Friday, October 7, 2022
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आयुर्वेद की पहचान की लडाई

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ये IMA वालों की चाल आज से नहीं है आयुर्वेद, योग ख़त्म करने की ये बहुत बरसों से चला आ रहा है क्यूंकि आयुर्वेद, योग बिना खर्च के बीमारी ठीक करता है ऐसे में तो इनका एकाधिकार ख़त्म हो जायेगाl आज जो ये IMA वाले इतना चिल्ला रहे हैं ये तब कहाँ गए थेl

1. तब हार्ट में लगने वाला स्टैंड 5000 के जगह लाखों में बिक रहा थाl

2. दवाई के नाम पे लुट मचा के हजारों में बेचा जा रहा था वो तो मोदी सरकार के जेनेरिक दवाई लोगों के सामने लाया तब पता चला की दवाई इतनी सस्ती हो सकती हैl

3. सरकरी हॉस्पिटल में जब डॉक्टर रहते नहीं है और बोला जाता है इनके प्राइवेट क्लिनिक में जा के मिलो तब ये IMA वाले कहाँ जाते हैंl

4. चरक के बारे में इन्हें पढाया जाता है और चरक द्वारा बनाया गया बहुत से उपकरण जो शल्य चिकित्सा में उपयोग होता है इन्ही का परिस्कृत रूप हैl

5. ये IMA वाले ये आपको ये नहीं बतायेंगे की ये मरीजों के ऊपर प्रयोग ही करतें है तभी तो बोलतें है ” 5 दिन के बाद मिलना नहीं ठीक होगा तो दवाई बदल देंगे ” इसका क्या मतलब हुआ आप हम पे प्रयोग ही कर रहे हैl

6. इन्होने मिल के आयुर्वेद में होने वाले शोध को रोका ताकि इनका एकाधिकार बना रहेl

7. चूँकि आयुर्वेद घर घर में मौजूद है ऐसे में बिना पैसे बहाए हुए इलाज संभव है ऐसे मैं इनका कमाई बंद हो जायेगा, दिक्कत IMA वालों को यहाँ हैl

8. जब मोदी सरकार ने आयुष मंत्रालय ने अर्युर्वेद वालों को शल्य क्रिया की अनुमति तो इसका विरोध क्यों किया, इसलिए किया क्युकी इन्हें डर था की इनका एकाधिकार ख़त्म हो जायेगाl जबसे पहला एंजियोप्लास्टी भारत में अन्ग्रेओं से समय हुआ तभी से अंग्रेजों को आयुर्वेद से खतरा लगा और IMA वाले बस इसे आगे बढ़ा रहे हैंl

9. इनको डर बाबा रामदेव से ये है की बाबा रामदेव ने आयुर्वेद में शोध शुरू किया, वैज्ञानिक प्रमाणिकता के साथ में आयुर्वेदिक दवाई बनायीं, जिसे यही IMA वाले कभी बेकार, इसका कोई प्रमाण नही है बोला करते थेl

10. जानबूझ कर आयुर्वेद और आयुर्वेद को आगे बढ़ाने वालों को झूठा, फर्जी, गैर प्रामणिक, अवैज्ञानिक बताया जाता रहा ताकि लोगों में इसके प्रति विश्वास न हो, चूँकि किसी चीज़ पर विश्वास नहीं होगा तो वो वैसे भी आपके शरीर में काम नहीं करेगाl ये लोग आपके मस्तिष्क के खेलते हैंl

11. इनका काम क्या है, पैसे लेकर, led बल्ब, पेंट, को एन्टी बैक्टीरियल होने का सर्टिफिकेट देना अलग टाइप का नशा

12. ये तब भी चुप रहते हैं जब मजबूरी का फायदा उठाने के दवाई कम्पनी महामारी के समय अपना दाम बढ़ा देते है

13. ये IMA वाले तब चुप रहते हैं जब लाश ले जाने के लिए भी गरीबों से लाखों लेते हैंये IMA वाले तब चुप रहे जब पूरा लेफ्ट-लिब्रान्दू, कांग्रेस इनके वैक्सीन के खिलाफ़ बोल रहा था, बोलेंगे भी कैसे ये खुद भी नहीं चाहते थे कि भारत में वैक्सीन बने

