी नामांकित किया गया।

वर्ष २०१६ के विधान सभा चुनाव के पश्चात एक बार पुन: ममता दीदी की सरकार बनी और उनके सबसे प्रिय पार्थ चटर्जी को Minister-in-Charge of Higher Education and School Education Department, West Bengal Government, the Ministry of Commerce and Industry, Public Enterprises, Information Technology and Electronics जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयो कि जिम्मेदारी सौप दी गई।

वर्ष २०२१ में हुए विधान सभा चुनाव में पार्थ एक बार पुन: विधायक बनने में सफल रहे और इस बार भी ममता दीदी के सबसे प्रिय और खास होने के कारण उनको कैबिनेट मंत्री बनाया गया और Commerce and Industry, Information Technology and Electronics जैसे मंत्रालय इन्हें सौप दिए गए। अब यंहा ध्यान देने वाली बात ये है कि वर्ष २०१६ से २०२१ तक पार्थ चटर्जी पाश्चिम बंगाल राज्य के शिक्षा मंत्री थे।

कौन है अर्पिता मुखर्जी:-
प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा दीक्षा:-

अर्पिता का जन्म दिनांक २८ जनवरी १९८४ को पाश्चिम बंगाल के कोलकता नामक शहर में हुआ। उनके माता पिता और उनकी सम्पूर्ण शिक्षा दीक्षा के बारे में अभी पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं है। पर खबरों के अनुसार इनकी माताजी का नाम श्रीमती मिनती देवी है जो पाश्चिम बंगाल के बेलघरिया देवानपाड़ा स्थित एक कॉम्लेक्स में स्थित किसी फ्लैट में निवास करती हैं।

राजनितिक और समाजिक जीवन:-
अर्पिता बंगाली सुपरस्टार प्रोसेनजीत चटर्जी वर्ष २००९ में आई फिल्म ‘मामा भगने’ और जीत तथा वर्ष २००८ में आई फिल्म ‘पार्टनर’ के साथ बंगाली फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

इसके अलावा, अर्पिता वर्ष २०१९ और २०२० में पार्थ चटर्जी की दुर्गा पूजा समिति के प्रचार अभियानों का भी चेहरा थीं, जिन्हें नकटला उदयन संघ कहा जाता है। अर्पिता ने साल २००८ में फिल्म ‘बंदे उत्कल जननी’ से उड़िया फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। बाद में उन्होंने पांच अन्य ओडिया फिल्मों- प्रेम रोगी (२००९), तोरा मोरा जोड़ी सुंदर (२०१०), केमिटी ए बंधन (२०११) और २०१२ में “मु काना एते खराप” में अभिनय किया। उन्होंने तमिल फिल्मो में भी भाग्य अजमाया।

पार्थ चटर्जी अपने चुनाव के दौरान भी अर्पिता का उपयोग करते थे। अर्पिता, पार्थ चटर्जी से मिलने के पश्चात शीघ्र हि उनके सबसे विश्वासपात्र अंग के रूप में जुड़ गई। धीरे धीरे अर्पिता, पार्थ चटर्जी के हर मुहीम का हिस्सा बनकर राजनितिक जीवन में प्रवेश कर गई।

अब आइये देखते हैं कि क्या है, ये शिक्षक भर्ती घोटाला।

मित्रों जैसा की हम पहले हि बता चुके हैं की वर्ष २०१६ से वर्ष २०२१ तक पार्थ चटर्जी ही पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री थे।

