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लोगों की जान पर खेलकर कांग्रेस की रैली

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लोगों की जान पर खेलकर कांग्रेस की रैली

कोरोना का सबसे खतरनाक वैरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ राजस्थान में भी पहुंच गया है। एक ही परिवार के 4 और उनके रिश्तेदारों सहित कुल 9 लोगों की जीनोम सिक्वेंसिंग रिपोर्ट रविवार को पॉजिटिव आई। पति-पत्नी और उनके दो बच्चे 25 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से यात्रा करके दुबई-मुंबई होते हुए जयपुर पहुंचे थे। पूरा परिवार राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) में भर्ती है। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। इनके कॉन्टैक्ट में आए अन्य लोगों को निगरानी में रखा गया है। SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भण्डारी ने इसकी पुष्टि की है। राजस्थान देश में पांचवा राज्य है, जहां ओमिक्रॉन संक्रमित मिले हैं। इसके साथ ही जयपुर ऐसा शहर बन गया है, जहां ओमिक्रॉन के सबसे ज्यादा मरीज हैं।

स्वास्थ्य सचिव वैभव गालरिया ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका से आए परिवार सहित उनके सम्पर्क में आए 34 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 9 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। बाकी 25 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव है। जबकि ये परिवार 25 नवंबर के बाद से लगभग 500 लोगों के संपर्क आ चुका है ऐसे में डर है कि सभी 500 लोगों की जांच होती है तो ऑमिक्रोन के मामलों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में ऑमिक्रॉन के मामले बढ़ने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी की तरफ से राजस्थान के जयपुर में महंगाई हटाओ मुद्दे पर केन्द्र सरकार के खिलाफ 12 दिसंबर को एक विशाल रैली का आयोजन किया जा रहा है जिसमें पार्टी की तरफ से 2 लाख लोगों की भीड़ का लक्ष्य रखा गया। सभी पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रैली में ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाएं। रैली में ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाई जाए इसलिए प्रभारी मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में भेजा गया है।

अब आप सोचिए कि देश के जिस शहर में ऑमिक्रॉन के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं उस शहर में 2 लाख लोगों की भीड़ जुटेगी तो संक्रमण की रफ्तार क्या होगी। कोरोना की दूसरी लहर से पहले जिस तरीके से चुनावों में भीड़ इकट्ठा हुई और उसके बाद कोरोना से मरने वालों की संख्या में तेज रफ्तार आई, जिसे कैसे भुलाया जा सकता है। इस रैली को लेकर राजस्थान न्यायालय का फैसला भी बेहद आश्चर्यजनक है। 12 दिसंबर को होने वाली कांग्रेस की इस विशाल रैली को रद्द करवाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसे कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि ये जनहित से जुड़ा मामला नहीं है। हो सकता है राजस्थान हाई कोर्ट के लिए ये जनहित का मामला नहीं हो लेकिन हमारे लिए तो ये जनहित का मामला है।

वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना के सबसे खतरनाक वेरिएंट ऑमिक्रॉन से प्रदेशवासियों को बचाने की तैयारियों को लेकर बैठक करने की बजाय 12 दिसंबर को जयपुर में कांग्रेस की मंहगाई हटाओ रैली में ज्यादा से ज्यादा भीड़ कैसे जुटाई जाए इसकी तैयारियों की बैठक ले रहे हैं।शायद सीएम गहलोत को जनता की कोई फिक्र नहीं है क्योंकि यदि ऑमिक्रॉन से हालत बिगड़े भी तो वो हमेशा की तरह केन्द्र सरकार पर ठीकरा फोड़ देंगे। केन्द्र सरकार के खिलाफ मंहगाई हटाओ रैली करने के साथ साथ कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ये भी सोचना चाहिए कि राजस्थान में उनकी खुद की सरकार है और आज राजस्थान में पैट्रोल डीजल के दाम पड़ोसी सभी राज्यों से अधिक है और इतना ही नहीं बिजली यूनिट की दर भी पड़ोसी राज्यों से अधिक है। यदि लोगों की जान पर खेलकर महंगाई हटाओ रैली करनी ही है तो क्यों ना इसकी शुरुआत राजस्थान में पैट्रोल डीजल और बिजली यूनिट की दरों को कम करके की जाए।

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