Sunday, December 4, 2022

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Right to privacy

आधार कार्ड बनाम निजता का अधिकार भाग -2

इस अंक में हम देखेंगे की श्री के एस पुट्टस्वामी (सेवानिवृत न्यायधीश) के रिट याचिका पर क्या निर्णय दिया गया।

आधार कार्ड बनाम निजता का अधिकार भाग -१

आधार संरचना पर हमले की अगुवाई करने की पहल याचिकाकर्ताओं, अर्थात् न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी (सेवानिवृत्त) और श्री प्रवेश खन्ना, के नेतृत्व में वर्ष २०१२ में एक रिट याचिका (सिविल) संख्या ४९४ /२०१२ दाखिल करके की गई। उस समय, आधार योजना विधायी छत्र के अधीन नहीं थी अर्थात इसके लिए किसीभी प्रकार  के अधिनियम या संहिता को विधायिका के द्वारा पारित और लागू नहीं किया गया था।

Laws to claim the Right To Be Forgotten must be in place

Controls on the internet, censorship of Over The Top (OTT) content, accountability of Social Media platforms and streaming partners all come under this grey area, till legislation is ultimately put in to place to provide checks and balances. Till then, there’s discussion, deliberation and debate on rights and liabilities, on freedoms and liberties. It’s only when a sprinkling of stakeholders, mostly powerful, begin to move court that an issue is perceived as vital and the need to address it through interventional judgement first and then pertinent legislation, identified.

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