वर्ष २०१६ में पश्चिम बंगाल राज्य के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (SSC) के तहत शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर नियुक्तियों के लिए स्कूल सेवा आयोग ने परीक्षा आयोजित की थी। विदित हो कि इस परीक्षा के तहत कुल २० उम्मीदवारों का चयन होना था। जांच और परीक्षण के पश्चात परीक्षा के परिणाम नवंबर २०१७ में सार्वजनिक किये गए, और इस परिणाम के अनुसार पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की बबीता सरकार नामक अभ्यर्थी का नाम टाप २० उम्मीदवारों में शामिल दिखाया गया। इस सूची में बबीता सरकार २०वें स्थान पर थी। पर अचानक तत्कालीन स्कूल सेवा आयोग (जो पार्थ चटर्जी के मंत्रालय के अधीन था) ने यह सूची रद्द कर दी और बाद में दोबारा सूची जारी की जिसमें बबिता सरकार के स्थान पर तत्कालीन विधायक परेश अधिकारी (जो वर्तमान में शिक्षा विभाग के राज्य मंत्री हैं)की बेटी अंकिता अधिकारी का नाम शामिल कर लिया गया जिससे बबीता सरकार का नाम वेटिंग लिस्ट में चला गया।

स्कूल सेवा आयोग द्वारा जारी नई सूची में बबीता सरकार २१ वे स्थान पर आ गई, जिससे उसके सारे सपने धाराशाई हो गए, फिर क्या था इस नई सूची से कुपित होकर बबीता सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के शरण में चली गई। आदरणीय उच्च न्यायालय ने गंभीरता पूर्वक सुनवाई करते हुए स्कूल सेवा आयोग से दोनों (अर्थात बबिता सरकार और अंकिता अधिकारी) की नंबर शीट मांगी जिससे खुलासा हुआ कि बबिता सरकार से १६ नंबर कम पाने के बावजूद मंत्री जी की बेटी अंकिता अधिकारी का नाम टॉप पर आ गया और बबिता सरकार को २१वे नंबर पर धकेल दिया गया।

आदरणीय उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि अंकिता अधिकारी को नौकरी से हटाया जाए और उनको जितना वेतन मिला है वो वसूला जाए। न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया कि बबिता सरकार को नौकरी पर नियुक्त किया जाए और अंकिता अधिकारी से वसुला गया वेतन, बबिता सरकार को दे दिया जाए।

और यही नहीं आदरणीय उच्च न्यायालय ने इस कथित घोटाले की जांच के लिए न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया। समिति ने इस घोटाले की गहन जांच कर एक रिपोर्ट तैयार की और अपनी रिपोर्ट में घोटाले में शामिल तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की।

हम आपको बताते चलें कि “बाग समिति” ने ग्रुप-डी और ग्रुप-सी पदों पर नियुक्तियों में घोर अनियमितता पाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ग्रुप-सी में ३८१ और ग्रुप-डी में ६०९ नियुक्तियां अवैध रूप से की गई थीं।

“बाग समिति” ने अपनी रिपोर्ट के द्वारा राज्य स्कूल सेवा आयोग के चार पूर्व शीर्ष अधिकारियों और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की सिफारिश की।

आदरणीय उच्च न्यायालय ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दिया।

सीबीआई (CBI) और ईडी (ED):-
आदरणीय कोलकता उच्च न्यायालय के आदेशानुसार सीबीआई ने अपनी जांच और परीक्षण कि विधिक कार्यवाही प्रारम्भ की और प्रारम्भिक पूछ्ताछ के दौरान ही इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की गंध आते ही, इसकी जांच को प्रवर्तन निदेशालय अर्थात (ED) को सौप दिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने २२ जुलाई २०२२ को सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर पश्चिम बंगाल में विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। राज्य के उद्योग और वाणिज्य मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास सहित राज्य में कम से कम १३ स्थानों पर तलाशी ली गई।

