Tuesday, May 21, 2024
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आधार कार्ड बनाम निजता का अधिकार भाग -१

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Nagendra Pratap Singh
Nagendra Pratap Singhhttp://kanoonforall.com
An Advocate with 15+ years experience. A Social worker. Worked with WHO in its Intensive Pulse Polio immunisation movement at Uttar Pradesh and Bihar.

Adhaar Card v/s. Right to privacy_1

आधार संरचना पर हमले की अगुवाई करने की पहल याचिकाकर्ताओं, अर्थात् न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी (सेवानिवृत्त) और श्री प्रवेश खन्ना, के नेतृत्व में वर्ष २०१२ में एक रिट याचिका (सिविल) संख्या ४९४ /२०१२ दाखिल करके की गई। उस समय, आधार योजना विधायी छत्र के अधीन नहीं थी अर्थात इसके लिए किसीभी प्रकार  के अधिनियम या संहिता को विधायिका के द्वारा पारित और लागू नहीं किया गया था। उपर्युक्त रिट याचिका में आधार योजना को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी गई कि यह भारत के असंख्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, अर्थात्, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१ के तहत आने वाले निजता के अधिकार (Right to Privacy)का उल्लंघन करती है।

कुछ अन्य व्यक्ति भी संबंधित याचिकाएं दाखिल करके आधार योजना को चुनौती देने की दौड़ में शामिल हुए। न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी (सेवानिवृत्त) और श्री प्रवेश खन्ना द्वारा दाखिल की गयी इस याचिका में समय-समय पर कई आदेश पारित किए गए| याचिकाकर्ताओं ने आधार परियोजना को चुनौती दी है, जो वर्ष २००९ में प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से शुरू हुई थी। वर्ष २०१६ में, आधार अधिनियम  जिसे आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, २०१६  (‘आधार अधिनियम’) के नाम से जाना जाता है, पारित किया गया। अंग्रेजी में इसे Aadhaar (Targeted Delivery of Financial and Other Subsidies, Benefits and Services) Act, 2016 कहते हैं। आधार को वैधानिक कवर की ढाल मिलने के बाद भी,ये कह कर की “यह अधिनियम संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है” ईसे चुनौती दी गई। इस मामले में शामिल मुद्दों की विस्तृत श्रृंखला इस तथ्य से स्पष्ट है कि यह इन मामलों में पक्षकारों को अपनी दलीलें समाप्त करने में लगभग चार महीने लगे| पुनः इसी उद्देश्य से कुछ और रिट याचिकाएँ भी दाखिल की गई।

इससे पहले कि हम आधार परियोजना और आधार अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विश्लेषण करें, हमे कालानुक्रमिक क्रम में घटित घटनाओं पर ध्यान देना उचित होगा, जिन्होंने आधार योजना के निर्माण, टेक ऑफ और कार्यान्वयन को आकार दिया।

०३ मार्च, २००६ को भारत सरकार के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ‘बीपीएल परिवारों के लिए विशिष्ट पहचान’ नामक परियोजना को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा बारह महीने की अवधि के लिए लागू करने का अनुमोदन दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप, बीपीएल परिवार परियोजना के लिए विशिष्ट पहचान के तहत बनाए जाने वाले कोर डेटाबेस से डेटा और फ़ील्ड को अद्यतन करने, संशोधन, जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया का सुझाव देने के लिए ०३ जुलाई, २००६ को एक प्रक्रिया समिति (Processes Committee) का गठन किया गया। इस समिति ने २६  नवंबर २००६ को एक पेपर तैयार किया जिसे ‘निवासियों की सामरिक दृष्टि विशिष्ट पहचान’ (‘Strategic Vision Unique Identification of Residents’) के रूप में जाना जाता है। इसके आधार पर, नागरिकता अधिनियम,१९५५  और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विशिष्ट पहचान संख्या परियोजना के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को मिलाने के लिए ०४  दिसंबर, २००६ को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) की स्थापना की गई थी। ईजीओएम को परियोजनाओं को जल्दी और प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए कार्यप्रणाली और विशिष्ट बिन्दुओ (methodology and specific milestones) पर गौर करने और इन परियोजनाओं पर अंतिम दृष्टिकोण लेने का भी अधिकार था। ईजीओएम में तत्कालीन विदेश, गृह मामलों, कानून, पंचायती राज और संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के मंत्रियों और तत्कालीन योजना आयोग के उपाध्यक्ष को शामिल किया गया था।

