Sunday, September 25, 2022
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किसान और क़ानून के बीच अम्बानी अडानी का विरोध क्यों?

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आपने हाल ही में हुए गणतांत्रिक दंगे के बारे में देखा, पढ़ा, सुना होगा और गुस्सा भी आया होगा नेतृत्व पर। क्यों पुलिस को फ्री हैंड नहीं किया जाता, क्यों दिल्ली को बंधक बनने दिया जाता है, क्यों सरकार इन दंगाइयों पर हाथ उठाने से बचती है जैसे तमाम सवालों ने आपको हैरत में भी डाला होगा। हाल ही में रिहाना, मिया अश्लील खलीफा और ग्रेटा बेवकूफ थन्बर्ग के ट्वीट से अचंभा भी हुआ ही होगा। लेकिन अभी हल ही में मूर्खता की प्रतिमूर्ति ग्रेटा नॉन-मीट्रिक थन्बर्ग ने गलती से टूलकिट ट्वीट की, इन प्रमोटर्स की किसानों के प्रति उबाल मारती भावनाओं का सच भी बाहर आ गया। सुना है कि पी आर एजेंसी ने पैसे काट लिए, अब कार्बन उत्सर्जन को रोकने हवाई जहाज में कैसे उड़ेंगी ये मोहतरमा वो देखने लायक होगा।

आपको याद होगा कुछ समय पूर्व स्वीडन में दंगे हुए थे। ये स्कूल से भागी हुई ग्रेटा भी उसी देश की है लेकिन चूँकि पैसे नहीं मिले तो ट्वीट भी नहीं हुआ। अब जिसकी श्रद्धा आस्था अपनी मिटटी के प्रति नहीं है,वो भारत के किसानों के लिए ट्रक भर आंसू बहा दी है।

दूसरी बड़ी शख्सियत हैं रिहाना, जिन्होंने अपने जीवन में सिवाय अश्लीलता फ़ैलाने के कुछ नहीं किया है। भले और संस्कारित घरों के लोग इसको देखते भी डरते हैं, रात में दिख जाये तो भागने के अलावा कोई उपाय नहीं। वैसे कैपिटल हिल प्रदर्शन के समय इनके भी मोबाइल का रिचार्ज ख़त्म हो गया था तो ये भी उस टाइम ट्वीट नहीं कर सकीय थी, वैसे हैं ये बारबाडोस की लेकिन अमेरिका जैसे ऐश आराम कहाँ बारबाडोस सा गरीब, सो आज कल अमरीकन है चाची।

और मिया अश्लील खलीफा का क्या ही कहा जाये। इनके नाम लेने से बच्चे एग्जाम में फेल हो जाते हैं, समझ ही गए होंगे आप। अब ये भी देखना रह गया था कि इन जैसे लोग भी भारत जैसी संस्कृति को ज्ञान देंगे।

ये तो है कहानी का एक पक्ष, जो असली कहानी वामपंथ प्रायोजित है, जिसमें लोगिस्टिक और डिजिटल के साथ आर्थिक सपोर्ट जॉफ बेजोस दे रहा है, उसमें ये समझना जरुरी है कि इन सब में अम्बानी और अडानी का क्या रोल है? उन्हें किस कारण टारगेट किया जा रहा है?

अभी हाल ही में अपने सुना होगा कि ट्रंप प्रशासन ने चीनी कंपनी हुआवे को अमेरिका में बैन कर दिया था। साथ ही साथ, रिलायंस को भारत सरकार ने 5 जी टेक्नोलॉजी के लिए अप्रूवल भी रिलायंस बिना चीनी कंपनियों के सहयोग के अपने सिस्टम लॉन्च करने जा रही थी।

भारत अभी 3 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था है, जिसमें अधिकतर लोगों के घरों में सिलिंडर पहुचाये गए हैं, साफ पानी पहुँचाया जा रहा है, बिजली और सड़क जैसी अन्य जरूरतों का प्रबंध भी किया जा रहा है और 2024 तक सरकार सबको घर देने की योजना पर कार्यरत है, जिसमें चीनी सहयोग युद्धस्तर पर कम किया गया है। इन सबके बीच, देश के विकास और प्राकृतिक मूल्यों के संवर्धन में अम्बानी और अडानी की योजनाओं के लिए ही इन्हें न सिर्फ चिन्हित कर इनका बहिष्कार किया जाता है, अपितु इन्हें कमजोर कर भारत के औद्योगिक विकास को छिन्न भिन्न कर चीन या यूरोप के आश्रित रहने देने के लिए ही एक ऐसे ग्लोबल पर्सपेक्टिव का निर्माण किया जाता है, जिसमें भारत से घृणा हो, भारत की विचारधारा से लोग नफरत करें, हम आज भी सपेरों का ही देश कहलायें, जबकि सच्चाई साडी दुनिया जानती है कि विश्व व्यापर की धुरी रहा ये देश, कला और संस्कृति के साथ विज्ञान और अन्य विषयों में विश्वगुरु यूँ ही नहीं था।

इसी लक्ष्य के माध्यम से जातिगत विद्वेष फ़ैलाने, खालिस्तानी आंदोलन चलाने, जिसमें लाहौर और करतारपुर साहिब नहीं, जिसमें ननकाना साहिब नहीं, जिसमें मुल्तान और साहीवाल नहीं, कसूर नहीं, इन मजहबी मकोड़ों को पैसे दिए जाते हैं ताकि ये उत्पात मचाएं, पुलिस गोली चलाये, लोग हैशटैग आस्क इंडिया व्हाई चला सरकार हटा दें, और हमारे सर पर मौन सरकार मुसल्लत कर हमें फिर से कमजोर कर दिया।

सोचिये तीन ट्रिलियन इकॉनमी में जो देश अस्सी करोड़ लोगों को कोरोना काल में मुफ्त भोजन करा सकता है, लगभग इतनी ही इकॉनमी फ्रांस और इंग्लैंड की भी है, जबकि आबादी हमसे दस गुना कम है, यदि मुक्त बाजार व्यवस्था लागु हो और हमारी अर्थव्यवस्था कहीं 50 ट्रिलियन हो तो क्या यूरोप और क्या अमेरिका, चीन तो लगता ही कहाँ है, सब लुट जायेंगे। इसीलिए देश में ही पैसे के भूखे लोगों को चाँद सिक्के फेंक कर ख़रीदा जाता है और ये सब पेड कैंपेन चलाये जाते हैं।

एक समाज, एक व्यवस्था एक देश के नाते हमें अब ये तय करना होगा कि ऐसे कोई भी मुँह उठा कर दिल्ली न घेरने लगे, किसान गरीब मजदूर जैसे जार्गन्स से ऊपर उठ कर देश को ध्यान में रखना होगा तभी इन विदेशी नाचने वाली पॉप और पोर्न स्टार्स से लड़ और जीत पाएंगे। यकीन रखिये, देश सालों बाद सही हाथों में आया है और साँपों की बाम्बी में तेज़ाब डाला गया है, कुछ न कुछ तो होगा ही, लेकिन उपचार के लिए लेकिन घाव सही हो जाता है।

जय हिन्द जय भारत

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