छापेमारी के दौरान, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने ममता दीदी के सबसे प्रिय साथी पार्थ चटर्जी की सबसे खास सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवासीय परिसर से करीब 20 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी बरामद की। यही नहीं लगभग ५० किलो सोना और २२ के करीब मोबाईल फोन भी बरामद किया। बात यही तक नहीं है, छापेमारी के दौरान कई अचल सम्पत्तियो के दस्तावेज भी बरामद किये गए, जिसका पूछ्ताछ के दौरान अर्पिता कोई संतोषजनक उत्तर ना दे पाई कि ये सब कंहा से मिला और यही हाल पार्थ मुखर्जी का भी रहा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को संदेह है कि उक्त राशि पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) और पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (WBPEB) में भर्ती घोटाले से प्राप्त होने वाली राशि है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मानना है कि सर्विस कमीशन घोटाला मामले में अर्पिता मुखर्जी की भी शामिल है। अर्पिता मंत्री पार्थ चटर्जी की खास सहयोगी हैं। पार्थ चटर्जी जिस पूजा कमेटी के सर्वेसर्वा हैं, अर्पिता भी उससे जुड़ी हुई हैं जी हाँ एक्ट्रेस अर्पिता भी उसी पूजा पंडाल की देखभाल करती थीं जिसके अध्य्क्ष पार्थ चटर्जी हैं। पंडाल के प्रचार और प्रसार के लिए छपे पोस्टरों में भी अर्पिता का ही फोटो रहता था। वह राजनितिक और समाजिक गलियारों में पार्थ चटर्जी की करीबी मानी जाती हैं। जानकारी के मुताबिक लग्जरी लाइफ जीने वाली एक्ट्रेस अर्पिता का तालीगंज और बेहला में बहुत बड़ा फ्लैट हैं।

निष्कर्ष:-
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तरमादेतत्त्रयं त्यजेत्।।

अर्थ: काम, क्रोध व लोभ। यह तीन प्रकार के नरक के द्वार आत्मा का नाश करने वाले हैं अर्थात् अधोगति में ले जाने वाले हैं, इसलिए इन तीनों को त्याग देना चाहिए।

भावार्थ:- काम यानी इच्छाएं, गुस्सा व लालच ही सभी बुराइयों के मूल कारण हैं। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने इन्हें नरक का द्वार कहा है। जिस भी मनुष्य में ये 3 अवगुण होते हैं, वह हमेशा दूसरों को दुख पहुंचाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति में लगे रहते हैं। अगर हम किसी लक्ष्य को पाना चाहते हैं तो ये 3 अवगुण हमें हमेशा के लिए छोड़ देना चाहिए। क्योंकि जब तक ये अवगुण हमारे मन में रहेंगे, हमारा मन अपने लक्ष्य से भटकता रहेगा।

तो मित्रों एक व्यक्ति अर्थशास्त्र से स्नातक की उपाधि और फिर MBA की डिग्री लेता है। उसे जनता वर्ष २००१ से २०२१ तक लगातार विधायक चुनती है, वह २०११ से २०२१ तक कैबिनेट मिनिस्टर बन कर कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सम्हालता है, इतना सब कुछ होने के बावजूद भी चन्द पैसों के लिए अपनी मान मर्यादा और ईमानदारी को बेचकर भ्रष्टाचारी बन जाता है। आखिर इस लालच से इंसान उबर क्यों नहीं पाता। पार्थ चटर्जी के पास क्या नहीं था, इज्ज़त, दौलत और शोहरत सब तो था फिर क्यों उसने भ्रष्टाचार का रास्ता चूना।

अर्पिता मुखर्जी भी पढ़ी लिखी होगी, अच्छा उसका सामाजिक जीवन था। ईमानदारी से होना जीवन यापन कर रही थी, परन्तु राजनितिक पद, पैसा, पावर और प्रतिष्ठा की चकाचौंध ने उसकी पूरी दुनियां उजाड़ कर रख दी। इसीलिए कहते हैं ” लालच बुरी बला है”।

आज पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी दोनों जेल में हैं। शीघ्र ही और लोगों के भी जेल जाने की पूरी संभावना है।

हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि:-

अन्यायोपार्जितं वित्तं दस वर्षाणि तिष्ठति।
प्राप्ते चैकादशेवर्षे समूलं तद् विनश्यति।।

अर्थात:- अन्याय या गलत तरीके से कमाया हुआ धन दस वर्षों तक रहता है। लेकिन ग्यारहवें वर्ष वह मूलधन सहित नष्ट हो जाता है। परन्तु पार्थ चटर्जी और अर्पिता के मामले में तो यह ६ वर्षो में ही नष्ट हो गया। शायद इन्होंने कुछ अधिक ही अन्याय कर दिया काला धन कमाने में।

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