विशिष्ट पहचान अर्थात Unique Identification (UID) परियोजना पर समय-समय पर विभिन्न बैठकें आयोजित की गईं। २२  दिसंबर २००६  को आयोजित चौथी बैठक में प्रस्तावित डेटा तत्वों के विभिन्न पहलुओं और उनके स्वरूपों पर चर्चा की गई। तत्पश्चात,२७  अप्रैल, २००७  को आयोजित इसकी पांचवीं बैठक में, यह निर्णय लिया गया कि यूआईडी डेटाबेस का विकास सैद्धांतिक रूप से तीन चरणों में होगा। समिति ने आगे निर्णय लिया कि आरडी के घरेलू सर्वेक्षण और व्यक्तिगत राज्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) डेटाबेस जैसे प्रमुख भागीदार डेटाबेस के साथ चरणबद्ध तरीके से लिंकेज किया जाना चाहिए। ११  जून, २००७ को, परियोजना के अंतिम चरण में, कैबिनेट सचिव द्वारा तत्कालीन प्रधान मंत्री के समक्ष यूआईडी परियोजना की सम्पूर्ण रुपरेखा प्रस्तुत की गई। यूआईडी परियोजना की छठी बैठक १५  जून, २००७  को हुई, उक्त बैठक में समिति ने अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित निर्णय लिए:

 (i) ११ अंकों के सांख्यिक  प्रारूप को मंजूरी दी गई।

(ii) प्राधिकरण के लिए पैन-विभागीय और तटस्थ पहचान सुनिश्चित करने के लिए योजना आयोग के तत्वावधान में एक कार्यकारी आदेश द्वारा यूआईडी प्राधिकरण बनाने की आवश्यकता की सराहना की गई।

(iii) केंद्रीय और राज्य यूआईडी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

(iv) सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईटी) को चुनाव आयोग के साथ जुड़ाव के तौर-तरीकों पर काम करने और लिंकेज के लिए एमओआरडी और पीडीएस के साथ चर्चा शुरू करने का निर्देश दिया गया।

(v) चरणबद्ध योजना के लिए प्रस्तावित अनुक्रम का सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन प्रदान किया गया।

३०  अगस्त,२००७  को हुई सातवीं बैठक में, प्रस्तावित प्रशासनिक ढांचे और यूआईडी प्राधिकरण की संरचना और वित्तीय निहितार्थ सहित जनशक्ति की आवश्यकता पर चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि संसाधन मॉडल पर आधारित एक विस्तृत प्रस्ताव समिति के ‘सैद्धांतिक’ अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाए। इस स्तर पर, ईजीओएम ने २७  नवंबर, २००७  को अपनी पहली बैठक बुलाई। इस बैठक में, निम्नलिखित बिंदुओं पर आम सहमति बनी:

(i) एक पहचान संबंधी निवासी डेटाबेस बनाने की स्पष्ट आवश्यकता है, भले ही डेटाबेस डेटा के नए संग्रह पर बनाया गया हो या पहले से मौजूद डेटा (जैसे चुनाव आयोग की मतदाता सूची) पर आधारित हो।

(ii) इसके अतिरिक्त, एक संस्थागत तंत्र बनाने की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है जो डेटाबेस का ‘स्वामित्व’ होगा और इसके रखरखाव और अद्यतन के लिए जिम्मेदार होगा।

(iii) अगली बैठक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और यूआईडी योजनाओं के मिलान से संबंधित विषयों पर विचार करने के लिए होगी, जिसमें कार्यप्रणाली, प्रभावी कार्यान्वयन तकनीक, ऊपर बताए गए संस्थागत तंत्र की पहचान और योजना को लागू करने के लिए समय सारिणी शामिल है।

इसके बाद कार्यक्रम के तौर-तरीकों पर काम करने के लिए बैठकों की एक श्रृंखला हुई। उसमें कुछ मुद्दे उठाए गए थे और उन मुद्दों के समाधान के लिए सचिवों की एक समिति का गठन किया गया था। उक्त समिति ने अपनी सिफारिशें दीं जिन पर ईजीओएम ने चर्चा की। आधार योजना को सैद्धांतिक मंजूरी देने के बाद कैबिनेट सचिव को यूआईडी के विस्तृत संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देने के लिए बैठक बुलाने का निर्देश दिया गया।

