Thursday, October 28, 2021
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कश्मीर में फिर से आतंक, डर से पलायन शुरु, सरकार का आतंकी क्लीन अभियान शुरु

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Jitendra Meena
Print and Digital Journalist | Author | Analyst | Writer | Founder/Editor-in-Chief - GraminDastak | Blog -AajSahitya.in

जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग पर गंभीर केंद्र सरकार ने शनिवार को दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक बुला ली है। बैठक के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा दिल्ली रवाना हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर मंथन होगा। घाटी में हिंदुओं व सिखों को निशाना बनाए जाने पर चर्चा के साथ टारगेट किलिंग के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई के लिए रणनीति बनेगी।

गृहमंत्री के गुजरात दौरे से लौटने के तत्काल बाद बैठक बुलाई गई है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल तथा गृह सचिव अजय भल्ला के भी उपस्थित रहने की उम्मीद है। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

आईबी के वरिष्ठ अधिकारी श्रीनगर भेजे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की NSA अजीत डोभाल के साथ हुई बैठक के बाद आईबी के एक वरिष्ठ अधिकारी को श्रीनगर भेजा गया है जो ऑपरेशन की निगरानी करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि भारी तादाद में आतंकियों तथा उनके कमांडरों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद पाकिस्तानी हैंडलर निराश हो गए हैं। उन्होंने अपनी रणनीति बदलते हुए निहत्थे पुलिसवालों, नागरिकों, नेताओं तथा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद अब आतंकियों की बौखलाहट खुलकर सामने आने लगी है। आतंकवादी अब आम नागरिकों को निशाना बनाकर घाटी में दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को आतंकियों द्वारा दो शिक्षकों की हत्या के बाद घाटी में पिछले पांच दिनों में मारे गए आम नागरिकों की संख्या सात पहुंच गई है। भारत मे नवरात्रा आरम्भ होते ही आतंकियों ने हत्याएँ करना शुरु कर दिया है , आतंकी ज्यादातर घाटी के हिन्दुओं और गैर मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं। इनमें से छह की हत्या शहर में हुई है। इनमें चार अल्पसंख्यक समुदाय से थे। इस तरह से देखा जाए तो एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर को 90 के दशक में लौटाने की साजिश हो रही है।

जानकार इसे अभी 90 के दशक जैसी स्थिति बनाने की कोशिश से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, आतंकी गुटों की कमजोर स्थिति के मद्देनजर सुरक्षा बल इस संभावना से इनकार कर रहे हैं।

अक्टूबर मे आतंकियो की वारदातें

2 अक्तूबर : श्रीनगर के चट्टाबल निवासी माजिद अहमद गोजरी की आतंकियों ने हत्या की,
2 अक्तूबर : एसडी कॉलोनी बटमालू में मोहम्मद शफी डार को गोलियों से भूना,
5 अक्तूबर : श्रीनगर के मशहूर दवा कारोबारी माखन लाल बिंदरू की शाम को गोली मारकर हत्या,
5 अक्तूबर : एक घंटे बाद चाट विक्रेता बिहार निवासी वीरेंद्र पासवान की हत्या,
5 अक्तूबर : कुछ ही मिनट बाद उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में मोहम्मद शफी लोन की हत्या,
7 अक्तूबर : श्रीनगर में महिला प्रधानाध्यापिका समेत दो शिक्षकों की गोली मारकर हत्या

पहले भी कायराना वारदातें

2 जून : त्राल में आतंकियों ने भाजपा नेता राकेश पंडिता को मौत के घाट उतारा,
8 जून : अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या,
22 जून : जम्मू-कश्मीर में इंस्पेक्टर परवेज अहमद पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया,
15 जुलाई : सोपोर में भाजपा नेता मेहराजुद्दीन मल्ला को अगवा किया गया, पर दस घंटे में ही उन्हें मुक्त करा लिया गया,

सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास : डीजीपी

जम्मू-कश्मीर में शिक्षकों की हत्या की घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि कश्मीर में नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्या का मकसद भय का माहौल बनाना और सदियों पुराने सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाना है। सिंह ने स्कूल में संवाददाताओं से कहा, यह दरिंदगी, वहशत और दहशत का मेल है। इस स्कूल का परिसर काफी फैला हुआ है और बड़े मैदान तथा तीन मंजिला इमारतें हैं, लेकिन कोई सीसीटीवी नहीं है। सिंह ने कहा कि जो लोग मानवता, भाइचारे और स्थानीय मूल्यों को निशाना बना रहे हैं, वे जल्द ही बेनकाब होंगे। उन्होंने हालिया हमलों को कश्मीर के मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए आरोप लगाया कि आतंकवादी पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहे हैं, ताकि घाटी में शांति बहाली में बाधा डाली जा सके।

श्रीनगर की सिख सुपिंदर कौर और जम्मू के हिंदू दीपक चंद की हत्या के दो दिन पहले लश्कर-ए-तैयबा से संबंधित समूह ‘द रेसिस्टेंस फोर्स’ ने मंगलवार को तीन लोगों की मौत की जिम्मेदारी ली थी। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं नृशंस हैं। DGP सिंह ने कहा, पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं नृशंस हैं। ऐसे निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो समाज के लिए काम कर रहे हैं और जिनका किसी से भी कोई लेना-देना नहीं है। यह कश्मीर में डर का वातावरण पैदा करने और सांप्रदायिक रंग देकर यहां के सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश है।

BBC News की एक रिपोर्ट के मुताबिक बढती घटनाओं के बीच ऐसी खबरें है की पण्डितो ने एक बार फिर से पलायन करना शुरु कर दिया है, कश्मीर घाटी मे आतंकियो के निशाने पर अल्पसंख्यक हिंदू है यह कहना कोई गलत नही है लेकिन उनकी सुरक्षा एक बडी जिम्मेदारी है जिसको लेकर केंद्र सरकार अपनी रणनीति तैयार कर ली है।

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