इन IMA वालों को डर है की इनका एकाधिकार बाबा जी ख़त्म के देंगे, उन्होंने जो डर फैलया हुआ है वो ख़त्म हो जायेगा और ये डर मुझे अच्छा लगाl आयुर्वेद सिर्फ जडीबुटी तक सिमित नहीं है ये दिनचर्या योग की बात करता, आप के विशेष दिनचर्या को अपनाएंगे, वात, पित्त, कफ को कंट्रोल में रखेंगे तो बीमार नहीं पड़ेंगे ये सब बिना पैसा का होगाl और यही डर है विदेश के बड़े बड़े फार्मा कम्पनी को जिनकी पुरे विश्व में लोबिंग हैl इस लोबिंग को टक्कर दिया है तो बाबा रामदेव ने, ऐसा नहीं है एलोपेथी ने इलाज नहीं किया, किया लेकिन सिर्फ प्रयोग किया बच गया दवाई ठीक नहीं बचा तो दवाई चेंजl इनलोगों ने आयुर्वेद में शोध होने नहीं दिया, जिसके कारण आयुर्वेद पिछाड गया जिस आयुर्वेद को इलाज का सबसे उन्नत तरीका मन जाता था आज वो गुम हो चूका है, इसी गुमनामी को बाबा रामदेव ख़तम कर रहे हैं जिसके कारण ये IMA वाले डर रहे हैं

कुछ लोग जो अब बेकफुट पर है अब ये बोलना शुरू कर दिए हैं की ये कोई आयुर्वेद और एलॉपथी की लड़ाई नहीं है, ये तो स्वघोषित योगगुरु बाबा रामदेव की लडाई है इसके पास कोई डिग्री नहीं है , ये आदमी योग और आयुर्वेद का मालिक नहीं है इससे पहले भी आयुर्वेद और योग था , ये तों व्यापारी है मेरा मन करता उनलोगों का मुह तोड़ दें ,

योगगुरु कोई ऐसे नहीं बनता ये वही लोग बोलते हैं जिन्हें भारतीये गुरुकुल शिक्षा पद्धति, गुरु -शिष्य पद्धति के बारे में नहीं पता है, उन्हें लगता “अंग्रेज मेकाले” की शिक्षा पद्धति से पढ़ा हैl उन्हें लगता है की “अंग्रेज मेकाले” की शिक्षा पद्धति ही ज्ञान है और ये उनका एकाधिकार है शिक्षा परl उन्हें लगता है, जो आदमी गुरुकुल में पढ़ा हो, हिमालय जा कर योग का शिक्षा लिया हो आर्युवेद के बारे में गुरुकुल से ज्ञान प्राप्त किया हो उसके पास इतना ज्ञान कैसे हो सकता है जो उनको टक्कर देl

ये लडाई तो तभी शुरू हो गया था जब इसी IMA वालों ने भारत सरकार को आयुष मत्रालय को शल्य क्रिया करने की अनुमति देने पर विरोध किया था, क्यों किया था ये बताओ तुम्हे डर था की एकाधिकार ख़तम हो जायेगा और आज बोलते हो ये आयुर्वेद और एलॉपथी की लड़ाई नहीं हैऔर हाँ बाबा रामदेव है मालिक योग और आयुर्वेद, इन्ही के वजह से आज पुरे विश्व में योग दिवस मनाया जाता है, घर घर में लोग योग करते हैं, आयुर्वेद का उपयोग करतें हैंl इन्ही के वजह से आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध शुरू हुआ है, नहीं तो ये एलॉपथी वाले आयुर्वेद को दादी नानी का इलाज बोल के मजाक बनाते थे, अवैज्ञानिक बताते थेl अब इनको डर लग रहा है की आयुर्वेद में शोध शुरू हो गया है आगे इनका क्या होगा, इनका मकसद सिर्फ बाबा रामदेव को रोकना है क्यूंकि उनको पता है की योग और आयुर्वेद जिस ऊँचाई पर है अगर बाबा जी को रोका जाये तो ये भी ख़तम हो जायेगा और फिर से एकाधिकार हो जायेगाl और ऐसा कहाँ लिखा है की कोई योगगुरु व्यापर नहीं कर सकता है, जिनको फ़ायदा हुआ है वो तो खरीदेंगे ही, और ये कमाया हुआ पैसा अपने ऊपर तो खर्च नहीं करतें, आयुर्वेद के शोध, गुरुकुल शिक्षा को पुनर्जीवित करने में खर्च करते हैंl

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