कैबिनेट सचिव की सिफारिश पर विचार करने के बाद, दिनाँक २८ जनवरी, २००९  को भारत सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या ए-43011/02/2009-प्रशासन जारी किया गया था जिसने यूआईडीएआई को योजना आयोग की एक संलग्न कार्यालय के रूप में गठित और अधिसूचित किया था। यूआईडीएआई के गठन के परिणामस्वरूप, आधार नामांकन के लिए १४७.३१  करोड़ रुपये के आवंटन को वित्त मंत्री द्वारा वित्त पर स्थायी समिति की सिफारिश पर अनुमोदित किया गया। योजना आयोग के सचिव द्वारा ३५  राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को यूआईडीएआई के कार्यान्वयन में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों (जैसे कि नियुक्ति राज्य/संघ राज्य क्षेत्र यूआईडी आयुक्तों, रसद सहायता और विभिन्न विभागों और राज्य इकाइयों के साथ समन्वय) से अवगत कराते हुए २५ फरवरी, २००९ का डेमो-आधिकारिक पत्र भेजा गया।

सलाह देने और यूआईडीएआई से संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक कोर ग्रुप का गठन किया गया था। यूआईडीएआई को अपना कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए बजट आवंटित किया गया था। इसके लिए स्टाफ भी आवंटित किया गया था। समय-समय पर कोर ग्रुप की बैठक होती रहती है। कोर ग्रुप ने अन्य बातों के साथ-साथ यह निर्णय लिया कि यूआईडीएआई परियोजना को शुरू करने के लिए २००९ के मतदाता सूची डेटाबेस के साथ शुरुआत करना बेहतर है। पीडीएस अभिलेखों के डिजिटलीकरण की स्थिति राज्यवार खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से स्थायी आयोग/यूआईडी को भेजने की मांग की गई थी। यह और इस दिशा में उठाए गए अन्य कदमों की परिणति ०२  जुलाई, २००९ को अधिसूचना जारी करने के रूप में हुई, जिसके तहत श्री नंदन नीलेकणि को पांच साल के प्रारंभिक कार्यकाल के लिए यूआईडीएआई के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था और ये अध्यक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के स्तर का था। उन्होंने २४ जुलाई, २००९  को कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद, ३०  जुलाई, २००९  को यूआईडीएआई की प्रधानमंत्री परिषद का गठन किया गया, जिसकी पहली बैठक १२ अगस्त २००९ को हुई, जहां यूआईडीएआई के अध्यक्ष ने प्रस्तावित यूआईडी परियोजना पर व्यापक रणनीति और दृष्टिकोण पर विस्तृत प्रतिनिधित्व दिया। प्रस्तावों में से एक “यूआईडी के लिए जल्द से जल्द एक विधायी ढांचा प्रदान करना था” ताकि इसे अपना कार्य करने के लिए कानूनी मंजूरी मिल सके। कुछ अन्य समितियाँ जैसे बायोमेट्रिक्स मानक समिति, जनसांख्यिकीय डेटा मानक और सत्यापन प्रक्रिया समिति को परियोजना के लिए एक समर्थन प्रणाली के रूप में स्थापित की गयी थी, जिन्होंने दिसंबर २००९ में अपनी संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की। यहां तक ​​कि यूआईडी पर एक कैबिनेट समिति का गठन 22 अक्टूबर के आदेशों के तहत किया गया था। २००९ में हुई कैबिनेट समिति की अध्यक्षता प्रधान मंत्री ने की थी, जिसका उद्देश्य यूआईडीएआई से संबंधित सभी मुद्दों (जिसमें इसके संगठन, नीतियां, कार्यक्रम, योजनाएं, वित्त पोषण और इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली शामिल है) को कवर करना था।

इस भाग में हमने देखा की किस प्रकार रिट याचिकाएं दाखिल कर के आधार परियोजना को चुनौती दी गई। फिर विधायिका के द्वारा आधार परियोजना को वैधानिक छत्र की छाया प्रदान की गयी, तथा ११ अंको को सांख्यिक स्वरूप के साथ आधार हमारे सामने आया। अगले अंक में हम देखेंगे की श्री के एस पुत्तुस्वामी (सेवानिवृत न्यायधीश) के रिट याचिका पर क्या निर्णय दिया गया।

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